
दुनिया भर में दिल की बीमारियां मौत का सबसे बड़ा कारण बनती जा रही हैं। इसी खतरे को भांपते हुए अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने कोलेस्ट्रॉल के प्रबंधन को लेकर क्रांतिकारी बदलाव वाली नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन दिशा-निर्देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि, अब बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल को नियंत्रित करने के पुराने मापदंड बदल चुके हैं।
इसे भी पढ़ें-हाई कोलेस्ट्रॉल से हैं परेशान? दवाइयों से पहले किचन में रखी इन 2 चीजों को आजमाएं, जल्द मिलेगा फायदा
30 की उम्र से ही रखें निगरानी

हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, हृदय संबंधी लगभग 80 से 90 प्रतिशत बीमारियों को समय रहते रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए इलाज और जीवनशैली में सही समय पर शुरुआत हो। इस नई गाइडलाइन की ख़ास बात यह है कि, अब 30 साल की उम्र से ही कोलेस्ट्रॉल पर कड़ी निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर दवाओं का सहारा लेने की सलाह दी गई है। यह रिपोर्ट विस्तार से बताती है कि आखिर क्यों अब कोलेस्ट्रॉल को कम रखना ही जीवन की लंबी उम्र की गारंटी बन गया है।
कोलेस्ट्रॉल के बढ़ते स्तर को अक्सर उम्रदराज लोगों की समस्या माना जाता था, लेकिन नई वैश्विक गाइडलाइंस ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर जितना कम होगा, व्यक्ति उतना ही सुरक्षित रहेगा।
हार्ट अटैक का कारण बनता है ब्लॉकेज
अब तक कई लोग डाइट और एक्सरसाइज के भरोसे कोलेस्ट्रॉल को कम करने की कोशिश में सालों बिता देते थे, लेकिन नए नियमों के मुताबिक यदि जीवनशैली में बदलाव से कोलेस्ट्रॉल का स्तर नीचे नहीं आ रहा है, तो दवाओं की शुरुआत करने में अब देरी नहीं करनी चाहिए। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि, दवाओं की शुरुआत में की गई देरी भविष्य में धमनियों में ब्लॉकेज और अचानक आने वाले हार्ट अटैक का कारण बन सकती है।
नई गाइडलाइंस में एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल के लिए जो नए सेफ लेवल तय किए गए हैं, वे काफी सख्त हैं। अब एक सामान्य और स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर 100 mg/dL से नीचे रखना अनिवार्य कर दिया गया है। उन लोगों के लिए सावधानी और भी बढ़ जाती है, जो पहले से ही किसी हृदय रोग के जोखिम से घिरे हैं। ऐसे व्यक्तियों के लिए यह स्तर 70 mg/dL से नीचे होना चाहिए। सबसे गंभीर श्रेणी उन लोगों की है जिन्हें पहले कभी हार्ट अटैक या स्ट्रोक आ चुका है। उनके लिए अब नया मानक 55 mg/dL से नीचे रखा गया है। यह स्पष्ट करता है कि, चिकित्सा जगत अब कोलेस्ट्रॉल के मामले में किसी भी तरह की ढील देने के पक्ष में नहीं है।
बैड कोलेस्ट्राल बढ़ने पर कराएं जांच
इस गाइडलाइन का एक और महत्वपूर्ण पहलू उम्र का पड़ाव है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि अब लोगों को 40 या 50 की उम्र का इंतजार करने के बजाय 30 साल की उम्र से ही अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर की नियमित जांच करानी चाहिए। यदि 30 साल की उम्र में ही बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ पाया जाता है, तो डॉक्टर की सलाह पर तुरंत इलाज शुरू कर देना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में बढ़ते कार्डियक अरेस्ट के मामलों को रोकना है।
शोध बताते हैं कि यदि कम उम्र में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर लिया जाए, तो बुढ़ापे तक हृदय की धमनियों की लचीलापन और कार्यक्षमता बनी रहती है। दिल की सेहत का आकलन करने के लिए अब केवल सामान्य कोलेस्ट्रॉल टेस्ट पर्याप्त नहीं माने जा रहे हैं।
ये आधुनिक टेस्ट कराएं
नई गाइडलाइंस के अनुसार, कोलेस्ट्रॉल के स्तर के साथ-साथ व्यक्ति की पारिवारिक हिस्ट्री और अन्य बीमारियों का भी गहन विश्लेषण किया जाएगा। यदि परिवार में किसी को पहले से दिल की बीमारी रही है या व्यक्ति डायबिटीज और ऑटोइम्यून बीमारियों से ग्रस्त है, तो उसे हाई रिस्क श्रेणी में रखा जाएगा। इसके अलावा, धमनियों की स्थिति का बारीकी से पता लगाने के लिए सीएसी स्कैन, एलपीए टेस्ट और एपोबी जैसे आधुनिक टेस्ट कराने पर जोर दिया गया है। ये टेस्ट यह बताने में सक्षम हैं कि, कोलेस्ट्रॉल के कण रक्त में कितनी गहराई तक नुकसान पहुंच रहे हैं।
उन लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है जिनकी उम्र 40 साल से अधिक हो चुकी है या जो हाई ब्लड प्रेशर और किडनी की बीमारियों से जूझ रहे हैं। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग और एचआईवी मरीजों के लिए भी बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल दोगुना खतरनाक साबित हो सकता है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां की स्थिति और भी चिंताजनक है।
वैश्विक गाइड लाइन का पालन करें भारत के लोग
हेल्थ चिकित्सक का कहना है कि, भारत में पश्चिमी देशों की तुलना में कम उम्र में ही हार्ट अटैक के मामले सामने आ रहे हैं। भारतीयों की जीवनशैली और खान-पान में मैदे और अत्यधिक तेल का बढ़ता उपयोग इस खतरे को कई गुना बढ़ा रहा है। ऐसे में भारत के लोगों को इस वैश्विक गाइडलाइंस का पालन करना जरूर करना चाहिए।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ बुनियादी आदतों को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी है। एक स्वस्थ डाइट जिसमें फाइबर की मात्रा अधिक हो और रिफाइंड फूड की मात्रा न्यूनतम हो, वह प्राथमिक जरूरत है। इसके साथ ही रोजाना कम से कम 30 मिनट की सक्रिय एक्सरसाइज धमनियों को साफ रखने में मदद करती है। धूम्रपान का त्याग करना और वजन को संतुलित रखना हृदय के लिए अनिवार्य शर्त है। साथ ही, तनाव को कम करने और शरीर की मरम्मत के लिए कम से कम 7 घंटे की गहरी नींद लेना बेहद आवश्यक है।
खामोश दुश्मन है कोलेस्ट्रॉल
यहां ये समझना महत्वपूर्ण है कि बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसके लक्षण तुरंत दिखाई दें, यह एक खामोश दुश्मन है जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला करता है। नई गाइडलाइंस हमें सचेत करती हैं कि सुरक्षा और सतर्कता ही दिल की लंबी उम्र का एकमात्र रास्ता है। हर तीन महीने में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना और डॉक्टर की सलाह पर अमल करना अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि जीवन की अनिवार्य आवश्यकता बन गई है।
इसे भी पढ़ें- स्वाद ही नहीं, सेहत का भी सुपरफूड है लहसुन; कोलेस्ट्रॉल, बीपी से लेकर हार्ट तक रखता है फिट



