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तुर्की बना सैन्य महाशक्ति, 10 लाख सैनिकों और ड्रोन ताकत देख घबराया इजराइल

अंकारा। मध्य पूर्व में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच तुर्की और इजरायल के रिश्तों के तनाव की चर्चा अक्सर होती रहती है। दोनों देशों के बीच मतभेद कोई नया नहीं है, लेकिन सीरिया और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने इस प्रतिस्पर्धा को  बड़ा मुद्दा बना दिया है। तुर्की आज केवल नाटो का एक महत्वपूर्ण सदस्य ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर एक बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में भी उभर रहा है। उसकी बढ़ती सैन्य क्षमता, स्वदेशी रक्षा उद्योग और ड्रोन तकनीक ने इजरायल की रणनीतिक चिंताओं को बढ़ाया है।

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तुर्की की भौगोलिक स्थिति भी उसे विशेष महत्व देती है। यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के बीच स्थित तुर्की ब्लैक सी, एजियन सागर और भूमध्य सागर के बीच अहम कड़ी है। बोस्फोरस और डार्डानेल्स जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण उसे वैश्विक समुद्री और सैन्य रणनीति में खास स्थान दिलाता है।

Türkiye becomes a military superpower

सीरिया, इराक, काकेशस और उत्तरी अफ्रीका तक उसकी सैन्य और कूटनीतिक सक्रियता लगातार बढ़ी है। हाल के वर्षों में इजरायल की रणनीतिक बहसों में तुर्की को एक उभरती क्षेत्रीय चुनौती के रूप में देखा जाने लगा है। खासकर तुर्की की रक्षा उत्पादन क्षमता और उसके आधुनिक हथियार कार्यक्रमों ने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को नई दिशा दी है।

10 लाख से ज्यादा सैन्य बल

ग्लोबल फायरपावर के आंकड़ों के आधार पर तुर्की के पास बड़ी संख्या में सैन्यकर्मी मौजूद हैं। रिपोर्ट में मुताबिक, उसके पास करीब 4.81 लाख सक्रिय सैन्यकर्मी हैं। इसके अलावा लगभग 3.80 लाख रिजर्व सैनिक और करीब 1.50 लाख अर्धसैनिक बलों के सदस्य बताए जाते हैं। इन सभी श्रेणियों को मिलाकर तुर्की के पास 10 लाख से अधिक सैन्य बल उपलब्ध होने का अनुमान है।

सक्रिय सैनिकों की संख्या के मामले में तुर्की दुनिया की बड़ी सैन्य शक्तियों में शामिल है। तुर्की की सेना का ढांचा केवल बड़ी संख्या पर आधारित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में अंकारा ने सेना के आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया है। पुराने अमेरिकी और यूरोपीय हथियारों पर निर्भर रहने के बजाय तुर्की ने अपने रक्षा उद्योग को मजबूत करने की नीति अपनाई है।

2,280 से ज्यादा टैंक

तुर्की की थल सेना को उसकी सैन्य ताकत की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। ग्लोबल फायरपावर के आंकड़ों के अनुसार, तुर्की के पास करीब 2,284 टैंक हैं। इसके अलावा उसके सैन्य बेड़े में लगभग 98 हजार विभिन्न प्रकार के आर्मी वाहन शामिल बताए जाते हैं।तुर्की के तोपखाने में भी बड़ी क्षमता मौजूद है। रिपोर्टों के अनुसार, उसके पास लगभग 1,000 स्वचालित तोपखाना सिस्टम, 635 टो-गन और 237 मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर हैं।

तुर्की की सेना में अभी भी पश्चिमी देशों से खरीदे गए कई पुराने हथियार और प्लेटफॉर्म इस्तेमाल किए जाते हैं। हालांकि, अब इनकी जगह धीरे-धीरे घरेलू तकनीक से विकसित आधुनिक सिस्टम ले रहे हैं। तुर्की ने टैंक, बख्तरबंद वाहन, मिसाइल, वायु रक्षा प्रणाली और सैन्य इलेक्ट्रॉनिक्स के उत्पादन में निवेश बढ़ाया है।इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि तुर्की केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं रह गया है। वह अपने सैन्य उपकरणों के रखरखाव, आधुनिकीकरण और अपग्रेड की क्षमता भी विकसित कर रहा है।

1100 से ज्यादा एयरक्राफ्ट 

तुर्की की वायुसेना भी उसकी सैन्य शक्ति का अहम हिस्सा है। ग्लोबल फायरपावर के अनुमान के मुताबिक, तुर्की के पास करीब 1,101 एयरक्राफ्ट हैं। इनमें लगभग 201 फाइटर जेट, 84 परिवहन विमान और 301 प्रशिक्षण विमान शामिल बताए जाते हैं।इसके अलावा तुर्की के पास 509 हेलीकॉप्टर हैं, जिनमें 111 अटैक हेलीकॉप्टर शामिल हैं।

तुर्की के लड़ाकू विमान बेड़े की रीढ़ अभी भी अमेरिकी मूल के F-16 विमान हैं। हालांकि, तुर्की लंबे समय से F-35 फाइटर जेट कार्यक्रम में दोबारा शामिल होने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका और तुर्की के बीच इस मुद्दे पर मतभेद रहे हैं। इजरायल भी तुर्की को F-35 कार्यक्रम में दोबारा शामिल किए जाने को लेकर अपनी चिंताएं जता चुका है।

तुर्की ने इसके समानांतर अपना स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम भी आगे बढ़ाया है। उसका पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान KAAN 2024 में पहली बार उड़ान भर चुका है। अंकारा इस परियोजना को अपने रक्षा उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में गिनता है।तुर्की का लक्ष्य विदेशी लड़ाकू विमानों पर निर्भरता कम करना और भविष्य में अपने आधुनिक फाइटर जेट तैयार करना है।

ड्रोन तकनीक सबसे बड़ी ताकत

तुर्की की आधुनिक सैन्य शक्ति की चर्चा ड्रोन के बिना अधूरी है। पिछले कुछ वर्षों में तुर्की दुनिया के प्रमुख ड्रोन निर्माताओं और निर्यातकों में शामिल हो गया है। तुर्की की रक्षा कंपनी बायकर द्वारा विकसित बायराक्तर श्रृंखला के ड्रोन दुनिया भर में चर्चा में रहे हैं। खास तौर पर बायराक्तर TB2 ने कई संघर्ष क्षेत्रों में इस्तेमाल के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।

इसके बाद तुर्की ने TB3 समेत अन्य आधुनिक मानवरहित हवाई प्रणालियों के विकास पर काम तेज किया। ड्रोन तकनीक तुर्की के लिए सिर्फ सैन्य हथियार नहीं रही, बल्कि वह उसकी विदेश नीति और रक्षा निर्यात का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन गई है।

तुर्की अपने ड्रोन और अन्य रक्षा उपकरण कई देशों को बेच रहा है। इससे वैश्विक हथियार बाजार में उसकी स्थिति मजबूत हुई है और वह इजरायल के रक्षा उद्योग के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धी के रूप में उभरा है।रिपोर्टों के अनुसार, 2025 में तुर्की के रक्षा उद्योग का निर्यात करीब 10 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह कुछ साल पहले के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि मानी जा रही है।

समुद्र में भी मजबूत है तुर्की

तुर्की की सैन्य ताकत केवल जमीन और हवा तक सीमित नहीं है। उसकी नौसेना भी क्षेत्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, तुर्की नौसेना के पास करीब 192 जहाज हैं। इनमें 17 फ्रिगेट, नौ कॉर्वेट और 14 पनडुब्बियां शामिल हैं। तुर्की की नौसेना मुख्य रूप से ब्लैक सी, एजियन सागर और भूमध्य सागर में सक्रिय रहती है।तुर्की की भौगोलिक स्थिति उसकी नौसेना को विशेष रणनीतिक लाभ देती है।

Türkiye becomes a military superpower

बोस्फोरस और डार्डानेल्स जलडमरूमध्य ब्लैक सी और भूमध्य सागर के बीच समुद्री संपर्क के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। तुर्की नौसेना का सबसे प्रमुख प्लेटफॉर्म TCG Anadolu है। यह एक बहुउद्देश्यीय एम्फीबियस असॉल्ट शिप है और तुर्की के सबसे बड़े युद्धपोतों में शामिल है। F-35 कार्यक्रम से अलग होने के बाद तुर्की ने इस जहाज के लिए एक नया ऑपरेशनल मॉडल विकसित करने पर जोर दिया, जिसके तहत इसे मानवरहित हवाई वाहनों के संचालन के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह मॉडल आधुनिक नौसैनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को दिखाता है।

रक्षा उद्योग में बड़ा बदलाव

तुर्की की सैन्य शक्ति में सबसे बड़ा बदलाव केवल सैनिकों, टैंकों और विमानों की संख्या में नहीं आया है। असली बदलाव उसके रक्षा उद्योग के विस्तार में दिखाई देता है। कभी विदेशी हथियारों का बड़ा खरीदार रहा तुर्की अब धीरे-धीरे रक्षा उपकरणों का निर्माता और निर्यातक बन रहा है। तुर्की के रक्षा उद्योग में अब 4,500 से अधिक कंपनियों के काम करने की बात कही जाती है। वर्ष 2002 में यह संख्या केवल 56 के आसपास थी।

इसी तरह रक्षा परियोजनाओं की संख्या भी बढ़कर 1,400 से अधिक हो गई है। तुर्की सरकार और रक्षा उद्योग का दावा है कि देश में निर्मित पुर्जों और सिस्टम की हिस्सेदारी पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ी है और अब घरेलू उत्पादन का अनुपात 85 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच गया है।

तेजी से बढ़ रहा रक्षा बजट

तुर्की अपने रक्षा खर्च में भी लगातार वृद्धि कर रहा है। नाटो से जुड़े अनुमानों के मुताबिक, 2025 में तुर्की का रक्षा बजट करीब 32.6 अरब डॉलर रहने का अनुमान था, जबकि 2024 में यह लगभग 28.3 अरब डॉलर था।रक्षा खर्च तुर्की के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 2.33 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया। आने वाले वर्षों में रक्षा बजट में और वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।

आखिर क्यों बढ़ी इजरायल की चिंता?

तुर्की की बढ़ती सैन्य क्षमता, ड्रोन तकनीक, स्वदेशी हथियार निर्माण और क्षेत्रीय सक्रियता ने उसे मध्य पूर्व की सबसे प्रभावशाली सैन्य शक्तियों में शामिल कर दिया है। दूसरी ओर, इजरायल पहले से ही क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच अपनी सैन्य बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। सीरिया में दोनों देशों की रणनीतिक प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। पूर्वी भूमध्य सागर, रक्षा तकनीक, क्षेत्रीय प्रभाव और बदलते गठबंधन भी दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ाते हैं।

हालांकि तुर्की और इजरायल के बीच सीधे सैन्य संघर्ष की स्थिति नहीं है, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में तुर्की का बढ़ता रक्षा उत्पादन और उसकी सैन्य क्षमता मध्य पूर्व के शक्ति संतुलन को किस हद तक प्रभावित करती है, यह एक बड़ा सवाल बना रहेगा।

 

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