HPV टीकाकरण अभियान ने पकड़ी रफ्तार, 30 दिनों में 3 लाख से अधिक किशोरियों ने लगवाई वैक्सीन

सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) इन दिनों दुनिया भर में तेजी से पैर पसार रहा है। भारत में भी बड़ी संख्या में महिलाएं इसका शिकार हो रही हैं। ऐसे में भारत सरकार ने इस बीमारी को जड़ से मिटाने का बीड़ा उठाया और देश भर में एचपीवी वैक्सीनेशन ड्राइव की शुरुआत की, जो अब तेजी से रफ्तार पकड़ चुका है।  जी हां देश की बेटियां इस अभियान में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं और वैक्सीनेशन करा रही हैं।

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लाखों लड़कियों ने लगवाया टीका

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों पर गौर करें, तो आभियान शुरू होने के पहले 30 दिन के भीतर ही लाखों किशोरियों ने टीके की पहली  डोज ले ली है। अगर ऐसी ही जागरूकता बनी रही और सरकार इस अभियान को लगातार चलाती रही, तो वह दिन दूर नहीं जब  सर्वाइकल कैंसर का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।

cervical cancer

भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए इस महत्वाकांक्षी टीकाकरण अभियान ने अपने शुरुआती चरण में ही रिकॉर्ड सफलता हासिल की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अभियान के पहले ही महीने में 3 लाख से अधिक किशोरियों का सफल टीकाकरण किया जा चुका है। यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह उन लाखों परिवारों के भरोसे को दिखा रहा है जिन्होंने विज्ञान और स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

माइक्रो-प्लानिंग से मिल रही सफलता

अभियान की इस सफलता के पीछे सूक्ष्म स्तर पर की गई माइक्रो-प्लानिंग का बड़ा हाथ है। राज्यों के स्वास्थ्य विभागों ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर स्कूलों और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों को वैक्सीनेशन हब के रूप में तब्दील कर दिया है। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी इस वैक्सीन की पहुंच सुनिश्चित की गई है, जिससे यह अभियान एक जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।

सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। प्रतिवर्ष हजारों महिलाएं इस बीमारी के कारण अपनी जान गंवाती हैं। इसका मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) है, जो एक अत्यंत सामान्य वायरस है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस अक्सर बिना किसी लक्षण के शरीर में पनपता रहता है और लंबे समय बाद कैंसर का रूप ले लेता है।

90 फीसदी तक कम होगा खतरा

एचपीवी वैक्सीन इसी खामोश दुश्मन यानी ह्यूमन पैपिलोमावायरस के खिलाफ एक अभेद्य ढाल की तरह काम करती है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को इस तरह प्रशिक्षित करती है कि, वह वायरस के संपर्क में आते ही उसे खत्म कर दे। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, यदि यह वैक्सीन 9 से 14 वर्ष की आयु के बीच दी जाए, तो यह भविष्य में कैंसर होने के खतरे को 90 प्रतिशत से अधिक कम कर सकती है। यही कारण है कि, सरकार ने अपनी रणनीति में टीनेजर लड़कियों (9-14 वर्ष) को प्राथमिकता दी है।

इस मिशन की सफलता में शिक्षण संस्थानों की भूमिका सबसे अहम रही है। स्वास्थ्य विभाग ने शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से स्कूलों में विशेष टीकाकरण शिविर आयोजित किए हैं। इससे न केवल लड़कियों तक पहुंचना आसान हुआ, बल्कि एक साथ बड़ी संख्या में छात्राओं को कवर किया जा सका, जिन लड़कियों ने स्कूल छोड़ दिया है या जो दूरदराज के क्षेत्रों में रहती हैं, उन तक पहुंचने के लिए आशा कार्यकत्रियों और आंगनवाड़ी सहायिकाओं की फौज तैनात की गई है। ये स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर माता-पिता की शंकाओं को दूर कर रहे हैं और उन्हें समझा रहे हैं कि, आज का एक छोटा सा टीका उनकी बेटी के कल की सुरक्षा की गारंटी है।

भ्रांतियां और चुनौतियों को किया गया दूर

आपको बता दें कि, किसी भी नए टीकाकरण अभियान के साथ कुछ भ्रांतियां और हिचकिचाहट भी आती है। एचपीवी वैक्सीन के मामले में भी शुरुआत में कुछ भ्रांतियां और चुनौतियां आई थीं, लेकिन सरकार के व्यापक जागरूकता अभियान ने इसे बेअसर कर दिया। सोशल मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और स्थानीय भाषा के समाचार पत्रों के माध्यम से वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता के बारे में लगातार जानकारी साझा की गई।

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सामुदायिक बैठकों और स्कूल की ‘पेरेंट-टीचर मीटिंग्स’ में भी डॉक्टरों ने उपस्थित होकर अभिभावकों के सवालों के जवाब दिए और उनके संशय को दूर किया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि, यह वैक्सीन उनकी बेटियों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रमाणित है। जब लोगों को यह समझ आया कि यह महज एक टीका नहीं, बल्कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव की गारंटी है तो लोगों ने अपनी बेटियों को इसे लगवाने के लिए प्रेरित किया।

सप्लाई चेन पर दिया गया विशेष ध्यान

इस अभियान की गति को बनाए रखने में भारत की वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता ने भी अहम भूमिका निभाई है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि, सप्लाई चेन में कहीं भी कमी न आए। पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन स्टॉक राज्यों को आवंटित किया गया है, जिससे किसी भी स्तर पर टीकाकरण प्रक्रिया बाधित नहीं हुई। स्वदेशी स्तर पर वैक्सीन के उत्पादन को बढ़ावा मिलने से इसकी लागत में भी कमी आई है, जिससे भविष्य में इसे सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम का स्थायी हिस्सा बनाना और भी आसान हो गया है।

नतीजतन पहले महीने के परिणाम काफी उत्साहजनक रहे, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल शुरुआत है। भारत जैसे विशाल देश में हर पात्र लड़की तक पहुंचना एक लंबी प्रक्रिया है। सरकार का अगला लक्ष्य इस कवरेज को उन राज्यों में और सघन करना है  जहां स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा अपेक्षाकृत कमजोर है।

दिया जायेगा सुविधाओं में विस्तार

माना जा रहा है कि, आने वाले महीनों में मोबाइल वैन और ऑन-स्पॉट रजिस्ट्रेशन की सुविधाओं को और विस्तार दिया जाएगा। सरकार की योजना है कि इस साल के अंत तक करोड़ों लड़कियों को कवर किया जाए, ताकि आने वाले दो दशकों में भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामलों को नगण्य स्तर पर लाया जा सके।

 

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