योगी के कड़ा ऐलान, अब सड़क पर नमाज पढ़ने वालों की खैर नहीं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वह बहस गरम हो गई है, जो हर बार सियासी पारे को चढ़ा देती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर साफ और सख्त लहजे में कह दिया है कि, उत्तर प्रदेश की सड़कों पर नमाज पढ़ने की इजाजत किसी को नहीं है,  न आज, न कल, न कभी। यह बयान कोई पहली बार नहीं आया, इससे पहले भी कई बार आ चुका है, लेकिन जिस समय यह बयान आया है वह समय बेहद अहम है।

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दरअसल, असम और पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के ठीक बाद आए इस बयान को महज एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं माना जा सकता। यह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी का पहला औपचारिक संकेत है और इस संकेत को समझने वाले राजनीतिक विश्लेषक इसे भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे की नई और आक्रामक वापसी के रूप में देख रहे हैं।

क्या बोले सीएम योगी

गत दिवस यानी सोमवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने सड़क पर नमाज के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि, लोग उनसे पूछते हैं कि, क्या उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज नहीं होती और उनका जवाब होता है, हां नहीं होती, चलकर देख लो। योगी ने कड़े शब्दों में कहा कि सड़कें चलने के लिए हैं, कोई भी व्यक्ति आकर चौराहे पर तमाशा नहीं बना सकता। किसी को भी सड़क रोकने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि जहां नमाज का स्थल है वहां जाकर पढ़िए।

CM YOGI

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि, अगर मस्जिद में जगह कम पड़ती है, तो शिफ्ट में नमाज पढ़िए, हम उसे रोकेंगे नहीं। लेकिन सड़क पर नहीं और जो लोग यह तर्क देते हैं कि उनकी संख्या ज्यादा है इसलिए जगह कम पड़ती है, उन पर तंज कसते हुए योगी ने कहा कि अगर सामर्थ्य नहीं है तो संख्या क्यों बढ़ाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि प्यार से मानेंगे तो ठीक, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाया जाएगा।

 बयान का असम और बंगाल कनेक्शन

यह समझना जरूरी है कि, यह बयान इसी वक्त क्यों आया। दरअसल इसके पीछे असम और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों का सीधा असर है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने पहली बार सरकार बनाई है और वह भी दो तिहाई से अधिक बहुमत के साथ। असम में भी भाजपा को तीसरी बार अपने दम पर भारी बहुमत मिला है। इन दोनों राज्यों में योगी आदित्यनाथ स्टार प्रचारक के रूप में गए थे और उनके भाषणों का असर जनता पर साफ दिखा।

दोनों ही राज्यों में भाजपा का मुख्य एजेंडा हिंदुत्व था। असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चुनाव प्रचार के दौरान बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर करने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। बंगाल में जीत के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसे ममता बनर्जी की तुष्टीकरण की राजनीति पर सनातन धर्म की जीत बताया। इन जीतों ने भाजपा के भीतर यह संदेश मजबूत किया है कि हिंदुत्व का एजेंडा चुनावी मैदान में सबसे कारगर हथियार है।

2024 की गलती नहीं दोहराएगी भाजपा

भाजपा नेतृत्व ने 2024 के लोकसभा चुनावों से एक बड़ा सबक सीखा है। उस चुनाव में पार्टी ने अपने हिंदुत्व के नैरेटिव पर उतना जोर नहीं दिया जितना पहले दिया करती थी। नतीजा यह हुआ कि विपक्ष ने संविधान बदलने और खटाखट जैसे नारों से जनता के एक बड़े हिस्से को अपनी तरफ खींच लिया और भाजपा केंद्र में लगातार तीसरी बार अपने दम पर बहुमत हासिल करने से चूक गई।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक 2024 के बाद से भाजपा ने अपने पुराने नैरेटिव पर वापसी की है और सिर्फ झारखंड को छोड़कर हर जगह उसे इसका लाभ मिला है। ऐसे में उत्तर प्रदेश जैसे सबसे बड़े और सबसे अहम राज्य में हिंदुत्व एजेंडे को और मजबूत करना पार्टी की स्वाभाविक रणनीति है। बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं को यह संदेश दे दिया गया है कि आगे इसी एजेंडे पर चलना है।

अखिलेश ने साधा निशाना 

योगी के इस बयान पर समाजवादी पार्टी ने देर नहीं लगाई। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तत्काल पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा असली मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाना चाहती है। उनका तर्क है कि अगर मस्जिद में जगह नहीं होगी तो मुसलमान कहां जाएंगे और सड़क पर नमाज पढ़ने से किसी को कोई नुकसान नहीं है।

NAMAZ ON ROAD

लेकिन भाजपा की नजर से देखें तो यही वह बहस है जो वह चाहती है जिस तरह अखिलेश यादव ने तुरंत प्रतिक्रिया दी उससे भाजपा खेमे में यह संतोष है कि योगी का बयान सटीक निशाने पर लगा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस जितनी लंबी चलेगी उतना ही भाजपा को फायदा होगा क्योंकि यह उसके वोट बैंक को एकजुट करने का सबसे आजमाया हुआ तरीका है।

2027 का केंद्र होगा हिंदुत्व होगा 

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी। योगी आदित्यनाथ की सरकार को लगातार दूसरी बार सत्ता में बनाए रखना पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है। ऐसे में असम और बंगाल की जीत से मिले आत्मविश्वास के साथ भाजपा ने अभी से अपनी रणनीति साफ कर दी है। हिंदुत्व ही उत्तर प्रदेश में भाजपा की राजनीति का केंद्र रहेगा और सड़क पर नमाज जैसे मुद्दे इसी बड़े एजेंडे की छोटी-छोटी कड़ियां हैं जो मिलकर एक बड़ी चुनावी तस्वीर बनाती हैं।

 

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