11 महीने बाद फिर लखनऊ लौटे तरुण गाबा, संभाली पुलिस कमिश्नर की कमान

मानें जाते हैं सीएम योगी आदित्यनाथ के भरोसेमंद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशासन के स्तर पर एक बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार ने मंगलवार को कुल 15 सीनियर आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर का आदेश जारी किया। इसमें सबसे चर्चित नाम तरुण गाबा है। अब तक अपर पुलिस महानिदेशक सुरक्षा के महत्वपूर्ण पद पर तैनात रहे तरुण गाबा को इस बार लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट का जिम्मा सौंपा गया है। खास बात यह है कि, करीब 11 महीने बाद तरुण गाबा को फिर से लखनऊ बुलाया  गया है, जिसे लेकर पुलिस महकमे और राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा हो रही है।

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योगी सरकार के भरोसेमंद अधिकारियों में शुमार

तरुण गाबा को लंबे समय से योगी सरकार के सबसे भरोसेमंद और पसंदीदा पुलिस अधिकारियों में गिना जाता रहा है। यह पहला मौका नहीं है जब उन्हें किसी बड़े शहर के पुलिस कमिश्नरेट की जिम्मेदारी सौंपी गई हो। इससे पहले जब प्रयागराज में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया गया था, तब यानी 22 जून 2024 को तरुण गाबा को वहां का दूसरा पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया था।

Police Commissioner Tarun Gaba

इसके अलावा वे इससे पहले लखनऊ रेंज में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। यही वजह है कि, अब जब उन्हें दोबारा लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की कमान सौंपी गई है, तो इसे उनके प्रशासनिक अनुभव और सरकार के भरोसे का प्रमाण माना जा रहा है।

कौन हैं तरुण गाबा?

तरुण गाबा उत्तर प्रदेश कैडर के 2001 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं। वे मूल रूप से चंडीगढ़ के रहने वाले हैं। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में यह उनकी दूसरी नियुक्ति है, जो उनके प्रशासनिक कौशल और कार्यशैली को दर्शाती है। अपने लंबे करियर के दौरान तरुण गाबा प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर के तौर पर भी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने पीएसी (प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी), कारागार प्रशासन, एसएसएफ (विशेष सुरक्षा बल), केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई सहित कई अन्य महत्वपूर्ण और संवेदनशील महकमों में भी अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं।

पुलिस महकमे में तरुण गाबा की पहचान एक ऐसे अधिकारी के तौर पर होती है, जो हमेशा ठोस परिणाम देने के लिए जाने जाते हैं। सीबीआई में तैनाती के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के अधीन भी काफी लंबे समय तक सेवाएं दीं, जिससे उन्हें केंद्रीय स्तर पर काम करने का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ। इसके बाद वे वर्ष 2020 में एक बार फिर उत्तर प्रदेश कैडर में वापस लौटे और तभी से राज्य में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

गृह सचिव जैसा अहम पद भी संभाल चुके हैं

तरुण गाबा के करियर में एक अहम पड़ाव उस समय आया, जब वर्ष 2020 में योगी सरकार ने प्रदेश में बढ़ते अपराध पर नियंत्रण के मकसद से उन्हें गृह सचिव के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया था। इस नियुक्ति के दौरान उन्होंने वरिष्ठ अधिकारी एसके भगत का स्थान लिया था। गृह सचिव के तौर पर उनकी नियुक्ति को सरकार की क्राइम कंट्रोल रणनीति का अहम हिस्सा माना गया था। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कई अहम कदम उठाए।

इसके अलावा तरुण गाबा अपने करियर के दौरान उत्तर प्रदेश के पांच अलग-अलग जिलों में पुलिस प्रमुख यानी पुलिस अधीक्षक या पुलिस कमिश्नर जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इतने विविध और चुनौतीपूर्ण पदों पर काम करने का अनुभव उन्हें प्रदेश के वरिष्ठतम और अनुभवी आईपीएस अधिकारियों की श्रेणी में शामिल करता है।

महाकुंभ आयोजन में निभाई भूमिका

तरुण गाबा के करियर की एक बड़ी और उल्लेखनीय उपलब्धि प्रयागराज में आयोजित हुए ऐतिहासिक महाकुंभ के सफल आयोजन से भी जुड़ी हुई है। महाकुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर उन्होंने बेहद अहम भूमिका निभाई थी। करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी वाले इस विशाल आयोजन के दौरान भीड़ प्रबंधन एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आता है, और इसी चुनौती से निपटने के लिए तरुण गाबा ने विस्तृत योजना तैयार की थी।

Police Commissioner Tarun Gaba

उन्होंने महाकुंभ के दौरान सुरक्षा के लिहाज से भी कई महत्वपूर्ण रणनीतियां बनाईं, ताकि आयोजन के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना न हो और श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल मिल सके। उनकी इन्हीं रणनीतियों और प्रशासनिक क्षमता की बदौलत महाकुंभ का आयोजन सुरक्षा की दृष्टि से बड़े पैमाने पर सफल माना गया, जिसकी देशभर में सराहना भी हुई थी।

बढ़ीं उम्मीदें

अब जब तरुण गाबा को दोबारा लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की जिम्मेदारी सौंपी गई है, तो प्रदेश की राजधानी में कानून-व्यवस्था को लेकर लोगों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं। उनके पिछले अनुभव, खासतौर पर बड़े आयोजनों के दौरान सुरक्षा प्रबंधन में दिखाई गई कुशलता और सीबीआई जैसी संस्था में मिले प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए माना जा रहा है कि वे लखनऊ में कानून-व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठा सकते हैं।

पुलिस महकमे के भीतर भी इस नियुक्ति को लेकर सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है, क्योंकि तरुण गाबा को उनके करियर के दौरान हमेशा एक अनुशासित, अनुभवी और परिणाम देने वाले अधिकारी के तौर पर पहचाना गया है। ऐसे में लखनऊवासियों को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और आम जनता के लिए पुलिसिंग व्यवस्था और अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बन सकेगी।

कुल मिलाकर, तरुण गाबा की यह नियुक्ति न केवल उनके तीन दशक से अधिक लंबे प्रशासनिक अनुभव को दर्शाती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि राज्य सरकार बड़े और संवेदनशील पदों पर अनुभवी तथा भरोसेमंद अधिकारियों को ही प्राथमिकता देना चाहती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि लखनऊ पुलिस कमिश्नर के तौर पर तरुण गाबा किस तरह की नई रणनीतियां अपनाते हैं और शहर में कानून-व्यवस्था को कितना मजबूत बना पाते हैं।

 

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