उत्पादन और चीनी रिकवरी में महाराष्ट्र- कर्नाटक हुआ पीछे, गन्ना भुगतान में भी पहले नबंर पर आया यूपी

लखनऊ। यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने गन्ना भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था, समयबद्ध भुगतान और आधुनिक तकनीकी हस्तक्षेप के जरिए प्रदेश को गन्ना क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बना दिया है। अब उत्तर प्रदेश न केवल गन्ना किसानों को भुगतान करने में नंबर-1 है, बल्कि गन्ने के उत्पादन और चीनी रिकवरी के मामले में भी महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे मजबूत राज्यों को पछाड़ चुका है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि गन्ना उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

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खत्म हुई बिचौलियों की समस्या 

प्रदेश में लगभग 48 लाख गन्ना किसान परिवार सीधे इस फसल पर निर्भर हैं। योगी सरकार ने इन किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और बिचौलियों की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। परिणामस्वरूप, वर्ष 2017 से अब तक सरकार ने गन्ना किसानों को कुल 3,22,722 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान किया है। यह आंकड़ा न सिर्फ एक आर्थिक उपलब्धि है, बल्कि किसान कल्याण के क्षेत्र में एक नया इतिहास भी है।

पेराई सत्र 2025-26 में शानदार प्रदर्शन

चालू पेराई सत्र 2025-26 में योगी सरकार ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता साबित की है। अब तक गन्ना किसानों को 30,831.81 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

Uttar Pradesh Sugarcane

सरकार के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत किसानों को उनका पूरा भुगतान मिल चुका है। शेष बचे भुगतान को भी जल्द पूरा करने के लिए चीनी मिलों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। सरकार की सबसे बड़ी सफलता यह रही है कि गन्ना मूल्य की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जा रही है। इससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है।

पहले किसानों को भुगतान में देरी होती थी और बीच में कटौती भी की जाती थी, लेकिन अब पूरी राशि समय पर और बिना किसी कटौती के किसानों तक पहुंच रही है।

स्मार्ट गन्ना किसान प्रणाली का लाभ

योगी सरकार की एक पहल ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ (SGK) पोर्टल है, जिसने गन्ना क्षेत्र की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बना दिया है। इस प्रणाली के तहत गन्ना क्षेत्रफल का पंजीकरण, सट्टा बुकिंग, कैलेंडरिंग और पर्ची जारी करने की सारी प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन है। किसानों को अब मिल में जाने या लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं है। उन्हें उनकी गन्ना पर्ची सीधे मोबाइल फोन पर प्राप्त हो जाती है।

भुगतान की स्थिति भी रियल-टाइम में ट्रैक की जा सकती है। इस डिजिटल व्यवस्था ने न केवल किसानों के समय की बचत की है, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाओं को भी लगभग समाप्त कर दिया है। चीनी उत्पादन और रिकवरी में यूपी का पेराई सत्र 2025-26 में उत्तर प्रदेश का चीनी उद्योग शानदार प्रदर्शन कर रहा है। प्रदेश में कुल 121 चीनी मिलें संचालित हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम की 3, सहकारी क्षेत्र की 23 और निजी क्षेत्र की 95 मिलें शामिल हैं। इन सभी मिलों ने मिलकर 877.96 लाख टन गन्ने की पेराई की है, जिससे 89.68 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है।

बेहतर प्रबन्धन का परिणाम

सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि औसत चीनी रिकवरी में हुई है। उत्तर प्रदेश ने इस बार 10.21 प्रतिशत की रिकवरी दर हासिल की है। तुलना करें, तो महाराष्ट्र की रिकवरी 9.49 प्रतिशत और कर्नाटक की मात्र 8.19 प्रतिशत है। यह उपलब्धि इसलिए और खास है क्योंकि महाराष्ट्र में उत्तर प्रदेश से कहीं ज्यादा यानी 210 चीनी मिलें संचालित हैं।

Uttar Pradesh Sugarcane

फिर भी उत्पादन क्षमता, रिकवरी दर और समग्र प्रदर्शन में यूपी आगे निकल गया है। बेहतर बीज, आधुनिक खेती तकनीक, किसानों को समय पर सलाह और मिलों में बेहतर प्रबंधन इन सभी कारकों ने मिलकर यह परिणाम दिया है।

गन्ना मूल्य में चौथी बार बढ़ोतरी

योगी सरकार ने किसानों को और अधिक लाभ पहुंचाने के लिए पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है। अब अगेती प्रजातियों के लिए 400 रुपये प्रति कुंतल और सामान्य प्रजातियों के लिए 390 रुपये प्रति कुंतल की दर निर्धारित की गई है। इस बढ़ोतरी से गन्ना किसानों को लगभग 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिला है। यह योगी सरकार के कार्यकाल में गन्ना मूल्य में चौथी बार की गई बढ़ोतरी है। लगातार बढ़ते मूल्य और समय पर भुगतान ने गन्ना किसानों की आय में स्थिर वृद्धि सुनिश्चित की है।

48 लाख किसान परिवारों को आर्थिक मजबूती

उत्तर प्रदेश में गन्ना क्षेत्र से जुड़े लगभग 48 लाख किसान परिवार सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। समय पर भुगतान मिलने से इन परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। किसान अब बेहतर बीज, उर्वरक, सिंचाई और आधुनिक उपकरणों में निवेश कर पा रहे हैं। इससे न सिर्फ गन्ने का उत्पादन बढ़ रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी गति पकड़ रही है।

Uttar Pradesh Sugarcane

गन्ना उद्योग चीनी के अलावा एथनॉल, बिजली, पेपर और अन्य उप-उत्पादों के माध्यम से भी रोजगार और आय का बड़ा स्रोत है। सरकार का लक्ष्य है कि, गन्ना क्षेत्र को और अधिक विकसित करके प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जाए।

पूर्ववर्ती सरकारों से तुलना

पिछली सरकारों में गन्ना किसानों को भुगतान में सालों की देरी होती थी। बिचौलिए मध्यस्थता करते थे और किसान निराश रहते थे। योगी सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। पारदर्शिता, जवाबदेही और डिजिटल गवर्नेंस ने गन्ना क्षेत्र को नई दिशा दी है। सरकार अब गन्ना किसानों को और बेहतर सुविधाएं देने की दिशा में काम कर रही है। उच्च उत्पादकता वाले बीजों का वितरण, ड्रिप सिंचाई, मशीनीकरण और एथनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन प्रयासों से आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश गन्ना क्षेत्र में और मजबूत स्थिति हासिल करेगा।

उत्तर प्रदेश में गन्ना क्षेत्र की यह सफलता केवल आंकड़ों की जीत नहीं है। यह किसानों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता, दूरदर्शी नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गन्ना किसान अब आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं, जिससे पूरे प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। गन्ना भुगतान में नंबर-1 बनना, उत्पादन में आगे निकलना और चीनी रिकवरी में रिकॉर्ड बनाना ये उपलब्धियां उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में एक रोल मॉडल बना रही हैं। आने वाले समय में भी यह गति बनी रहे, यही किसानों और सरकार दोनों की कामना है।

 

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