आरक्षण चुराने वाले आज ज्ञान दे रहे हैं, अनिल राजभर का सपा पर हमला

  • ‘सपा प्रमुख राजधानी में बैठकर जनता को भ्रमित कर रहे’- राजभर

  • 2012-17 में बाबा साहेब की मूर्तियां तोड़ने का लगाया आरोप, कहा- जांच होगी

लखनऊ। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रेस वार्ता में आरक्षण, दलित समाज और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर से जुड़े भाजपा सरकार पर लगाए गए आरोपों का उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने कड़ा जवाब दिया। एक बातचीत के राजभर ने कहा कि सपा प्रमुख राजधानी में बैठकर रोज़ाना जनता को गुमराह करने की कोशिश करते हैं, जबकि उनके पास खुद जनता के बीच जाने का समय ही नहीं, न ही वे जाना चाहते हैं।

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राजभर ने कहा कि, आज सपा आरक्षण की दुहाई दे रही है, जबकि उनके चार कार्यकालों में पिछड़ों और दलितों का आरक्षण जितना छीना गया, उतना शायद ही किसी और शासन में हुआ हो। उनके अनुसार आरक्षण लूटने वाले आज उसी पर उपदेश दे रहे हैं।

Anil Rajbhar, Akhilesh Yadav

सपा ने सभी पिछड़ों और अति-पिछड़ों का हक छीना और जब भी सपा सत्ता में आई, आरक्षण का लाभ एक खास जाति तक सीमित रह गया। अब वही लोग पूरा फायदा उठाकर आरक्षण और बाबा साहब की बात कर रहे हैं।

सपा राज में फैलाई गई नफरत

उन्होंने कहा कि, 2012 से 2017 के दौर को याद करना ज़रूरी है, जो एक सोची-समझी साज़िश थी। सपा गुंडों के ज़रिए समाज में नफरत फैलाने की कोशिश कर रही है। राजभर ने कहा कि अब यह जांच होगी कि सपा के किस उपद्रवी ने कहां-कहां मूर्तियां तोड़ीं। उन्होंने सपा को आत्मनिरीक्षण की सलाह देते हुए आरोप लगाया कि 2012-17 के बीच सपा के संरक्षण में ही बाबा साहब की प्रतिमाएं खंडित की गई थीं।

सवालिया लहजे में पूछा

मंत्री ने सवाल किया कि, बाबा साहब को भूमाफिया किसने कहा था? उन्होंने बताया कि, सपा के तत्कालीन मंत्री आजम खान ने बाबा साहब को प्रदेश का सबसे बड़ा भूमाफिया करार दिया था, जहां भी उनकी मूर्तियां या नाम पर पार्क बने, वहां यह कहा गया जैसे दलित समाज ने अतिक्रमण कर लिया हो।

राजभर ने कहा कि, आज वही लोग बाबा साहब और दलितों की याद दिला रहे हैं, जो इनका दोहरा चरित्र उजागर करता है, जिन्होंने आरक्षण चुराया, वे आज उस पर ज्ञान बांट रहे हैं, और जिन्होंने बाबा साहब का अपमान किया, वे अब सम्मान की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा और उसके नेता जनता को कितना भोला समझते हैं, यह उनके बयानों से ज़ाहिर होता है।

रोज़ बदल रही पीडीए की परिभाषा

राजभर ने कहा कि जनता को गुमराह करना आसान नहीं, प्रदेश सपा का असली चेहरा भली-भांति पहचानता है। पीडीए में ‘डी’ का मतलब दलित है, पर कल इसकी परिभाषा क्या होगी, कोई नहीं जानता। अखिलेश पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि इतना उलझा हुआ नेता पहले कभी नहीं देखा, रोज़ पीडीए की नई व्याख्या दी जा रही है। जनता सब कुछ देख-समझ रही है और समाजवादी पार्टी की चाल अब कामयाब नहीं होगी, इसकी पूरी गारंटी है।

 

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