फरहाना भट्ट ने खामेनेई को कहा ‘मसीहा’, बोलीं- सहरी के बाद सो नहीं पाईं, वो हमेशा जिंदा रहेंगे हमारे दिलों में

मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच बॉलीवुड से एक हैरान करने वाली खबर आ रही है। दरअसल, अमेरिका-इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में मारे गये ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को एक्ट्रेस फरहाना भट्ट ने मसीहा करार दिया है। 86 वर्षीय खामेनेई की मौत अमेरिकी-इजराइली हमले में 28  फरवरी 2026 को हो गई थी, जिसकी पुष्टि एक मार्च की सुबह ईरान की सरकारी मीडिया ने की।

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इस घटना ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। जहां कुछ देशों और समूहों में खुशी का माहौल है, वहीं ईरान और उसके समर्थकों में गहरा शोक छाया हुआ है। इसी बीच, ‘बिग बॉस 19’ की रनर-अप और कश्मीरी मूल की अभिनेत्री फरहाना भट्ट ने खामेनेई की मौत पर गहरा दुख जताया है और उन्हें ‘मसीहा’ जैसा करार दिया है।

 ‘बिग बॉस 19’ में रनर अप थी फरहाना

फरहाना भट्ट

फरहाना भट्ट ‘बिग बॉस 19’ में अपनी मजबूत छवि और संघर्षपूर्ण सफर को लेकर काफी सुर्खियां बटोर चुकी हैं। खामेनेई की मौत पर प्रतिक्रिया देते हुए फरहाना ने कहा है कि, ‘बिल्कुल, वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे, जिन्हें हम कभी नहीं भूल सकते। वे हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगे। इस घटना से सभी कश्मीरी गहरे सदमे में हैं, और आप विश्वास नहीं करेंगे, सहरी के बाद मैं बिल्कुल नहीं सोई। मैं बहुत दुखी थी। ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था।’ पोस्ट में फरहाना ने खामेनेई को ‘मसीहा’ कहकर संबोधित किया और बताया कि सहरी के बाद से वे सो नहीं पाईं।

एक्ट्रेस का ये बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां कई लोग उनकी भावनाओं से जुड़ाव महसूस कर रहे हैं। दरअसल, फरहाना कश्मीर से ताल्लुक रखती हैं और वहां के लोगों के एक बड़ा हिस्सा खामेनेई के प्रति सम्मान की भावना रखता है, खासकर शिया समुदाय।

गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिनमें तेहरान सहित कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इसकी पुष्टि की और कहा कि यह हमला ईरान के शासन को कमजोर करने और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी था।

ईरान में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक

इजराइली अधिकारियों ने बताया कि हमले में खामेनेई उनके कार्यालय में मौजूद थे, जहां वे शीर्ष सहयोगियों के साथ बैठक कर रहे थे। ईरानी राज्य मीडिया ने मौत की पुष्टि करते हुए 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया और इसे ‘शहादत’ करार दिया। हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी, रिवॉल्यूशनरी गार्ड के कमांडर और खामेनेई के परिवार के कुछ सदस्य भी मारे गए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजराइल और अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए, जिससे मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा और बढ़ गया है।

खामेनेई की मौत पर दुनिया भर से अलग-अलग प्रतिक्रिया आ रही है। कुछ पश्चिमी देश और इजराइल समर्थक इसे ‘ऐतिहासिक क्षण’ बता रहे हैं, जबकि ईरान समर्थक देश और समूह जैसे हमास ने इसे घृणित हमला करार दिया है। भारत में भी शिया समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आये हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, खासकर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में। कश्मीर में भी बड़े पैमाने पर शोक सभाएं हुईं, जहां लोग खामेनेई को प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में याद कर रहे हैं।

36 साल थे सुप्रीम लीडर

आपको बता दें कि, अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर थे। अयातुल्ला खुमैनी की मौत के बाद उन्होंने ये पद संभाला था। उन्होंने ईरान की क्षेत्रीय शक्ति के मजबूत किया। साथ ही घरेलू स्तर पर विरोध को कुचलने के लिए भी कड़े कदम उठाए। उनके शासन में ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाया, जिस पर पश्चिमी प्रतिबंध लगे।

फरहाना भट्ट

हाल के वर्षों में उनकी लोकप्रियता में कमी आई थी, जैसा कि दो हफ्ते पहले ईरानी टीवी पर एक रिपोर्टर द्वारा लाइव प्रसारण में ‘खामेनेई मुर्दाबाद’ कहने की घटना से जाहिर हुआ। बाद में रिपोर्टर ने दावा किया कि उसे ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ कहना था, लेकिन गलती से उसने खामेनेई मुर्दाबाद कह दिया, जिससे उसे अपनी नौकरी तक गंवानी पड़ी। यह घटना से पता चला है कि वहां के लोगों में खामेनेई को लेकर काफी असंतोष था।

कश्मीर की रहने वाली है फरहाना

अब बात करें फरहाना भट्ट की तो वह श्रीनगर, कश्मीर की रहने वाली हैं। वे ‘बिग बॉस 19’ में रनर-अप रहीं,  इस सीजन में अनुपमा फेम गौरव खन्ना विनर बने थे। शो में फरहाना ने अपने मजबूत व्यक्तित्व, कविताओं और संघर्ष की कहानियों से दर्शकों का दिल जीता था। हाल ही में उन्होंने अमाल मलिक के साथ एक वीडियो सॉन्ग भी रिलीज किया है। फरहाना ने कई इंटरव्यू में बताया कि, कैसे उन्होंने पारिवारिक और सामाजिक बाधाओं को पार किया, जैसे जबरन हिजाब पहनने की मजबूरी और एक्टर बनने के रास्ते में आने वाली चुनौतियों को।

फरहाना की ये प्रतिक्रिया न केवल उनके व्यक्तिगत दुख को दर्शा रही है बल्कि कश्मीर और कुछ मुस्लिम समुदायों में खामेनेई के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को भी उजागर कर रही है। फरहाना ने कहा, ‘वे एक ऐसे नेता थे, जो हमेशा मुसलमानों के हितों की रक्षा के लिए खड़े रहते हे। उनका जाना एक बड़ा नुकसान है।

 

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