यूपी मानसून सत्र: 59 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट पेश, सपा ने किया हंगामा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में हंगामे और सियासी नोकझोंक के बीच सरकार ने अनुपूरक बजट पेश किया। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में करीब 59 हजार 29 करोड़ 54 लाख रुपये का अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया। सत्र शुरू होने से पहले ही अंदाजा लगाया जा रहा था कि इस बार का बजट 70 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि पेश किया गया अंतिम आंकड़ा इससे थोड़ा कम रहा। बजट में नए एक्सप्रेसवे, छात्राओं को मुफ्त स्कूटी योजना और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर खास जोर दिया गया है।

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 सपा का जोरदार हंगामा

बजट पेश होने के दौरान सदन का माहौल गरमाया रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी के विधायकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सपा सदस्य सदन के वेल में उतर आए और लगातार नारेबाजी करते रहे।

Suresh Khanna presented the 2026 supplementary budget. a

इसके जवाब में   भाजपा के विधायकों ने भी पलटवार करते हुए नारे लगाए। दोनों पक्षों के बीच यह तकरार कुछ देर तक चलती रही, जिससे सदन की कार्यवाही में हलचल मची रही। विधानसभा अध्यक्ष और सत्तापक्ष के वरिष्ठ सदस्यों ने सदन में शांति बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा रहा।

 किन क्षेत्रों को मिली प्राथमिकता

अनुपूरक बजट में ऊर्जा क्षेत्र के लिए करीब 47  सौ बाईस करोड़ रुपये और समाज कल्याण विभाग के लिए करीब 16 सौ 55 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा बजट में प्रदेश में नए एक्सप्रेसवे के निर्माण, छात्राओं को मुफ्त स्कूटी वितरण योजना और ग्रामीण इलाकों में सड़क, बिजली व पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार का दावा है कि यह बजट प्रदेश के समग्र विकास और आम जनता के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

कैबिनेट बैठक में 21 प्रस्तावों को मंजूरी

बजट सत्र से पहले मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इस बैठक में प्रदेश के समग्र विकास, बुनियादी ढांचे, जन-कल्याण और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े इक्कीस अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। सरकार ने इन प्रस्तावों को राज्य के ढांचागत विकास को नई गति देने के साथ-साथ किसानों, श्रमिकों और समाज के वंचित वर्गों के कल्याण से जुड़े ऐतिहासिक फैसले बताया है। लखनऊ में मंगलवार को हुई इस बैठक के बाद प्रदेश सरकार के दो उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य एक साथ एक ही छतरी के नीचे बाहर निकले।

दोनों उप मुख्यमंत्रियों की तस्वीर बनी चर्चा का विषय

बैठक के बाद बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य की मुस्कुराते हुए एक साथ बाहर निकलने की तस्वीर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई। दरअसल, बीते कुछ समय से प्रदेश की सियासत में दोनों उप मुख्यमंत्रियों के बीच मतभेद की अटकलें लगाई जाती रही हैं। ऐसे में यह तस्वीर एक स्पष्ट संदेश देती नजर आई कि सरकार के दोनों प्रमुख चेहरे पूरी एकजुटता के साथ काम कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, इस तरह की तस्वीरें पार्टी के भीतर एकता का संदेश देने और विपक्ष के आरोपों को खारिज करने के मकसद से भी सामने लाई जाती हैं।

विपक्ष ने साधा सरकार पर निशाना

सपा के विधायक अतुल प्रधान ने बजट को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार हर साल बड़े आकार का बजट लेकर आती है, लेकिन असल सवाल यह है कि, पिछले बजट का कितना हिस्सा वास्तव में खर्च हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने वादा किया था कि हर मामले की पूरी पारदर्शिता के साथ जांच होगी, लेकिन आज तक इसका कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। विपक्ष का कहना है कि, बड़े बजट के आंकड़े पेश करना आसान है, लेकिन जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पा रहा है।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा बयान

इसी बीच विधान परिषद पहुंचे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक बड़ा और विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत में हो या दुनिया के किसी भी हिस्से में, जो भी आतंकी घटनाएं सामने आती हैं, वे कहीं न कहीं मदरसा शिक्षा प्रणाली से जुड़ी होने का प्रमाण हैं। उनके इस बयान के बाद विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस बयान को लेकर बहस छिड़ने के आसार हैं, क्योंकि इससे पहले भी इस तरह के बयानों पर सियासी हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं।

 हंगामेदार हो सकती है आगे की कार्यवाही

मानसून सत्र के दूसरे दिन जिस तरह सदन में हंगामा और सियासी बयानबाजी देखने को मिली, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में भी सदन की कार्यवाही हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्ष जहां सरकार को बजट के खर्च और क्रियान्वयन को लेकर घेरने की कोशिश करेगा, वहीं सत्तापक्ष विकास कार्यों और नई योजनाओं को जनता के सामने पेश करने की रणनीति पर काम करेगा। विधानसभा में इस सत्र के दौरान कई और महत्वपूर्ण विधेयकों और प्रस्तावों पर चर्चा होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, इस बार का मानसून सत्र प्रदेश की राजनीति के लिए कई मायनों में अहम साबित हो सकता है, जहां विकास के दावों के साथ-साथ सियासी टकराव भी उतना ही तेज बना रहेगा।

 

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