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अनुशासन और लगन से रचा इतिहास
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जयंत चौधरी बोले- बेटी पर गर्व है
नई दिल्ली। अपने कलात्मक सफर के एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव को यादगार बनाते हुए 15 वर्षीय इलेशा सिंह ने राजधानी दिल्ली के फेमस कमानी ऑडिटोरियम में अपना पहला कुचिपुड़ी रंगप्रवेशम् प्रस्तुत किया। इस भव्य प्रस्तुति में उनकी वर्षों की कठिन साधना, अनुशासन और लगन की झलक साफ़-साफ़ देखने को मिली। यहां उपस्थित दर्शकों, शास्त्रीय नृत्य जगत की जानी-मानी हस्तियों और अनेक विशिष्ट अतिथियों ने उनके नृत्य की भरपूर सराहना की।
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मंच पर दिखा भक्ति और समर्पण का भाव
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान वेंकटेश्वर की स्तुति में रचित मंगलाचरण वेंकटेश स्तोत्रम् से हुई और मंच पर सबसे पहले भक्ति व समर्पण का सुंदर भाव प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात दशावतारम् की झलक देखने को मिली, जिसमें भगवान विष्णु के दस अवतारों को इलेशा ने अपने भावपूर्ण अभिनय और विशिष्ट नृत्य मुद्राओं के जरिए बेहद ख़ूबसूरती से उतारा।

इसके बाद क्रम में आई सांसों की माला नामक भावप्रधान अभिनय प्रस्तुति, जिसमें भक्ति, विरह और गहन प्रेम की अनुभूतियों को उन्होंने बड़े ही मार्मिक ढंग से व्यक्त किया। संध्या का समापन शिव तरंगिणी के साथ हुआ, जिसमें इलेशा ने भगवान शिव की महिमा का सशक्त चित्रण करते हुए पीतल की थाली के किनारे पर नृत्य कर अपनी उत्कृष्ट तकनीकी दक्षता और जटिल लयबद्ध पद संचालन शानदार प्रदर्शन किया।
बेहद छोटी आयु से प्रशिक्षण ले रहीं इलेशा
इस अवसर पर इलेशा को शुभकामनाएं देते हुए केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री तथा शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा, “इलेशा को उनके कुचिपुड़ी रंगप्रवेशम् के मंच पर प्रस्तुति देते हुए देखना हमारे पूरे परिवार के लिए बेहद भावुक और गर्व भरा क्षण रहा। साढ़े चार वर्ष की छोटी सी आयु में शुरू हुई उनकी ये यात्रा अनुशासन, निरंतर परिश्रम तथा इस समृद्ध शास्त्रीय परंपरा के प्रति गहरे लगाव से भरी रही है, जिसकी झलक भी उस मंच पर देखने को मिली।
जयंत चौधरी ने कहा, हम उनके गुरुओं डॉ. राजा और डॉ. राधा रेड्डी और कौशल्या रेड्डी के मार्गदर्शन के सदैव आभारी रहेंगे। इलेशा ने जिस गरिमा,आत्मविश्वास और समर्पण भाव के साथ जीवन के इस अहम पड़ाव को प्राप्त किया है, उसे देखकर एक पिता के नाते मुझे उन पर बेहद गर्व महसूस हो रहा है।
युवा कलाकारों को प्रेरित करने वाली है प्रस्तुति
इलेशा ने महज साढ़े चार वर्ष की छोटी से आयु में पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. राजा रेड्डी, डॉ. राधा रेड्डी और कौशल्या रेड्डी से कुचिपुड़ी नृत्य का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था। उनका यह रंगप्रवेशम् एकल कुचिपुड़ी नृत्य बतौर नृत्यांगना उनके औपचारिक पदार्पण का प्रतीक है। इतना ही नहीं यह शास्त्रीय नृत्य के प्रति उनकी गहन कलात्मक साधना व प्रतिबद्धता को भी बखूबी दर्शा रहा है। उल्लेखनीय है कि इलेशा अपने गुरुओं उन शिष्याओं में शुमार हैं, जिन्होंने सबसे कम आयु में यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
इलेशा की यह सफल प्रथम प्रस्तुति उनके वर्षों के अथक परिश्रम, गुरुओं के अनमोल मार्गदर्शन और परिवार के अटूट सहयोग का जीता-जागता प्रमाण है। इसके साथ ही उनकी ये प्रस्तुति भारत की समृद्ध शास्त्रीय परंपराओं को पूरी लगन और जुनून के साथ अपनाने के लिए देश के अन्य युवा कलाकारों को भी प्रेरित करने वाली है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, पूर्व सांसदों, उद्योग जगत के अग्रणी प्रतिनिधियों, डिज़ाइनरों, पूर्व राजघरानों के सदस्यों तथा अनेक विशिष्ट जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
क्रम में मौजूद विशिष्ट अतिथियों में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री एवं मिर्जापुर से लोकसभा सांसद अनुप्रिया पटेल, हमीरपुर से लोकसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय सूचना-प्रसारण तथा युवा कार्यक्रम व खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर, उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री आरपीएन सिंह, छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद तथा बीसीसीआई के मानद उपाध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव शुक्ला उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर शामिल रहे।
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