
हिन्दू धर्म में घर में रखे मंदिर को महज एक स्थान नहीं माना जाता है, बल्कि इसे सकारात्मक ऊर्जा का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, जहां से घर में सुख समृद्धि का आगमन होता है। यहां होने वाली सुबह-शाम की आरती के दौरान जलने वाला एक छोटा सा दीपक न केवल अंधेरे को दूर करता है, बल्कि घर के वास्तु दोषों को भी मिटता है।
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सही बाती का करें चुनाव
अक्सर हम दीपक जलाते समय रूई की बाती का चुनाव बिना सोचे-समझे कर लेते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक में इस्तेमाल होने वाली बाती का आकार चाहे वह लंबी हो या गोल आपके जीवन की दिशा बदल सकता है। सही बाती का चुनाव और उसे जलाने की सही दिशा घर में धन की आवक, मानसिक शांति और पारिवारिक सुरक्षा को प्रभावित करती है।

अगर आपके जीवन में बाधाएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं या आर्थिक तंगी बनी रहती है, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि किस देवता के सामने कैसी बाती जलानी चाहिए। आइए विस्तार से समझते हैं कि, एक छोटे से दीये और उसकी बाती के पीछे छिपा वास्तु का विज्ञान क्या कहता है।
घर के मंदिर की पवित्रता को बनाए रखने के लिए दीपक जलाना अनिवार्य माना गया है। दीपक से निकलने वाली लौ वातावरण को शुद्ध करती है और घर में मौजूद नकारात्मक शक्तियों का विनाश करती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि घर में बार-बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या कार्यों में रुकावटें आ रही हों, तो इसका सीधा संबंध आपके दीपक जलाने के तरीके से हो सकता है।
प्रगति की राह को प्रशस्त करती है बाती
पूजा में उपयोग होने वाली सूती बाती के दो मुख्य प्रकार होते हैं लंबी और गोल या खड़ी। इन दोनों का आध्यात्मिक महत्व और ऊर्जा का प्रभाव पूरी तरह से अलग होता है। लंबी बाती का संबंध विस्तार और वृद्धि से माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, धन की देवी लक्ष्मी, ज्ञान की देवी सरस्वती और शक्ति की स्वरूपा मां दुर्गा के सम्मुख हमेशा लंबी बाती का प्रयोग करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, अपने कुल की देवी या देवता के सामने लंबी बाती वाला घी का दीपक जलाने से वंश की वृद्धि होती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। लंबी बाती को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, जो जीवन में प्रगति की राह को प्रशस्त करती है।
दूसरी तरफ, स्थिरता और मानसिक दृढ़ता के लिए गोल बाती का विशेष महत्व बताया गया है। इसे फूल बाती या खड़ी बाती भी कहा जाता है। गोल बाती का दीपक जलाना सात्विकता और एकाग्रता का प्रतीक है। भगवान विष्णु, महादेव शिव या संकटमोचन हनुमान जी की आराधना करते समय गोल बाती का प्रयोग करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
मान्यता है कि गोल बाती वाला दीपक जलाने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है और मन की चंचलता दूर होती है। यदि कोई व्यक्ति तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहा है या उसे निर्णय लेने में कठिनाई हो रही है, तो भगवान शिव के समक्ष गोल बाती का दीपक जलाने से उसे मानसिक शांति और स्पष्टता प्राप्त होती है। यह बाती ज्ञान और आत्मज्ञान का प्रतीक मानी गई है, जो साधक को भीतर से मजबूत बनाती है।
दिशा का भी होता है महत्व
बाती के प्रकार के साथ-साथ दीपक की दिशा का सही ज्ञान होना भी वास्तु की दृष्टि से अनिवार्य है। दीपक की लौ या बाती का मुख किस दिशा में है, यह तय करता है कि आपको पूजा का कैसा फल मिलेगा। वास्तु के नियमों के अनुसार, यदि दीपक का मुख पूर्व दिशा की ओर है, तो यह व्यक्ति के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए शुभ माना जाता है। पूर्व दिशा सूर्य की दिशा है, जो आरोग्य और ऊर्जा प्रदान करती है।
वहीं, यदि आप आर्थिक लाभ, करियर में सफलता और नई व्यापारिक संभावनाओं की तलाश में हैं, तो दीपक की बाती का मुख उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए। उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना जाता है, इसलिए इस दिशा में लौ रखने से घर में धन का प्रवाह बना रहता है। हालांकि, दक्षिण दिशा की ओर दीपक की बाती रखना आमतौर पर वर्जित माना गया है, सिवाय विशेष पितृ पूजा या यम पूजा के समय। गलत दिशा में दीपक जलाने से न केवल ऊर्जा का अपव्यय होता है, बल्कि घर के सदस्यों के बीच कलह की संभावना भी बढ़ जाती है।
दीपक में इस्तेमाल होने वाला तेल या घी भी ऊर्जा के स्तर को तय करता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मंदिर में शुद्ध गाय के घी का दीपक जलाना सबसे उत्तम होता है। घी का दीपक जलाने से घर में पॉजिटिव एनर्जी का स्तर कई गुना बढ़ जाता है और वातावरण में एक विशेष प्रकार की सुगंध फैलती है जो इंद्रियों को शांत करती है। यदि घर के भीतर लगातार तनाव या छोटे-छोटे झगड़े होते रहते हैं, तो घी का दीपक जलाना एक अचूक उपाय है।
हनुमान जी के सामने जलाएं चमेली के तेल का दीपक
इसके अलावा, मंगलवार और शनिवार के विशेष अवसरों पर हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाने का विधान है। चमेली का तेल मंगल दोष को शांत करने और नकारात्मकता को दूर करने में सहायक माना जाता है। विशेष रूप से शनिवार की शाम को शनि देव के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाने से जीवन के कष्टों और शनि दोषों से मुक्ति मिलती है।
आर्थिक कठिनाइयों और दरिद्रता से छुटकारा पाने के लिए वास्तु में एक बहुत ही सूक्ष्म लेकिन प्रभावी उपाय बताया गया है। यदि आप आर्थिक रूप से परेशान हैं, तो रूई की बाती बनाने से पहले उस पर थोड़ी मात्रा में चंदन का तिलक या चंदन का पाउडर लगाएं। इसके बाद उस बाती को घी में भिगोकर दीपक जलाएं। चंदन की पवित्र सुगंध और घी की सात्विकता मिलकर घर के कोनों-कोनों में सकारात्मकता फैलाती है और दरिद्रता को दूर करने में मदद करती है।
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