खग्रास चंद्रग्रहण 2026: 3 मार्च को लगेगा खग्रास चंद्रग्रहण, सभी 12 राशियों पर डालेगा शुभ-अशुभ प्रभाव

श्री सनातन ज्योतिष पद्धति के अनुसार, वर्ष 2026 (विक्रम संवत 2082) में कुल चार ग्रहण लगने वाले हैं। दो सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण। ये ग्रहण विश्व स्तर पर दृश्यमान होंगे, लेकिन भारत में केवल एक ही चंद्रग्रहण स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। सनातन ज्योतिष में ग्रहणों को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि ये चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से जुड़े होते हैं, जो राशियों, नक्षत्रों और मानव जीवन पर गहन प्रभाव डालते हैं। ग्रहण काल में सूतक नियम लागू होते हैं, पूजा-पाठ, भोजन और शुभ कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए तथा ये घटनाएं
कर्मफल, भावनात्मक परिवर्तन और आध्यात्मिक जागरण के संकेत देती हैं।

कंकणाकृति (ऐनुलर) सूर्यग्रहण:  ये 17 फरवरी 2026 को लग चुका है, जो भारत में नहीं दिखा था।

खग्रास (पूर्ण) चंद्रग्रहण: 3 मार्च को लगेगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा। ये ग्रहण चंद्रोदय के समय लगभग 20-25 मिनट तक के लिए लगेगा। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भागों में बेहतर दिखाई देगा। यह होली के साथ संयोग से विशेष महत्व रखता है।

खग्रास (पूर्ण) सूर्यग्रहण: 12 अगस्त को लगेगा। ये ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। हालांकि, यूरोप, उत्तरी एशिया ने इसे देखा जा सकेगा।

खण्डग्रास (आंशिक) चंद्रग्रहण: 28 अगस्त को लगेगा। ये अमेरिका, यूरोप समेत कई देशों में दिखाई देगा, भारत में नहीं देखा जायेगा।

KHARGRAS

ये चारों ग्रहण सभी 12 राशियों पर अलग-अलग प्रभाव डालेंगे, जैसे भावनात्मक अस्थिरता, स्वास्थ्य, करियर और रिश्तों में बदलाव आदि। सनातन परंपरा में ग्रहणों के दौरान मंत्र जाप, दान और उपवास से नकारात्मक प्रभाव कम किए जा सकते हैं। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो यह वर्ष आध्यात्मिक दृष्टि से परिवर्तनकारी रहेगा

 खग्रास चन्द्रग्रहण:  विक्रम संवत 2082, शक संवत 1947 में फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि पर मंगलवार तीन मार्च को ये चन्द्र ग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण सिंह राशि में पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र, धृति योग और बालव करण के साथ पड़ रहा है। मुख्य रूप से भारत के सूदूर पूर्वी क्षेत्रों में ग्रस्तोदित यानी ग्रहण शुरू होने के बाद चंद्रोदय के समय खण्डग्रास रूप में दिखाई देगा।

खग्रास चंद्रग्रहण पूर्वी यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी-दक्षिणी अमेरिका, प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर क्षेत्रों में दिखेगा। भारत के अलावा पेरू, कनाडा, ताइवान, फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया, हांगकांग, क्यूबा, थाईलैंड, चीन, कोरिया, जापान और भारत के पूर्वी भागों में खग्रास रूप में दिखाई देगा।
 भारतीय समयानुसार काशी में ग्रहण का स्पर्श दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगा। वहीं मोक्ष शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा। ग्रहण का ग्रास मान 1.15 रहेगा और कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट होगी। सूर्यास्त शाम 6 बजकर 00 मिनट 42 सेकंड पर होगा, इसलिए भारत में केवल मोक्ष के समय पर ग्रहण का अंतिम चरण (लगभग 46 मिनट 18 सेकंड तक) दिखेगा। पूर्वी भारत में बेहतर दृश्यता संभव है, जबकि पश्चिमी भागों में चंद्रोदय के बाद थोड़ा समय ही बचेगा।

 

राशियों पर प्रभाव

चन्द्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पर होगा गोचर के अनुसार उस समय आकाश मण्डल में कर्क लग्न उदित हो रही होगी और ग्रह स्थिति इस प्रकार होगी। सिंह राशि में चन्द्रमा और केतु, कुम्भ राशि में राहु, सूर्य, मंगल व बुध, मीन राशि में शनि और शुक्र तथा मिथुन राशि में गुरू ग्रह होगें।
सिंह राशि पर ग्रहण होने से पारिवारिक कलह, घरेलू हिंसा बढ़ेगी, प्रशासनिक तौर पर मानसिक दबाव प्रतिकूल रहेगा, सरकारी कर्मचारी मानसिक दबाव महसूस करेंगे क्षमता के अनुरूप कार्य नहीं कर पायेंगे। ऐसे व्यक्तियों को तुरन्त निर्णय लेना नुकसानदायक रहेगा, वाणी पर विशेष संयम रखें विवेक व बुद्धि का प्रयोग कर ग्रहण के एक माह तक का संयम व्यतीत करें।
मेष राशि वालों के लिए चिन्ता का समय होगा, वृष राशि वालों का व्यथा पीड़ा दायक समय होगा।
मिथुन राशि वालों के लिए श्री की प्राप्ति आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।
कर्क राशि वालों के लिए क्षति का समय होगा, व्यय अधिक होगा, खर्च पर नियंत्रण रखें।
सिंह राशि वालों के लिए घात, ससपेन्शन, शत्रु हावी रहेंगे।
कन्या राशि वालों के लिए हानि का समय होगा, व्यय अधिक होगा, खर्च पर कंट्रोल रखें नहीं तो बजट बजट बिगड़ सकता है।
तुला राशि वालों के लिए लाभ का समय रहेगा। कमीशन से मिलने वाले पैसों की अधिकता रहेगी।
वृश्चिक राशि वालों के लिए सुख में वृद्धि करेगा, नये भवन, वाहन लग्जरी सामान की प्राप्ति करायेगा।
धनु राशि वालों के लिए मान सम्मान में कमी करेगा, रेपूटेशन गिरेगी, सम्भल कर सम्भाषण करें।
मकर राशि वालों के लिए मृत्यु तुल्य कष्ट रहेगा स्वास्थ्य व आर्थिक प्रलोभन से ऐसा होगा।
कुंभ राशि वालों को पीड़ा दायक समय रहेगा स्वास्थ्य को ध्यान में रख कर कार्य करें।
मीन राशि वालों के लिए सुखदायक समय रहेगा, भवन, वाहन में वृद्धि कर सुख प्राप्त कराएगा।
सूतक काल
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि, चन्द्र ग्रहण का सूतक स्पर्श समय से 9 घंटे पूर्व प्रारम्भ हो जाता है। स्पर्श के समय स्नान पुनः मोक्ष के समय स्नान करना चाहिए। सूतक लग जाने पर मन्दिर में प्रवेश करना, मूर्ति को स्पर्श करना, भोजन करना, मैथुन करना, यात्रा करना इत्यादि वर्जित होता है। बालक, वृद्ध, रोगी अत्यावश्यक में पथ्याहार ले सकते हैं।
भोजन सामग्री जैसे दूध, दहीं, घी इत्यादि में तुलसी की पत्ती या कुश रख देना चाहिए। ग्रहण मोक्ष के बाद पीने का पानी ताजा ले लेना चाहिए। गर्भवती महिलाएं पेट पर गाय के गोबर या पीली मिट्टी का पतला लेप लगा लें। ग्रहण अवधि में श्राद्ध-दान-जप, मंत्र सिद्धि इत्यादि का शास्त्रोक्त विधान है। ग्रहण जहां-जहां दिखाई देता है सूतक भी वहीं लगता है एवं धर्मशास्त्रीय मान्यताएं भी वहीं लागू होती है।

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