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एटा-कासगंज में सपा नेताओं के टकराव पर ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर निशाना
लखनऊ। सुभासपा प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एटा-कासगंज में सपा नेताओं के बीच उभरे विवाद को लेकर अखिलेश यादव पर कड़ा प्रहार किया है। रविवार को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने चुटकी ली कि, अखिलेश यादव ने बैठक तो चुनावी रणनीति तय करने के लिए बुलाई थी, मगर उनकी मौजूदगी में ही नेता आपस में भिड़ गए। उन्होंने पीडीए की नई व्याख्या करते हुए इसे ‘पैसा, दबंगई और आपसी लड़ाई’ बताया।
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राजभर ने लिखा, अखिलेश यादव जी! देखते ही देखते हालात कहां से कहां पहुंच गए। बैठक बुलाई थी, हो गई कुश्ती। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पार्टी में कार्यकर्ताओं के बजाय अपराधियों को जगह दी जाएगी, तो परिणाम ऐसा ही निकलेगा। साथ ही उन्होंने कहावत दोहराई, ‘बबूल का पेड़ बोकर आम की फसल कैसे मिलेगी।’
सत्ता से पहले ही ‘पैसे की गर्मी’
राजभर ने एटा-कासगंज की बैठक में हुई खींचतान और उसके बाद दोनों जिलों की पार्टी इकाइयों को भंग किए जाने के मसले पर भी अखिलेश यादव को आड़े हाथों लिया।

उन्होंने अखिलेश की ‘पैसे की गर्मी’ वाली बयानबाज़ी का हवाला देते हुए कहा कि अभी टिकट बांटें नहीं गए, चुनाव आया नहीं और सत्ता भी हासिल नहीं हुई, फिर भी ‘पैसे की गर्मी’ पहले ही सिर चढ़कर बोलने लगी है।
उन्होंने कहा कि जिस पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने ही नेता आपस में उलझ जाएं और अध्यक्ष को बीच बैठक से उठकर जाना पड़े, वहां अनुशासन की तस्वीर खुद-ब-खुद साफ हो जाती है। राजभर ने व्यंग्य किया कि ‘सपा और अनुशासन’ का साथ मुमकिन ही नहीं।
प्रदेश इकाई भी भंग कर दीजिए
राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए सुझाव दिया कि, अगर पार्टी को चुनाव में जीत चाहिए तो प्रदेश की पूरी इकाई ही भंग कर देनी चाहिए, क्योंकि सिर्फ एटा-कासगंज के नेताओं में ही ‘पैसों की गर्मी’ नहीं आई, बल्कि यह हाल लगभग हर जगह एक जैसा है। पोस्ट के आखिर में उन्होंने ‘जय भारत, जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण, जय महाराजा सुहेलदेव’ लिखा।
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