
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को अपने दो दिवसीय दौरे पर संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंच चुके हैं। बाबा विश्वनाथ की नगरी में पीएम मोदी का यह प्रवास केवल एक सामान्य दौरा नहीं, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए शंखनाद माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के हाई-वोल्टेज प्रचार से सीधे काशी पहुंचे प्रधानमंत्री का पूरा ध्यान अब उत्तर प्रदेश पर केंद्रित है। बंगाल में ममता बनर्जी के गढ़ में चुनावी ताल ठोकने के बाद, भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में ‘मिशन 2027’ की नींव मजबूत करने में जुट गया है।
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सीएम और राज्यपाल ने किया स्वागत
वाराणसी पहुंचने पर प्रधानमंत्री का स्वागत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस दौरे में प्रधानमंत्री के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी यह साफ संकेत दे रही है कि पार्टी ने चुनावी गियर बदल दिया है। प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम में शीश नवाने के साथ ही करीब 6,332 करोड़ रुपये की 163 विकास परियोजनाओं की सौगात देकर पूर्वांचल की राजनीति को एक नई गति देने का प्रयास किया है।
अखिलेश की ‘पीडीए’ बनाम मोदी की ‘नारी शक्ति’
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय समाजवादी पार्टी की ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) पॉलिटिक्स ने भाजपा के लिए कड़ी चुनौती पेश की है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने इसी रणनीति के जरिए भाजपा को 33 सीटों पर समेट कर बड़ा झटका दिया था। अब अखिलेश यादव 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भी इसी फॉर्मूले को धार दे रहे हैं। विपक्ष की इस काट के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने काशी से महिला कार्ड और विकास की राजनीति का नया समीकरण पेश किया है।

पीएम मोदी का जन-आक्रोश महिला सम्मेलन इसी रणनीति का हिस्सा है। पिछले दिनों नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संसद में असफल होने के बाद, भाजपा अब इसे विपक्ष की महिला विरोधी मानसिकता बताकर प्रचारित कर रही है। काशी में आयोजित इस भव्य सम्मेलन का प्रबंधन पूरी तरह से महिलाओं के हाथों में सौंपकर पीएम मोदी ने आधी आबादी को यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा ही उनकी असली हितैषी है। भाजपा का मानना है कि यदि महिला वोट बैंक मजबूती से साथ खड़ा हो गया, तो विपक्ष के जातिगत समीकरण धरे के धरे रह जाएंगे।
परियोजनाओं की लगाई झड़ी
भाजपा के लिए पूर्वांचल हमेशा से सत्ता का द्वार रहा है, लेकिन हाल के चुनावों में यहां पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है। 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र ने भाजपा को उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं दिए। यह क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से खुद पीएम मोदी सांसद हैं और सीएम योगी का गढ़ गोरखपुर भी इसी क्षेत्र में आता है। यही कारण है कि पीएम मोदी ने वाराणसी से कमान संभालते हुए विकास परियोजनाओं की झड़ी लगा दी है।

वाराणसी से पीएम ने दो अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई, जो पुणे और मुंबई को जोड़ेंगी। साथ ही, अमूल से जुड़े दूध उत्पादकों को 105 करोड़ रुपये का बोनस हस्तांतरित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को साधने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री का फोकस केवल काशी तक सीमित नहीं है। वे पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक के कैडर को सक्रिय करने में जुटे हैं। नोएडा में सेमीकंडक्टर चिप फैक्ट्री, जेवर एयरपोर्ट और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए भाजपा यह संदेश दे रही है कि विकास ही उसकी प्राथमिकता है।
योगी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा चुनाव
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने हाल ही में स्पष्ट कर दिया है कि, 2027 का चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। वाराणसी में पार्टी के रणनीतिकारों का यह जमावड़ा कार्यकर्ताओं में उस सुस्ती को दूर करने के लिए है, जो लोकसभा चुनाव के दौरान देखी गई थी। प्रधानमंत्री का काशी दौरा एक मास्टर स्ट्रोक की तरह देखा जा रहा है, जहां वे एक तरफ विकास की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ भावनात्मक और सामाजिक मुद्दों के जरिए विपक्ष के पीडीए गठबंधन को कमजोर करने का मंत्र दे रहे हैं।
अगले साल फरवरी-मार्च 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए अब उल्टी गिनती शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री का यह दौरा यह स्पष्ट करता है कि भाजपा अब पूरी तरह से ‘इलेक्शन मोड’ में है और वाराणसी की धरती से निकली यह लहर पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीतिक दिशा तय करेगी।
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