यूपी पंचायत चुनाव को लेकर योगी सरकार के मंत्री का बड़ा बयान, बताया- जुलाई 2026 तक संपन्न होगी प्रक्रिया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर काफी समय से संशय बना हुआ है, लेकिन अब पंचायती राज मंत्री और सुभासपा सुप्रीमो ओम प्रकाश राजभर ने एक ऐसा बयान दिया है, जिससे स्पष्ट हो रहा है कि, पंचायत चुनाव कब तक करा लिए जाएंगे। राजभर ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा और चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट नहीं आएगी। पंचायत चुनाव इसी साल समय से कराये जाएंगे।

इसे भी पढ़ें- यूपी पंचायत चुनाव 2026: क्या समय पर होंगे चुनाव? हाई कोर्ट की आयोग को दो टूक!

अटकलों पर विराम लगाने का प्रयास

UP Panchayat Elections

लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए पंचायती राजमंत्री ने स्पष्ट किया कि, राज्य में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव हर हाल में जुलाई महीने तक संपन्न करा लिए जाएंगे। सरकार के मंत्री की तरफ से आया यह बयान उन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश है, जिसमें चुनाव के लंबा खिंचने की आशंका जताई जा रही थी। राजभर ने इस बात पर भी जोर दिया कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग दोनों ही इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समय पर पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। इसके लिए प्रशासनिक मशीनरी को एक्टिव कर दिया गया है।

जुलाई से आगे नहीं बढ़ेगा कार्यकाल

चुनाव की समयसीमा पर विस्तार से चर्चा करते हुए राजभर ने पिछले अनुभवों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि, वर्ष 2021 में भी पंचायत चुनाव की समस्त प्रक्रियाएं जुलाई महीने तक पूर्ण कर ली गई थीं और इस बात भी इसी महीने तक चुनाव करा लिए जाएंगे।  राजभर ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि, विभिन्न पदों जैसे ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों के कार्यकाल भले ही अलग-अलग तारीखों पर समाप्त हो रहे हों, लेकिन किसी भी स्थिति में किसी का भी कार्यकाल जुलाई 2026 की सीमा से आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। सरकार की मंशा है कि एक निर्धारित समय के भीतर पूरे प्रदेश में नई पंचायतों का गठन हो जाए, ताकि ग्रामीण विकास के कार्य निर्बाध रूप से चलते रहे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार न्यायपालिका का पूरा सम्मान करती है और अदालत के हर आदेश का अक्षरशः पालन किया जाएगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि, चुनाव की राह में कोई भी कानूनी या प्रशासनिक अड़चन नहीं आने दी जाएगी।

तेज होंगी तैयारियां

गौरतलब है कि, हाईकोर्ट ने चुनाव में हो रही देरी पर सख्त टिप्पणी की है और निर्वाचन आयोग से सवाल किया है कि क्या 15 अप्रैल को मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद 26 मई तक चुनाव संपन्न कराना संभव होगा। कोर्ट ने इस संबंध में आयोग से हलफनामा भी मांगा है, जिससे यह साफ है कि कानूनी दबाव के बीच अब सरकार और आयोग को अपनी तैयारियां और तेज करनी होंगी।

पंचायत चुनाव की तैयारियों के बारे में बात करते राजभर ने कहा कि, जिलों में मतपत्रों की छपाई का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य भी अपने अंतिम चरण में है, 15 अप्रैल तक अंतिम सूची का प्रकाशन कर दिया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस बार कितने नए मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

2011 की जनगणना के आधार पर होगा चुनाव

सबसे महत्वपूर्ण पहलू ओबीसी आरक्षण को लेकर है, जिस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि आरक्षण का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर ही किया जाएगा और वर्तमान में किसी नई जातिगत गणना की योजना नहीं है। आरक्षण की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से अंतिम रूप देने के लिए जल्द ही एक आयोग का गठन किया जाएगा, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर सीटों का आवंटन फाइनल होगा और फिर चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।

योगी सरकार के मंत्री के इस बयान से स्पष्ट हो रहा है कि सरकर और आयोग ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है, बस देर है तो औपचारिक घोषणा की।

आपको बता दें कि, एक तरफ जहां विपक्षी दल सरकार को चुनाव में देरी के लिए घेर रहे हैं, वहीं ओम प्रकाश राजभर के इस बयान ने सत्ता पक्ष की तैयारियों और संकल्प को प्रदर्शित किया है। अब सबकी नजरें 15 अप्रैल को होने वाले मतदाता सूची के प्रकाशन और उसके बाद निर्वाचन आयोग द्वारा अदालत में दिए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं। यदि स्थितियां योजना के अनुरूप रहीं, तो जुलाई 2026 तक उत्तर प्रदेश के गांवों को नए जनप्रतिनिधि मिल जाएंगे, जो अगले पांच वर्षों के लिए ग्रामीण विकास की बागडोर संभालेंगे।

 

इसे भी पढ़ें-यूपी पंचायत चुनाव 2026: ओबीसी आरक्षण पेच में टल सकते हैं चुनाव, दवाब में योगी सरकार

Related Articles

Back to top button