
नई दिल्ली। बीते कुछ महीनों में अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए, जिससे देश के वस्त्र निर्यात निगेटिव असर पड़ने का खतरा बढ़ गया। इसी असर को कम करने के लिए अब केंद्र सरकार ने एक ऐसा मास्टर प्लान तैयार कर लिया है, जिससे कपड़ा बाजर को बड़ा बूस्ट मिलेगा और विश्व स्तर पर पहुंच बनेगी। सरकार ने जो योजना तैयार की है, उसमें भदोही के विश्वप्रसिद्ध कालीन उद्योग और तिरुपुर के गारमेंट क्लस्टर को खास तौर पर शामिल किया गया है, ताकि इन दोनों पारंपरिक निर्यात केंद्रों को नए वैश्विक बाजारों से जोड़कर उन्हें अमेरिकी बाजार में हुए नुकसान की भरपाई करने में मदद मिल सके।
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अमेरिकी टैरिफ से करोड़ों के निर्यात पर संकट
दरअसल, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50% तक का भारी भरकम टैरिफ लगा दिया है, जिसकी वजह से देश के करीब 48 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के निर्यात पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। इसमें वस्त्र और परिधान क्षेत्र के साथ-साथ रत्न-आभूषण, झींगा, चमड़ा एवं फुटवियर, पशु उत्पाद, रसायन और इलेक्ट्रिकल-मैकेनिकल मशीनरी जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं। हालांकि, इनमें सबसे ज्यादा चोट वस्त्र उद्योग को पहुंची है।

एप्पेयरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अनुसार, टैरिफ में हुए इजाफे की वजह से अमेरिका को होने वाला भारत का करीब 10.3 अरब डॉलर का परिधान निर्यात प्रभावित हुआ है। पहले बढ़े 25 प्रतिशत टैरिफ को कपड़ा उद्योग जैसे-तैसे झेल ले रहा था, लेकिन ट्रंप ने 25 प्रतिशत शुल्क और बढ़ा दिया, जिससे ये बोझ दोगुना हो गया। परिणाम स्वरूप भारतीय परिधान उद्योग अमेरिकी बाजार में लगभग गैर-प्रतिस्पर्धी हो गया है। इस स्थिति में भारत को बांग्लादेश, वियतनाम, श्रीलंका, कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले लगभग 30-31 प्रतिशत अधिक शुल्क का सामना करना पड़ रहा है।
40 देशों में चलेगा विशेष अभियान
इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसके तहत दुनिया के 40 प्रमुख देशों में विशेष संपर्क और प्रचार अभियान चलाया जायेगा। सरकार ने जिन देशों में अभियान चलाने की प्लानिंग की है, उनमें ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, नीदरलैंड, पोलैंड, कनाडा, मेक्सिको, रूस, बेल्जियम, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े बाजार भी शामिल किए गए हैं।
सरकार का मकसद इन 40 देशों में भारत को एक भरोसेमंद, गुणवत्तापूर्ण, टिकाऊ और नवाचारी वस्त्र आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करना है। गौर करने वाली बात यह है कि, भारत पहले से ही 220 से अधिक देशों को वस्त्र निर्यात करता है, लेकिन इन चुनिंदा 40 देशों में करीब 590 अरब डॉलर का विशाल वस्त्र एवं परिधान आयात बाजार मौजूद है, लेकिन इसमें भारत की मौजूदा हिस्सेदारी महज 5 से 6 प्रतिशत ही है। सरकार अब इस हिस्सेदारी को और अधिक बढ़ाने में लगी हुई है।
भदोही और तिरुपुर जैसे केंद्रों से जुड़ेगा बाजार
इस पूरी रणनीति में एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EPC) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि, ये काउंसिल बाजार की मांग का गहराई से आकलन करेंगी और देश के प्रमुख उत्पादन केंद्रों जैसे सूरत, पानीपत, तिरुपुर और भदोही को सीधे लक्षित देशों से जोड़ने का काम करेंगी। यानी भदोही में बनने वाले हस्तनिर्मित कालीन और तिरुपुर में तैयार होने वाले रेडीमेड गारमेंट अब सीधे तौर पर नए विदेशी खरीदारों तक पहुंचाए जाएंगे।
इसके साथ ही इन काउंसिलों को इंटर नेशनल व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में भारत की भागीदारी बढ़ाने का जिम्मा भी सौंपा गया है, ताकि वैश्विक मंच पर भारतीय उत्पादों और मजबूती से अपनी पहचान बना सके। इसके अतिरिक्त ‘ब्रांड इंडिया’ पहल के तहत विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की सुनियोजित मार्केटिंग भी की जाएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय उत्पादों की एक मजबूत और विश्वसनीय पहचान बन सके।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का भी मिलेगा सहारा
सरकार की इस रणनीति का एक और महत्वपूर्ण पहलू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) का बेहतर इस्तेमाल है। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल निर्यातकों को इन समझौतों का लाभ उठाने, अंतरराष्ट्रीय स्थिरता मानकों का पालन करने और जरूरी प्रमाणपत्र हासिल करने में भी मदद करेंगी। जानकार बताते हैं कि, अलग-अलग देशों के साथ चल रही व्यापरिक बातचीत और वर्तमान के एफटीए के दायरे को बढ़ाए जाने की वजह से भारतीय निर्यात आने वाले समय में और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
कपड़ा उद्योग की वर्तमान स्थिति
आंकड़ों की बात करें, तो वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र लगभग 179 अरब डॉलर के आकार का है। इसमें से लगभग 142 अरब डॉलर घरेलू बाजार से और शेष करीब 37 अरब डॉलर निर्यात से आता है। विश्व भर में इस क्षेत्र का कुल आयात बाजार करीब 800.77 अरब डॉलर का है। भारत इस विश्व व्यापार में 4.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ छठे स्थान पर है और सबसे बड़े निर्यातक देश के तौर पर शामिल है। ऐसे में यदि नई रणनीति सफल रहती है, तो इस हिस्सेदारी में जबर्दस्त इजाफा होने की उम्मीद बढ़ जाएगी।

उल्लेखनीय है कि, भदोही अपने हस्तनिर्मित ऊनी और रेशमी कालीनों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। वहीं, तिरुपुर की गिनती देश के सबसे बड़े रेडीमेड गारमेंट निर्यात हब के तौर पर होती है। दोनों ही जगहें सीधे तौर पर लाखों कारीगरों और श्रमिकों की आजीविका से जुड़ी हैं। यही वजह है कि अमेरिकी टैरिफ का असर इन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पर सीधा पड़ता है।
राहत देने वाली है नई पहल
ऐसे में सरकार की यह नई पहल इन पारंपरिक उद्योगों के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है। नए बाजारों तक पहुंच बनने से जहां कारीगरों और निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में हुए नुकसान की भरपाई करने का मौका मिलेगा। वहीं, दीर्घकाल में इन क्षेत्रों की वैश्विक बाजार पर निर्भरता भी अधिक संतुलित और विविध हो सकेगी।
उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि, यह मास्टर प्लान केवल अल्पकालिक राहत भर नहीं है, बल्कि इसके जरिए भारत अपने वस्त्र निर्यात ढांचे को हमेशा के लिए मजबूत करना चाहता है। हालांकि, ये कितना सफल होता है, ये इस बात पर निर्भर करेग कि सरकार, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल और स्थानीय उद्योग किस तेजी और तालमेल के साथ नए बाजारों में अपनी पैठ बना पाते हैं।
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