
लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में स्थित कसमंडी कला इलाके में एक विवादित स्थल को लेकर तनाव की स्थिति बन गई है। मंगलवार को हिंदू संगठनों द्वारा इस स्थान पर सुंदरकांड पाठ करने की योजना के चलते जिला प्रशासन ने एहतियातन बकरीद की नमाज पर रोक लगा दी। पुलिस ने तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए सुंदरकांड पाठ की अनुमति नहीं दी और स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
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पासी समुदाय के लोग भी इस विवादित ढांचे पर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठ करने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया। इसके बाद प्रशासन ने पूरे इलाके में किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसमें बकरीद की नमाज भी शामिल है।
क्या है विवाद की जड़
यह पूरा विवाद कसमंडी कला में बने एक पुराने मकबरे और मस्जिद को लेकर है। पासी समुदाय का दावा है कि, यह इमारत मूल रूप से 11वीं शताब्दी के नागवंशी शासक राजा कंस पासी का प्राचीन किला है। उनका कहना है कि वर्ष 980 से 1031 के बीच यह स्थान राजपासी राजा कंस का किला और शिव मंदिर था, जिसे बाद में बदल दिया गया।

समुदाय का आरोप है कि, इमारत की दीवारों पर बनी प्राचीन आकृतियां, खासकर फन वाले नाग चित्र, उनकी नागवंश परंपरा के प्रमाण हैं। पासी समाज ने पुराने गजेटियर और ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा है कि राजा कंस पासी ने इसी क्षेत्र में सालार मसूद गाजी के दो सेनापतियों को पराजित किया था। उन्होंने मांग की है कि, इस ऐतिहासिक स्थल को उसकी मूल पहचान वापस दी जाए।
हालिया घटनाक्रम
21 मई को पासी समुदाय ने इस स्थल पर अपना दावा दोहराया था। इसके बाद लाखन आर्मी के कार्यकर्ताओं ने सक्रियता बढ़ा दी। पुलिस ने इस मामले में लाखन आर्मी के 15 सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, जिसके बाद संगठन ने पूरे उत्तर प्रदेश में आंदोलन छेड़ने का ऐलान कर दिया। लाखन आर्मी के प्रमुख सूरज पासी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि, यदि उनके कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। मंगलवार को पासी समुदाय के कुछ लोग विवादित स्थल पर पहुंचे और हनुमान चालीसा पाठ शुरू करने की कोशिश की। उसी दिन हिंदू संगठनों ने भी सुंदरकांड पाठ का कार्यक्रम रखा था। बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत एक्शन लिया।
इलाके की स्थिति
मलिहाबाद का कसमंडी कला इलाका मिश्रित आबादी वाला है। यहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय सदियों से साथ रहते आए हैं, लेकिन इस विवादित स्थल को लेकर समय-समय पर दावे और प्रतिदावे होते रहते हैं। पासी समुदाय, जो उत्तर प्रदेश में काफी संख्या में है, इस स्थल को अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत मानता है। वर्तमान में इस इमारत को मकबरा और मस्जिद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पासी समाज चाहता है कि, पुरातत्व विभाग इसकी जांच करे और ऐतिहासिक सत्य सामने लाए।
शांति बनाये रखने पर जोर
जिला प्रशासन और पुलिस ने फिलहाल शांति बनाए रखने पर जोर दिया है। दोनों पक्षों को किसी भी उत्तेजक गतिविधि से बचने की सलाह दी गई है। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और इलाके में धारा 144 जैसे प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि, बकरीद के मौके पर किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए नमाज पर अस्थायी रोक लगाई गई है। साथ ही सुंदरकांड पाठ को भी स्थगित कर दिया गया है।
पहचान स्थापित करना है मकसद
यह विवाद केवल एक स्थानीय घटना नहीं है। यह ऐतिहासिक स्थलों की पहचान, सांप्रदायिक सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़ा मुद्दा है।

उत्तर प्रदेश में ऐसे कई विवादित स्थल हैं जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष अपने-अपने ऐतिहासिक दावे रखते हैं। पासी समुदाय इस आंदोलन के जरिए न सिर्फ अपनी ऐतिहासिक पहचान स्थापित करना चाहता है, बल्कि अपनी सामाजिक-राजनीतिक ताकत भी दिखाना चाहता है। वहीं प्रशासन पर दबाव है कि, वह निष्पक्ष जांच कराए और कानून-व्यवस्था बिगड़ने न दे।
आगे क्या हो सकता है
वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। यदि बातचीत से समाधान नहीं निकला तो आंदोलन बढ़ सकता है। पुरातत्व विभाग या जिला प्रशासन द्वारा कोई सर्वेक्षण या ऐतिहासिक जांच शुरू किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। इस पूरे मामले में शांति और संवाद की अपील की जा रही है। लखनऊ जैसे संवेदनशील शहर में छोटी सी घटना भी बड़े तनाव में बदल सकती है, इसलिए सभी पक्षों को संयम बरतने की जरूरत है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता शांति बनाए रखना है, जबकि पासी समुदाय और हिंदू संगठन अपने-अपने अधिकारों की बात कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस विवाद का क्या हल निकलता है, यह देखने वाली बात होगी।
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