
शामली। उत्तर प्रदेश एक बार फिर देश के एक्सप्रेसवे नक्शे पर एक नया और ऐतिहासिक अध्याय लिखने जा रहा है। देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का करीब 60 फीसदी हिस्सा पहले से ही उत्तर प्रदेश में मौजूद है और अब इसमें एक और विशाल एक्सप्रेसवे जुड़ने जा रहा है, जिसका नाम है ग्रीनफील्ड सुपर एक्सप्रेसवे।
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37 तहसीलें भी होंगी कनेक्ट
700 किलोमीटर की कुल लंबाई के साथ यह उत्तर प्रदेश का अब तक का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है। यह भव्य एक्सप्रेसवे प्रदेश के 22 जिलों और 37 तहसीलों को एक सूत्र में पिरोएगा, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य और पूर्वांचल तक के करोड़ों लोगों की जिंदगी को आसान और बेहतर बना देगा। इस एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 2030 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

ग्रीनफील्ड सुपर एक्सप्रेसवे को गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे के नाम से भी जाना जाता है। यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले से शुरू होगा और पूर्वांचल के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण शहर गोरखपुर तक जायेगा। इस पूरे 700 किलोमीटर के रूट पर कुल 22 जिले पड़ते हैं।
शामली से शुरू होकर यह मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, बहराइच, गोंडा, अयोध्या, बस्ती और संतकबीरनगर होते हुए अंत में गोरखपुर पहुंचेगा। यह रूट इस मायने में भी बेहद खास है क्योंकि इसमें प्रदेश की राजधानी लखनऊ और धार्मिक नगरी अयोध्या जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण शहर शामिल हैं, जो इस एक्सप्रेसवे की उपयोगिता को कई गुना बढ़ा देते हैं।
किसानों के लिए वरदान
ग्रीनफील्ड सुपर एक्सप्रेसवे की सबसे खास विशेषता यह है कि, यह सिर्फ बड़े शहरों और जिला मुख्यालयों को ही नहीं जोड़ेगा बल्कि इसके साथ-साथ 37 तहसीलें भी सीधे इस एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होंगी। इसका मतलब यह है कि, छोटे कस्बों और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को भी इस एक्सप्रेसवे का सीधा और तत्काल फायदा मिलेगा।
किसानों के लिए यह एक्सप्रेसवे वरदान साबित होगा, क्योंकि वे अपनी फसल को कम समय और कम खर्च में बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। व्यापारियों के लिए माल ढुलाई सस्ती और तेज होगी जिससे व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा इस एक्सप्रेसवे पर पड़ने वाले अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों तक श्रद्धालुओं की पहुंच और भी सुगम और सुविधाजनक हो जाएगी।
जमीन सर्वे का काम शुरू
ग्रीनफील्ड सुपर एक्सप्रेसवे के किनारे बिजनौर और मेरठ जिलों में एक विशाल औद्योगिक गलियारा यानी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की जा रही है। इस औद्योगिक गलियारे के लिए जमीन का निरीक्षण और सर्वेक्षण शुरू हो चुका है। यह औद्योगिक गलियारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक नई आर्थिक क्रांति लाने की क्षमता रखता है।

यहां बड़े उद्योग स्थापित होंगे जिससे हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा और पलायन रुकेगा। छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए यह क्षेत्र एक नए और जीवंत हब के रूप में विकसित होगा। इससे न सिर्फ स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी बल्कि पूरे पश्चिमी यूपी की तकदीर बदलने की संभावना है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ग्रीनफील्ड सुपर एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य की आधिकारिक शुरुआत 2026 के अंत तक या फिर 2027 की शुरुआत में हो जाने की उम्मीद है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले से ही शुरू हो चुकी है और प्रभावित किसानों एवं जमीन मालिकों को उचित और समय पर मुआवजा देने की पूरी तैयारी है।
सरकार का प्रयास है कि, जमीन अधिग्रहण बिना किसी विवाद और देरी के पूरा हो जाए ताकि निर्माण कार्य तय समय पर शुरू हो सके। उम्मीद जताई जा रही है कि यह महाएक्सप्रेसवे 2030 तक पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा।
कितने लंबे हैं यूपी के एक्सप्रेस वे
उत्तर प्रदेश में इस समय पहले से ही सात एक्सप्रेसवे चालू हैं, जो मिलकर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे हब बनाते हैं। इनमें गंगा एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर की लंबाई के साथ अभी यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है, लेकिन ग्रीनफील्ड के बनने के बाद यह रिकॉर्ड टूट जाएगा। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे 343 किलोमीटर लंबा है जो लखनऊ को गाजीपुर तक जोड़ता है।

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे 302 किलोमीटर लंबा है, जिसने दोनों ऐतिहासिक शहरों के बीच की दूरी काफी कम कर दी है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे 296 किलोमीटर लंबा है जिसने पिछड़े बुंदेलखंड क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है। यमुना एक्सप्रेसवे 165 किलोमीटर लंबा है और यह यूपी का पहला एक्सप्रेसवे होने का गौरव रखता है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे 91 किलोमीटर और बलिया लिंक एक्सप्रेसवे 35 किलोमीटर की लंबाई के साथ अपनी-अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
विकास यात्रा में जुड़ेगा नया अध्याय
ग्रीनफील्ड सुपर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में एक नया और सुनहरा मील का पत्थर साबित होगा। यह एक्सप्रेसवे न केवल यातायात को तेज और सुगम बनाएगा बल्कि प्रदेश के उन जिलों और क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ेगा जो अब तक कनेक्टिविटी की कमी की वजह से पिछड़े हुए थे।
व्यापार, उद्योग, कृषि, पर्यटन और रोजगार सभी क्षेत्रों में इसका दूरगामी और सकारात्मक असर दिखाई देगा। पश्चिम से पूर्व तक पूरे प्रदेश को एक मजबूत और आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ने का यह सपना 2030 तक हकीकत बन जाएगा और उत्तर प्रदेश एक बार फिर देश को दिखाएगा कि विकास की असली रफ्तार क्या होती है।
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