लखनऊ मेट्रो फेज-2 का रास्ता साफ, पुराने लखनऊ से भी गुजरेगी ट्रेन, NDB ने स्वीकार किया लोन, देखें पूरा रूट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के शहरी परिवहन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। नवाबों के शहर को ट्रैफिक जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने और पुरानी संकरी गलियों तक आधुनिक मेट्रो पहुंचाने का सपना अब हकीकत बनने की राह पर चल पड़ा है। जी हां लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (UPMRC) के महत्वाकांक्षी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (फेज-2) प्रोजेक्ट को ब्रिक्स देशों के न्यू डेवलपमेंट बैंक (NBD) ने अंतिम मंजूरी दे दी है।

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एनडीबी से स्वीकार किया लोन

इस परियोजना की पूर्ति के लिए ऋण भी स्वीकृत हो गया है। यह गलियारा लखनऊ के दो सबसे व्यस्तम और विपरीत छोरों को जोड़ने का काम करेगा, जो न सिर्फ शहर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगा।   लखनऊ मेट्रो का दूसरा चरण यानी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर लंबे समय से प्रतीक्षित था, जिसे अब एनडीबी से मिलने वाले 2883.93 करोड़ रुपये के लोन ने नई ऊर्जा प्रदान की है। यह राशि परियोजना की कुल अनुमानित लागत 5801.05 करोड़ रुपये का लगभग 50 प्रतिशत है।

Lucknow Metro A

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन वर्तमान में इस ऋण से जुड़ी तकनीकी और कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटा हुआ है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन कागजी प्रक्रियाओं और बैंक की शर्तों को अंतिम रूप देने में डेढ़ से दो महीने का समय लग सकता है। जैसे ही यह औपचारिकताएं पूरी होंगी, पुराने लखनऊ की सड़कों पर मेट्रो के पिलर्स और निर्माण मशीनों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगेगी।

केंद्र और राज्य सरकार देंगी 50% खर्च 

इस बार लखनऊ मेट्रो के लिए फंडिंग का स्रोत बदलना एक रणनीतिक और आर्थिक फैसला साबित हुआ है। इससे पहले लखनऊ के नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर और कानपुर मेट्रो परियोजना के लिए यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक (EIB) से कर्ज लिया गया था। हालांकि, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और बदलती वित्तीय नीतियों के कारण ईआईबी की ब्याज दरें काफी बढ़ गई हैं।

वित्तीय बोझ को कम करने और परियोजना को किफायती बनाने के उद्देश्य से यूपी सरकार और मेट्रो कॉरपोरेशन ने न्यू डेवलपमेंट बैंक का रुख किया, जिसने कम ब्याज दर और बेहतर शर्तों पर इस परियोजना को वित्तपोषित करने का निर्णय लिया है। वित्तीय संरचना की बात करें तो इस महत्वाकांक्षी परियोजना में केंद्र और राज्य सरकार की बराबर हिस्सेदारी होगी।

लोन की राशि के अलावा बाकी बची करीब 50 प्रतिशत रकम केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर वहन करेंगी। दोनों ही सरकारें इस प्रोजेक्ट के लिए 1446.96 करोड़ रुपये का योगदान देंगी। यह वित्तीय मॉडल यह सुनिश्चित करता है कि, परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी हो और धन की कमी के कारण काम में कोई बाधा न आए। सरकार का लक्ष्य है कि, ऋण की पहली किश्त मिलते ही निर्माण कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप देकर धरातल पर काम शुरू कर दिया जाए।

11.16 किमी होगी कॉरिडोर की लंबाई

निर्माण कार्य की रणनीति के तहत सबसे पहले एलिवेटेड सेक्शन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। ऋण मिलते ही प्रारंभिक चरण में पांच एलिवेटेड स्टेशनों के निर्माण के साथ-साथ ठाकुरगंज से बसंतकुंज तक लगभग 4.6 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वायडक्ट (पुल) पर काम शुरू होगा। इस हिस्से में मेट्रो ट्रैक के साथ-साथ डिपो को जोड़ने के लिए रैंप का निर्माण भी एक महत्वपूर्ण तकनीकी चुनौती होगी, जिसे पहले चरण में ही पूरा करने की योजना है।

एलिवेटेड सेक्शन का काम अंडरग्राउंड की तुलना में तेजी से होता है, इसलिए विभाग चाहता है कि, इस हिस्से को प्राथमिकता के आधार पर तैयार किया जाए ताकि परियोजना की प्रगति दिखाई दे सके। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की पूरी भौगोलिक संरचना और तकनीकी विस्तार बेहद दिलचस्प है। इस कॉरिडोर की कुल लंबाई 11.16 किलोमीटर होगी, जो चारबाग से शुरू होकर शहर के विस्तार वाले क्षेत्र बसंतकुंज तक जाएगी।

इस पूरे रूट पर कुल 12 स्टेशनों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें से 5 स्टेशन एलिवेटेड होंगे, जो मुख्य रूप से शहर के बाहरी और कम भीड़भाड़ वाले इलाकों में होंगे, लेकिन इस प्रोजेक्ट का सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण हिस्सा इसका अंडरग्राउंड सेक्शन होगा। पुराने लखनऊ के घने इलाकों से मेट्रो गुजारने के लिए 7 स्टेशनों को जमीन के अंदर बनाया जाएगा। अंडरग्राउंड स्टेशनों की सूची में नवाबगंज, मेडिकल चौराहा, सिटी रेलवे स्टेशन, पांडेयगंज, अमीनाबाद, गौतमबुद्ध मार्ग और चारबाग शामिल हैं।

चारबाग होगा सेंटर पॉइंट

ये वे इलाके हैं जो लखनऊ की धड़कन माने जाते हैं और जहां यातायात का दबाव सबसे अधिक रहता है। अमीनाबाद और पांडेयगंज जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में अंडरग्राउंड मेट्रो के आने से न केवल व्यापारियों को लाभ होगा, बल्कि खरीदारों के लिए भी आवाजाही आसान हो जाएगी। इन इलाकों में खुदाई और निर्माण कार्य के दौरान यातायात प्रबंधन यूपीएमआरसी के लिए बड़ी परीक्षा होगी, जिसके लिए उन्नत टनल बोरिंग मशीनों (TBM) का उपयोग किया जाएगा।

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इस पूरे कॉरिडोर का केंद्र बिंदु चारबाग स्टेशन होगा। चारबाग को एक विशाल इंटरचेंज हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में यहां नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर (मुंशीपुलिया से अमौसी एयरपोर्ट) की मेट्रो सेवा उपलब्ध है। नए ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के जुड़ जाने से यह एक प्रमुख संगम स्थल बन जाएगा। यात्रियों के लिए यह बड़ी सुविधा होगी क्योंकि पुराने लखनऊ या बसंतकुंज से आने वाले यात्री चारबाग पर उतरकर अपनी मेट्रो बदल सकेंगे और सीधे एयरपोर्ट या मुंशीपुलिया की ओर जा सकेंगे।

राजधानी के लिए मील का पत्थर होगा कॉरिडोर

यह इंटरचेंज लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को वैश्विक शहर जैसा स्वरूप प्रदान करेगा। परियोजना के सामाजिक और आर्थिक लाभ भी व्यापक होने की उम्मीद है। बसंतकुंज जैसे नए विकसित हो रहे इलाकों में रियल एस्टेट को बढ़ावा मिलेगा, वहीं पुराने लखनऊ के ऐतिहासिक स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच आसान हो जाएगी। मेडिकल कॉलेज और सिटी रेलवे स्टेशन जैसे स्टेशनों के निर्माण से मरीजों और रेल यात्रियों को भारी राहत मिलेगी।

पर्यावरण के लिहाज से भी यह कॉरिडोर मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि इससे सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव कम होगा और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। लोन की सहमति मिलने के बाद अब लखनऊवासियों की निगाहें उस दिन पर टिकी हैं जब इस रूट पर मेट्रो का ट्रायल शुरू होगा।पूर्ण लेख तैयार है। अगर कोई हिस्सा और बेहतर करना हो या टाइटल/हेडिंग जोड़नी हो तो बताएं।

 

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