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831 करोड़ की इमारत बनी खंडहर, अब निजी फर्म करेगी JPNIC का कायाकल्प

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बने जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) की आलीशान इमारत के दिन अब  बहुत जल्द बहुरने वाले हैं। प्राइवेट हाथों में सौंपने के बाद बुधवार को पहली बार JPNIC का मुख्य द्वार खोला गया। उम्मीद जताई जा रही है कि, जिस फर्म को JPNIC का जिम्मा मिला है, वह जल्द इसकी मरम्मत शुरू कर देगी। एलडीए अफसरों का कहना है कि, कैबिनेट के फैसले की कॉपी मिलते ही JPNIC को हैंडओवर करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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जर्जर हो चुका है हर फ्लोर

JPNIC

लंबे समय से रखरखाव न होने की वजह से JPNIC अंदर से काफी जर्जर हो चुका है। बंद कमरों, स्विमिंग पूल, म्यूजियम और कन्वेंशन सेंटर के हर फ्लोर पर सीलन आ चुकी है, टूट-फूट और कबाड़ जैसे हालात बन चुके हैं। 831 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हुए इस प्रॉजेक्ट की हालत देखकर लगातार इसे खोले जाने की मांग की जा रही थी।

2017 से ठप पड़ा है निर्माण कार्य

JPNIC का निर्माण साल 2015 में शुरू हुआ था, लेकिन साल 2017 में इसका काम रोक दिया गया। इस समय तक इमारत का  निर्माण कार्य तक पूरा नहीं  हुआ था। काम रुकने के समय फिनिशिंग और अन्य इंटीरियर कार्यों का करीब 50 करोड़ रुपये का बजट बचा हुआ था। नतीजा ये है कि, नौ साल तक देखरेख न होने के कारण अरबों की यह इमारत जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी है।

250 करोड़ का आएगा खर्च

इस पूरी इमारत को दोबारा नया जैसा बनाने और मरम्मत कराने में 200 से 250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह खर्च निजी फर्म उठाएगी, जिसे JPNIC 35 साल के लिए लीज पर सौंपा गया है।

600 से ज्यादा चेयर गायब

JPNIC

JPNIC में दो भव्य हॉल का भी निर्माण हुआ था। इन हॉल में रखी गई 600 से ज्यादा रिकलाइनर चेयर गायब हो चुकी हैं। ये चेयर कहां गईं, इसकी जानकारी एलडीए को भी नहीं है। वहीं, JPNIC का पिछला हिस्सा पूरी तरह जंगल के रूप में तब्दील हो चुका है। यहां तैनात सुरक्षाकर्मियों का दावा है कि, कई वर्षों से बंद होने के कारण पिछले हिस्से में सांप, बिच्छू और चमगादड़ों का डेरा हो गया है।

सब किया जाएगा दुरुस्त

लिफ्ट और डिजिटल बोर्ड: वर्षों से बंद रहने के कारण लिफ्ट और स्पोर्ट्स सेंटर के डिजिटल स्क्रीन बोर्ड खराब हो चुके हैं।

फर्नीचर और फर्श: कुर्सियां, सोफे और अन्य फर्नीचर सड़-गल चुके है और फर्श काली पड़ गई है।

इंटीरियर और एक्सटीरियर: बिल्डिंग की खिड़कियों के बाहरी शीशे टूट चुके हैं। दीवारों पर लगे महंगे पत्थर- टाइल्स उखड़कर गिर रहे हैं।

बिजली और सुरक्षा: बिजली के तार, जनरेटर और लाइटिंग सिस्टम खराब हो चुके हैं। बाउंड्री वॉल और मुख्य द्वार का काम भी पूरा किया जाएगा।

धंस रही फर्श: JPNIC की ज्यादातर टाइल्सयुक्त फर्श धंस रही हैं। अगर कोई संभल कर न चले, तो गिरकर चोटिल हो सकता है।

स्विमिंग पूल: पूल पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुका है। पूरी बिल्डिंग में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। दरवाजों पर दीमक लग गए हैं।

जर्जर हेलिपैड: हेलिपैड जर्जर है। इसकी मरम्मत पर करोड़ों रुपये का खर्च आने का अनुमान है।

एस्केलेटर बंद: JPNIC के ऊपरी फ्लोर पर जाने के लिए काफी लंबी एस्केलेटर लगाया गया था। यह जंग खा रहा है।

 

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