
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आधार सेवा केंद्रों का तेजी से विस्तार हो रहा है। अब लखनऊ सहित 22 नए जिलों में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा सीधे संचालित पूर्ण क्षमता वाले आधार सेवा केंद्र शुरू हो गए हैं। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में ऐसे केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर 32 हो गई है। इस विस्तार से लाखों नागरिकों को आधार से जुड़ी सेवाएं अब बेहतर सुविधा, कम समय और अधिक दक्षता के साथ उपलब्ध होंगी। यह कदम डिजिटल इंडिया के लक्ष्यों को हासिल करने और आम जनता को सरकारी सेवाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा संचालित ये सेवा केंद्र अपनी उच्च क्षमता, आधुनिक बुनियादी ढांचे और कुशल स्टाफ के लिए जाने जाते हैं। इन केंद्रों पर आधार कार्ड का नया पंजीकरण, बायोमेट्रिक अपडेट (आंख, उंगलियों के निशान, चेहरा), नाम, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी में सुधार, हस्ताक्षर अपडेट, लॉस्ट आधार को दोबारा प्रिंट करवाना जैसी सभी प्रकार की सेवाएं एक छत के नीचे उपलब्ध हैं। सामान्य दिनों में इन केंद्रों पर एक दिन में सैकड़ों आवेदनों को आसानी से प्रोसेस किया जा सकता है, जबकि पहले बैंकों या पोस्ट ऑफिसों में यह संख्या बहुत सीमित होती थी।
पहले 12 जिलों में ही थी सुविधा
इससे पहले पूरे उत्तर प्रदेश में मात्र 12 जिलों में UIDAI के पूर्ण क्षमता वाले आधार सेवा केंद्र संचालित हो रहे थे। इन जिलों में लखनऊ, आगरा, गौतमबुद्धनगर, सहारनपुर, कानपुर, गोंडा, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और गाजियाबाद शामिल थे। इन केंद्रों पर भी अच्छी सुविधाएं उपलब्ध थीं, लेकिन प्रदेश के शेष जिलों के लोगों को या तो इन स्थानों पर लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी या फिर स्थानीय बैंकों और पोस्ट ऑफिसों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब 22 नए जिलों में इन केंद्रों का संचालन शुरू हो गया है।

ये नये जिले हैं अलीगढ़, अयोध्या, हापुड़, मुजफ्फरनगर, रायबरेली, उन्नाव, हाथरस, सीतापुर, बलरामपुर, मथुरा, इटावा, मैनपुरी, गाजीपुर, मऊ, मिर्जापुर, अमेठी, बस्ती और चंदौली। इन जिलों के अलावा आसपास के क्षेत्रों के निवासियों को भी अब निकटतम केंद्र पर बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। इससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को बड़ी राहत मिली है।
मिलेंगे ये फायदे
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, UIDAI के इन केंद्रों की सबसे बड़ी खासियत उनकी क्षमता है। यहां पर्याप्त संख्या में मशीनें, प्रशिक्षित ऑपरेटर और आधुनिक सॉफ्टवेयर उपलब्ध होने के कारण सेवाएं तेजी से पूरी होती हैं। पहले जहां लोगों को कई दिनों या हफ्तों तक इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब ज्यादातर काम उसी दिन या अगले दिन पूरे हो जाते हैं। ये केंद्र न केवल आधार कार्ड बनाने या अपडेट करने तक सीमित हैं, बल्कि आधार से जुड़ी अन्य समस्याओं जैसे बायोमेट्रिक लॉक, पासवर्ड रीसेट, आधार वेरिफिकेशन और डाउनलोडिंग में भी सहायता प्रदान करते हैं। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आने वाली दिक्कतें काफी हद तक कम हो गई हैं।
39 जिलों में शुरू हुई सेवा
प्रदेश में आधार सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए सरकार और UIDAI मिलकर काम कर रहे हैं। वर्तमान में 39 अतिरिक्त जिलों में नए केंद्र शुरू करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इन जिलों के लिए दफ्तरों के स्थान पहले ही चिन्हित कर लिए गए हैं। मैनपॉवर की भर्ती, प्रशिक्षण, कंप्यूटर, बायोमेट्रिक डिवाइस, स्कैनर और अन्य जरूरी उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों का अनुमान है कि अगले एक-दो महीनों के अंदर इन 39 जिलों में भी पूर्ण क्षमता वाले आधार सेवा केंद्र शुरू हो जाएंगे। इसके बाद उत्तर प्रदेश में लगभग सभी जिलों में UIDAI के प्रत्यक्ष केंद्र उपलब्ध हो जाएंगे, जिससे डिजिटल सेवा वितरण प्रणाली और अधिक मजबूत बनेगी।
बैंकों और पोस्ट ऑफिसों की तुलना में बेहतर विकल्प
जिन जिलों में अभी UIDAI के केंद्र नहीं हैं, वहां आधार संबंधी कार्य मुख्य रूप से बैंकों और पोस्ट ऑफिसों के माध्यम से होते हैं, लेकिन इनकी क्षमता सीमित होने के कारण रोजाना बहुत कम आवेदन ही स्वीकार किए जाते हैं। अक्सर भीड़ ज्यादा होने या स्टाफ की कमी के कारण लोग निराश होकर लौट जाते थे। UIDAI के केंद्रों में इन समस्याओं का कोई अता-पता नहीं है। यहां सभी सुविधाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध हैं और पारदर्शिता भी बरती जाती है।
आधार कार्ड की अहमियत
आधार आज भारत की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान व्यवस्था बन चुकी है। यह 140 करोड़ से अधिक भारतीयों को एक अनोखी 12 अंकों की पहचान प्रदान करता है। आधार के बिना आज कई जरूरी काम संभव नहीं हैं चाहे वह बैंक खाता खोलना हो, राशन कार्ड बनवाना हो, पीएम किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा, छात्रवृत्ति, पेंशन, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या मोबाइल सिम लेना। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहां आबादी बहुत अधिक है, वहां आधार केंद्रों का विस्तार सीधे तौर पर शासन की पहुंच बढ़ाता है। अब नागरिक अपने जिले में ही बैठकर सभी काम निपटा सकते हैं, जिससे समय, धन और ऊर्जा की बचत होती है।
इन्हें मिलेगा लाभ
महिलाएं और बुजुर्ग: उन्हें अब लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।
छात्र: शिक्षा संबंधी योजनाओं और स्कॉलरशिप के लिए आधार अपडेट आसान।
किसान: सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा।
दिव्यांगजन: विशेष सुविधाओं के साथ सेवाएं उपलब्ध।
ग्रामीण क्षेत्र: डिजिटल डिवाइड कम होगा।
सरकार की पहल
उत्तर प्रदेश सरकार डिजिटल इंडिया, ई-गवर्नेंस और सुशासन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। आधार सेवा केंद्रों का यह विस्तार उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को उसके घर के निकटतम स्थान पर उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं मिलें और कोई भी व्यक्ति प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण परेशान न हो। विभागीय अधिकारी लगातार इन केंद्रों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि सेवा की गुणवत्ता बनी रहे और कोई शिकायत न आए। भविष्य में और अधिक सुविधाएं जैसे ऑनलाइन अपॉइंटमेंट सिस्टम को और बेहतर बनाना, मोबाइल आधार केंद्रों की व्यवस्था आदि भी शामिल किए जा सकते हैं।

उत्तर प्रदेश में आधार सेवा केंद्रों की संख्या 32 हो जाने से डिजिटल सेवा क्रांति को नई गति मिली है। यह विस्तार न केवल सुविधा बढ़ा रहा है बल्कि पारदर्शिता, दक्षता और नागरिक केंद्रित शासन को मजबूत बना रहा है। आने वाले समय में 39 और जिलों में केंद्र शुरू होने के बाद यह सुविधा पूरे प्रदेश में व्यापक रूप से उपलब्ध हो जाएगी। यह कदम साबित करता है कि सरकार आम आदमी की छोटी-छोटी समस्याओं को भी गंभीरता से ले रही है और उन्हें डिजिटल माध्यम से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। आधार केंद्रों का विस्तार अंततः एक मजबूत, सुविधाजनक और विकसित उत्तर प्रदेश की नींव रख रहा है।
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