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35 साल की लीज पर गया JPNIC, अखिलेश बोले- दुकानदार बन गई भाजपा सरकार

लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ में बना जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) पिछले कई सालों से अधूरे निर्माण कार्य और संचालन को लेकर लंबित पड़ा था। अब ये इंतजार खत्म हो गया है। एलडीए के प्रस्ताव पर मंगलवार को उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी, जिसके तहत JPNIC को अब 35 वर्षों की लंबी लीज पर एक निजी कंसोर्टियम को सौंपे जाने का रास्ता साफ हो गया है। खुली बोली की प्रक्रिया के जरिए ‘वृंदावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड एंड रॉकवुड होटल्स एंड रिसॉर्ट्स’ के कंसोर्टियम का चयन किया गया है, जो अब इस प्रतिष्ठित परिसर के बचे हुए निर्माण कार्यों को पूरा करेगी और इसका संचालन भी करेगी।

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अब नहीं खर्च होगा सरकारी धन

इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि, अब इस पर किसी भी तरह का सरकारी धन खर्च नहीं किया जाएगा। चयनित कंसोर्टियम अपने स्वयं के खर्च पर आने वाले दो वर्षों में परिसर के सभी शेष बचे कार्यों को पूरा करेगा। जैसे  कि, परिसर में इंटीरियर, इलेक्ट्रिकल कार्य और फायर सुरक्षा उपकरणों समेत अन्य बचे हुए कार्य कराएगी।

JPNIC

माना जा रहा है कि, इन्हें पूरा कराने में लगभग 200 से 250 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके साथ ही, अनुबंध की शर्तों के अनुसार चयनित कंपनी को एलडीए के पास 25 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस गारंटी राशि भी जमा करानी होगी, जो यह सुनिश्चित करेगी कि निर्धारित समयसीमा में काम पूरा हो।

LDA को हर साल मिलेगा राजस्व

अनुबंध के तहत तय हुई शर्तों के अनुसार, संचालन शुरू होते ही चयनित कंसोर्टियम को एलडीए को पहले वर्ष 6 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। इस वार्षिक भुगतान राशि में हर साल 5 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। इस हिसाब से जब 35 साल की पूरी लीज अवधि खत्म होगी, तब तक यह वार्षिक भुगतान बढ़कर करीब 35 करोड़ रुपये सालाना तक पहुंच जाएगा। खास बात यह है कि एलडीए को इस पूरी अवधि में जो भी राजस्व प्राप्त होगा, उसका 15 प्रतिशत हिस्सा परिसर में स्थित म्यूजियम की सुविधाओं के रखरखाव, उसे बेहतर बनाने और उसके सुचारू संचालन पर ही खर्च किया जाएगा।

अब तक सरकार ने खर्च किए 821 करोड़ रुपये

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि, JPNIC के निर्माण पर अब तक प्रदेश सरकार करीब 821 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। उन्होंने बताया कि, इस भारी भरकम राशि की वसूली अब आने वाले 30 वर्षों में चयनित एजेंसी से प्राप्त होने वाले राजस्व के जरिए धीरे-धीरे शासन यानी सरकारी खजाने (ट्रेजरी) को वापस की जाएगी।

निजी हाथों में होगा होटल और कन्वेंशन सेंटर का संचालन 

एलडीए उपाध्यक्ष ने ये भी कहा कि, इस अनुबंध के तहत परिसर में स्थित 107 कमरों वाले आलीशान होटल, विशाल कन्वेंशन सेंटर, ऑडिटोरियम, पार्किंग सुविधा, कार्यालय परिसर और स्पोर्ट्स फैसिलिटीज का पूरा संचालन अब चयनित निजी कंसोर्टियम के हाथों में होगा। हालांकि, इस पूरे परिसर में जयप्रकाश नारायण के नाम पर बनाए गए म्यूजियम ब्लॉक के संचालन और रखरखाव का अधिकार एलडीए के पास ही सुरक्षित रखा गया है, यानी इस ऐतिहासिक और स्मृति से जुड़े हिस्से पर निजी कंपनी का कोई नियंत्रण नहीं होगा।

अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना

राज्य सरकार के इस फैसले पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए सवाल उठाया कि, क्या उत्तर प्रदेश की सरकार अब एक दुकानदार की तरह काम कर रही है। अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि, भाजपा सरकार ने लखनऊ के JPNIC को निजी हाथों में सौंपने का फैसला कैबिनेट में ले लिया है। अब बस सरकार को खुद ठेके पर देना या बेचना ही बाकी रह गया है।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कमीशन भ्रष्ट भाजपा सरकार की गाड़ी चलाने के लिए तेल-पानी का काम करता है, जबकि निजीकरण उसका स्थायी जुगाड़ बन चुका है। अखिलेश यादव की इस टिप्पणी के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है।

हेलिपैड का इस्तेमाल करेगी सरकार

अनुबंध की शर्तों में यह भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि, JPNIC इमारत की छत पर बनाए गए हेलिपैड का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर सरकार अपने अनुसार कर सकेगी। इसके अतिरिक्त, यह भी तय किया गया है कि, साल में कुल 50 दिनों तक JPNIC परिसर में सरकारी आयोजन बिना किसी शुल्क के आयोजित किए जा सकेंगे, जिससे सरकार को इस परिसर पर आंशिक नियंत्रण भी बना रहेगा।

खिलाड़ियों को मिलेगी रियायती स्पोर्ट्स मेंबरशिप

अनुबंध के अनुसार, परिसर में आम जनता और खिलाड़ियों के लिए दो अलग-अलग प्रकार की सदस्यता यानी मेंबरशिप उपलब्ध कराई जाएगी। क्लब मेंबरशिप और स्पोर्ट्स मेंबरशिप। हालांकि, इन दोनों मेंबरशिप के लिए फीस, नियम और शर्तें तय करने का अधिकार निजी कंसोर्टियम के पास नहीं बल्कि एक आधिकारिक समिति के पास होगा।

JPNIC

एलडीए उपाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि, चूंकि प्रदेश सरकार ने खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर पहले से ही भारी भरकम बजट खर्च कर रखा है, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स मेंबरशिप की दरें अपेक्षाकृत कम और रियायती ही रखी जाएं, ताकि खेल प्रतिभाओं को इसका सीधा लाभ मिल सके।

 कई वर्षों से विवादों  में हैं JPNIC

गौरतलब है कि, JPNIC परियोजना पिछले कई वर्षों से विवादों और देरी के चलते चर्चा में रही है। भारी भरकम सरकारी खर्च के बावजूद परिसर का निर्माण कार्य लंबे समय तक अधूरा पड़ा रहा, जिसे लेकर विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरते रहे हैं। अब निजी कंसोर्टियम को लीज पर सौंपे जाने के इस फैसले को सरकार जहां एक व्यावहारिक और वित्तीय रूप से लाभकारी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सरकारी संपत्तियों के निजीकरण की एक और कड़ी के तौर पर देख रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

 

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