सैफई मेडिकल कॉलेज में मानवता शर्मसार, मानसिक वार्ड में भर्ती महिला से दुष्कर्म, 5 माह की गर्भवती

इटावा। सपा मुखिया अखिलेश सिंह के पैतृक गांव सैफई में स्थित आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय यानी सैफई मेडिकल कॉलेज से एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने अस्पताल की सुरक्षा और नैतिकता पर कालिख पोत दी है। अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में पिछले सवा साल से भर्ती एक करीब 40 वर्षीय असहाय महिला के साथ दरिंदगी हुई है।

नियमति जांच में हुआ खुलासा

Saifai Medical College

चौंकाने वाली बात यह है कि, यह घिनौनी करतूत तब उजागर हुई जब नियमित जांच के दौरान डॉक्टरों ने महिला को पांच महीने की गर्भवती पाया। एक ऐसी महिला जो अपनी पहचान बताने की स्थिति में भी नहीं है, उसके साथ अस्पताल परिसर के भीतर इस तरह का कृत्य होना प्रशासन की भारी चूक और सुरक्षा के खोखले दावों की पोल खोलता है।

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जानकारी के मुताबिक, पीड़ित महिला की मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह पिछले लगभग 15 महीनों से सैफई मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में भर्ती है। महिला अपनी सुध-बुध खो चुकी है और वह अपना नाम या पता भी बताने में असमर्थ है। नियमानुसार, ऐसी स्थिति में मरीज की पूरी सुरक्षा, खान-पान और देखभाल की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और वहां तैनात नर्सिंग व सुरक्षा स्टाफ की होती है, लेकिन, सुरक्षा के तमाम घेरों के बीच किसी दरिंदे ने महिला की बेबसी का फायदा उठाया और महीनों तक उसके साथ यौन शोषण करता रहा।

अस्पताल में अफरा तफरी

इस जघन्य अपराध का खुलासा, तब हुआ जब हाल ही में महिला की शारीरिक स्थिति में बदलाव देखते हुए डॉक्टरों को संदेह हुआ और उसका अल्ट्रासाउंड कराने के साथ ही अन्य चिकित्सकीय परीक्षण हुए, तो रिपोर्ट देखकर डॉक्टरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि, मानसिक रूप से बीमार यह महिला पांच महीने की गर्भवती है। जैसे ही यह खबर अस्पताल के गलियारों में फैली, पूरे प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया और मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए गए।

Saifai Medical College

शुरुआती पड़ताल में विभाग में तैनात एक सफाई कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। मामला बेहद संवेदनशील होने के कारण मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. ए.के. मिश्रा ने तत्काल थाना सैफई में लिखित तहरीर दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल का दौरा किया है। संदिग्ध कर्मचारी से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस घिनौने काम में कोई और भी शामिल था।

 खड़े  हुए ये सवाल

आपको बता दें कि, सैफई मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थान में, जहां हर वार्ड के बाहर सुरक्षा गार्ड तैनात होते हैं और सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछा होता है, वहां 5 महीने तक किसी को इस बात की भनक न लगना कई सवाल खड़े करता है।

वार्ड की निगरानी

मानसिक रोग विभाग जैसे संवेदनशील वार्ड में बाहरी या गैर-जरूरी स्टाफ की आवाजाही पर कड़ी नजर क्यों नहीं रखी गई?

सीसीटीवी का सच

क्या वार्ड के भीतर और गैलरी में लगे कैमरे काम कर रहे थे? पुलिस अब पिछले कई महीनों के फुटेज खंगाल रही है।

नर्सिंग स्टाफ की भूमिका

क्या महिला की देखभाल करने वाले नर्सिंग स्टाफ ने 5 महीनों तक शारीरिक बदलावों को नोटिस नहीं किया?

 

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