लखनऊ मेट्रो फेज-2 पर काम शुरू, 18 हेक्टेयर में बनेगा डिपो, इन घने इलाकों से गुजरेगी ट्रेन

 लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ में ट्रैफिक के बढ़ते दबाव को कम करने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रस्तावित मेट्रो विस्तार परियोजना अब धरातल पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। चारबाग से वसंतकुंज के बीच प्रस्तावित इस नए कॉरिडोर को अमलीजामा पहनाने के लिए जिला प्रशासन, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) ने अपनी संयुक्त कोशिशें बेहद तेज कर दी हैं।

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जमीन हस्तांतरण को लेकर हुई बैठक

इस महात्वाकांक्षी परियोजना के रास्ते में आने वाली जमीन के हस्तांतरण और विभिन्न विभागों से मिलने वाली अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी की बाधाओं को दूर करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई है।

Lucknow Metro

इस बैठक में साफ कर दिया गया है कि, मेट्रो परियोजना शहर के विकास के लिए शीर्ष प्राथमिकता पर है, इसलिए इससे जुड़े सभी लंबित प्रस्तावों पर बिना किसी देरी के तुरंत और निर्णायक कार्रवाई की जाए। सरकार की मंशा इस रूट पर निर्माण कार्य को जल्द से जल्द शुरू कराने की है, ताकि तय समय सीमा के भीतर लखनऊ वासियों को मेट्रो के दूसरे चरण की सौगात दी जा सके।

प्रस्तावित मेट्रो विस्तार के तहत सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण काम मेट्रो डिपो का निर्माण होना है, जिसके लिए हरदोई रोड पर स्थित वसंतकुंज योजना के भीतर कुल 18 हेक्टेयर भूमि को चिन्हित किया गया है। हालांकि, इस जमीन के अधिग्रहण को लेकर एक तकनीकी पेंच फंसा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, इस चिन्हित जमीन का एक हिस्सा फिलहाल उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के दायरे में आता है। इस कानूनी बाधा को समय रहते दूर करने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने अपने विधिक अनुभाग को विशेष निर्देश जारी किए हैं।

बसंतकुंज में बनेगा डिपो

एलडीए की लीगल टीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी करके इस स्थगन आदेश को जल्द से जल्द समाप्त कराने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है, ताकि डिपो के निर्माण के लिए पूरी जमीन बिना किसी विवाद के यूपी मेट्रो को सौंपी जा सके।

वसंतकुंज में जहां मेट्रो डिपो बनना प्रस्तावित है, वहां वर्तमान में एक बड़ी मछली मंडी संचालित हो रही है। मेट्रो परियोजना के काम को आगे बढ़ाने के लिए इस मछली मंडी को वहां से किसी दूसरी उपयुक्त जगह पर स्थानांतरित किया जाना बेहद जरूरी है। जिला प्रशासन ने इस संबंध में नीतिगत फैसला लेते हुए मछली मंडी को शिफ्ट करने की तैयारी पूरी तरह शुरू कर दी है।

इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि, इस पूरी मंडी के स्थानांतरण, नई जगह के विकास और विस्थापन की प्रक्रिया में जो भी वित्तीय खर्च आएगा, उसका पूरा वहन उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा किया जाएगा। इससे स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों को भी बड़ी राहत मिलेगी और परियोजना का काम भी बिना किसी विरोध के शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ सकेगा।

मेट्रो के पिलर, गर्डर और अन्य भारी कंक्रीट ढांचों के निर्माण के लिए एक बड़े कास्टिंग यार्ड की आवश्यकता होती है। इसके लिए मेट्रो प्रशासन ने लगभग 12 हेक्टेयर अस्थायी जमीन की मांग की थी। प्रशासनिक अधिकारियों और इंजीनियरों की टीम ने इस काम के लिए काल्विन तालुकेदार कॉलेज परिसर की जमीन को सबसे उपयुक्त और रणनीतिक रूप से सही पाया है। इस जमीन को अस्थायी रूप से कास्टिंग यार्ड के लिए आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

यहां बनेंगे मेट्रो स्टेशन

एलडीए और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि, वे इस सप्ताह के भीतर काल्विन तालुकेदार परिसर का एक संयुक्त स्थलीय निरीक्षण पूरा करें और इसके बाद जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित कराएं, ताकि निर्माण सामग्री की कास्टिंग का काम बिना किसी रुकावट के समय पर शुरू हो सके। इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में चारबाग से वसंतकुंज के बीच बनने वाले सभी प्रमुख स्टेशनों के लिए जमीन की उपलब्धता और एनओसी जारी करने की स्थिति की भी गहन समीक्षा की गई।

इस रूट पर यात्रियों की सुविधा के लिए चारबाग, गौतमबुद्ध मार्ग, अमीनाबाद, पाण्डेयगंज, सिटी रेलवे स्टेशन, मेडिकल चौराहा, चौक और ठाकुरगंज में मेट्रो स्टेशन बनाए जाने हैं। इन घनी आबादी वाले इलाकों में स्टेशनों के निर्माण के लिए नगर निगम, लखनऊ विकास प्राधिकरण, जल निगम, विद्युत वितरण निगम और शिक्षा विभाग की जमीनों को चिन्हित किया गया है। सभी संबंधित विभागों के मुखियाओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने विभाग से जुड़ी जमीनों के हस्तांतरण के प्रस्ताव को बिना किसी कागजी देरी के तुरंत मंजूरी प्रदान करें ताकि सिविल कंस्ट्रक्शन टीम को साइट हैंडओवर की जा सके।

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स्टेशनों की सटीक लोकेशन की बात करें, तो गौतमबुद्ध मार्ग स्टेशन के निर्माण के लिए प्रसिद्ध गोस्वामी तुलसीदास पार्क की जमीन का एक हिस्सा उपयोग में लाया जाएगा। इसी तरह शहर के सबसे व्यस्त और व्यापारिक केंद्र अमीनाबाद में बनने वाले मेट्रो स्टेशन के लिए ऐतिहासिक झंडे वाला पार्क की जमीन को चिन्हित किया गया है। चौक इलाके में मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए नगर निगम के स्वामित्व वाली भूमि का चयन किया गया है।

फ़ाइल तेजी से आगे बढ़ाने के आदेश

इसके अलावा ठाकुरगंज मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए जल निगम और नगर निगम की संयुक्त जमीनों के हस्तांतरण की फाइल को तेजी से आगे बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं। पार्क और सार्वजनिक स्थलों की जमीनों का उपयोग करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है कि, आम जनता को कम से कम असुविधा हो और पर्यावरण का संतुलन भी बना रहे।

प्रशासनिक बैठक के अंत में लखनऊ के मंडलायुक्त और जिलाधिकारी ने सभी सहयोगी विभागों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि, मेट्रो परियोजना लखनऊ के शहरी बुनियादी ढांचे के लिए मील का पत्थर साबित होने वाली है, इसलिए सभी विभाग इसे रूटीन काम न मानकर अपनी शीर्ष प्राथमिकता में शामिल करें, जिन भी स्थानों पर जमीनों को लेकर थोड़ा बहुत संशय या तकनीकी विवाद है।

वहां के लिए संबंधित विभागों को आपस में मिलकर अगले तीन दिनों के भीतर संयुक्त स्थलीय निरीक्षण पूरा करने की समय सीमा दी गई है। संयुक्त निरीक्षण की रिपोर्ट आने के तुरंत बाद अंतिम एनओसी जारी कर दी जाएगी, जिससे लखनऊ मेट्रो के इस नए कॉरिडोर का सिविल वर्क धरातल पर पूरी रफ्तार के साथ शुरू किया जा सकेगा।

 

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