इस कंपनी ने लागू की ‘Unhappy Leave’ पॉलिसी, ‘खुश नहीं हो तो मत आओ ऑफिस’

बीजिंग। कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर आजकल दुनियाभर की कंपनियां गंभीरता दिखा रही हैं, लेकिन चीन की एक रिटेल कंपनी ने इस दिशा में एक अनोखा कदम उठाया है। कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए ‘अनहैप्पी लीव’ यानी ‘असंतोष अवकाश’ नाम की एक नई नीति लागू की है, जो इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर कॉर्पोरेट जगत तक चर्चा का विषय बनी हुई है। पैंग डोंग लाई नाम की इस कंपनी की इस पहल को कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति एक संवेदनशील और अलग सोच के तौर पर देखा जा रहा है।

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साल में 10 दिन ले सकते हैं लीव

इस नई नीति के तहत अगर कोई कर्मचारी खुद को मानसिक या भावनात्मक रूप से स्वस्थ्य महसूस नहीं कर रहा है, तो साल भर में 10 दिन की छुट्टी ले सकता है। यह छुट्टी उन परिस्थितियों के लिए है, जब कर्मचारी शारीरिक रूप से तो स्वस्थ हो, लेकिन मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस नहीं कर रहा है। कंपनी का मानना है कि, ऐसे समय में जबरन काम पर बुलाना न तो कर्मचारी के लिए फायदेमंद है और न ही कंपनी के लिए।

Unhappy Leave

एक रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी के संस्थापक और चेयरमैन यू डोंगलाई ने इस पॉलिसी को लेकर अपनी सोच स्पष्ट करते हुए कहा है कि, किसी भी कर्मचारी को नाखुश या मानसिक दबाव की स्थिति में काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि, अगर कोई कर्मचारी खुश नहीं है या मानसिक परेशानी से जूझ रहा है, तो उसे आराम करने और खुद को बेहतर स्थिति में लाने के लिए समय दिया जाना चाहिए।

नहीं देना होगा मेडिकल सर्टिफिकेट 

इस नीति की सबसे खास बात यह है कि, इसके तहत छुट्टी लेने के लिए कर्मचारियों को किसी तरह का अलग से मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं देना पड़ेगा। आमतौर पर ज्यादातर कंपनियों में बीमारी की छुट्टी के लिए डॉक्टर का प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है, लेकिन इस पॉलिसी में मानसिक तनाव, खराब मूड या थकान जैसी स्थितियों को भी उतनी ही गंभीरता से लिया गया है, जितना किसी शारीरिक बीमारी को।

सैलरी भी नहीं कटेगी

इसके साथ ही, इस छुट्टी के दौरान कर्मचारी की सैलरी में किसी भी तरह की कटौती नहीं की जाएगी यानी यह पूरी तरह से ‘पेड लीव’ होगी। इतना ही नहीं, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि, किसी भी मैनेजर को कर्मचारी की इस छुट्टी की मांग को खारिज करने का अधिकार नहीं होगा। इससे यह सुनिश्चित होता है कि, कर्मचारी बिना किसी डर या हिचकिचाहट के इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकें।

कार्यक्षमता पर पड़ता है असर 

कंपनी की तरफ से इस पॉलिसी के पीछे की सोच को समझाते हुए बताया गया कि, कर्मचारियों का मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उनकी शारीरिक सेहत। कंपनी का मानना है कि, लगातार काम के दबाव, मानसिक तनाव और बर्नआउट जैसी समस्याओं का सामना कर रहे कर्मचारियों को समय रहते आराम का मौका दिया जाना बेहद जरूरी है।

ऐसा करने से न केवल कर्मचारी की मानसिक स्थिति में सुधार होता है, बल्कि वे कुछ समय बाद बेहतर ऊर्जा और मानसिक स्थिरता के साथ अपने काम पर वापस लौट पाते हैं। इससे लंबे समय में कर्मचारियों की उत्पादकता और कार्यक्षमता पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

 हर्ष गोयनका ने भी की चर्चा

चीन की इस अनोखी पॉलिसी की चर्चा सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह भारत के कॉर्पोरेट जगत में भी बहस का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर इस पॉलिसी का जिक्र करते हुए आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने कहा कि चीन की यह कंपनी अपने कर्मचारियों को 10 दिन की ‘अनहैप्पी लीव’ देकर एक बिल्कुल नई सोच पेश कर रही है। इस लीव के अनुसार अगर कोई कर्मचारी खुश नहीं है, तो उसे उस दिन काम पर जाने की जरूरत नहीं है।

Unhappy Leave

गोयनका ने इसके साथ ही एक अहम सवाल भी उठाया कि, क्या भारतीय कंपनियों को भी अपने कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और बर्नआउट को कम करने के मकसद से इस तरह की नीतियों के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि, भारत में इस विषय पर खुली चर्चा होनी चाहिए कि क्या वाकई ‘अनहैप्पी लीव’ जैसी नीति की जरूरत है  या फिर कंपनियों को अपने कार्यस्थल पर ऐसा बेहतर और सकारात्मक माहौल तैयार करना चाहिए, जिससे कर्मचारी खुद खुशी-खुशी काम पर आना चाहें, न कि उन्हें छुट्टी लेने की जरूरत ही महसूस हो।

छुट्टी देना स्थायी हल नहीं

विशेषज्ञों का मानना है कि, पैंग डोंग लाई की यह पहल दुनियाभर की कंपनियों के लिए एक नई दिशा दिखा सकती है, खासकर उस दौर में जब कोविड महामारी के बाद से कर्मचारियों में मानसिक तनाव और बर्नआउट जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं।

जानकारों का कहना है कि, पारंपरिक रूप से कंपनियां शारीरिक बीमारी को तो गंभीरता से लेती रही हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। ऐसे में इस तरह की नीतियां न केवल कर्मचारियों के भरोसे और संतुष्टि को बढ़ा सकती हैं, बल्कि कंपनी के प्रति उनकी वफादारी को भी मजबूत कर सकती हैं।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सिर्फ छुट्टी देना समस्या का स्थायी हल नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ कार्यस्थल पर बेहतर माहौल, संतुलित कार्यभार और खुले संवाद की संस्कृति विकसित करना भी उतना ही जरूरी है। बहरहाल, चीन की इस कंपनी की यह पहल फिलहाल दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है और आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य देशों और खासतौर पर भारत की कंपनियां भी इस दिशा में कोई कदम उठाती हैं।

 

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