
लखनऊ। भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली कंपनी जियो अब सिर्फ नेटवर्क कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी अपने विकास के अगले पड़ाव में खुद को एक तकनीकी संगठन के रूप में स्थापित करने की ओर अग्रसर है, जिसका केंद्र-बिंदु स्वदेशी नवाचार, पेटेंट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), एंटरप्राइज सॉल्यूशंस और क्लाउड सेवाएं हैं। जियो की योजना है कि भारत में बनी और परखी गई तकनीकों को अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतारा जाए।
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जियो का सफर शुरू में ग्राहकों की संख्या, डेटा खपत, नेटवर्क के फैलाव और किफायती इंटरनेट पर केंद्रित था। अब कंपनी बाहरी तकनीकी सहायता पर निर्भर रहने की बजाय अपना नेटवर्क सॉफ्टवेयर, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग क्षमताएं स्वयं विकसित कर रही है। यानी जियो के लिए तकनीक अब महज नेटवर्क संचालन का माध्यम नहीं, बल्कि खुद एक बिकने योग्य उत्पाद बनती जा रही है।
वैश्विक बाजार तक पहुंच
जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने संस्था की 10वीं वर्षगांठ के मौके पर कहा कि जियो अब केवल एक टेलीकॉम संस्था नहीं रह गई है। यह कंपनी भारत में कनेक्टिविटी के साथ-साथ डिजिटल उत्पाद, एंटरप्राइज समाधान और AI आधारित तकनीकों का निर्माण कर रही है। उनके अनुसार, उद्देश्य है कि इन तकनीकों को देश में बड़े स्तर पर लागू करने के बाद वैश्विक बाजारों में पहुंचाया जाए और भारत को तकनीक-निर्माता राष्ट्र के तौर पर स्थापित किया जाए।
स्वदेशी 5G स्टैक का निर्माण
जियो ने अपना 5G कोर और OSS/BSS सिस्टम खुद तैयार किया है। कोर, रेडियो और ऑपरेशन सॉफ्टवेयर को एकीकृत कर कंपनी ने पूर्ण 5G टेक्नोलॉजी स्टैक बनाया, जो स्टैंडअलोन 5G पर आधारित है और जिसकी व्यापक स्तर पर जांच हुई है। अक्टूबर 2022 से दिसंबर 2023 के बीच जियो ने संपूर्ण देश में 5G कवरेज पूरी कर ली। मार्च 2026 तक जियो के 5G उपभोक्ताओं की संख्या 26.8 करोड़ को पार कर गई और कुल वायरलेस ट्रैफिक में 5G की भागीदारी लगभग 55 प्रतिशत तक पहुंच गई।

रिलायंस की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, जियो के कुल उपभोक्ताओं की संख्या 52.4 करोड़ से अधिक थी। इतने बड़े लाइव यूज़र-बेस पर तकनीक का सतत परीक्षण कंपनी की एक बड़ी रणनीतिक बढ़त मानी जा रही है।
पेटेंट और इंजीनियरिंग टीम
जियो के तकनीकी रूपांतरण का एक प्रमुख प्रमाण उसके पेटेंट हैं। 31 मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स और उसकी इकाइयों ने कुल 6,817 पेटेंट आवेदन दाखिल किए, जिनमें 4G, 5G, 6G, AI और क्लाउड संबंधी तकनीकें शामिल हैं। इनमें से 1,009 पेटेंट को वैश्विक स्तर पर स्वीकृति मिल चुकी है।
विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) की पेटेंट सहयोग संधि (PCT) रैंकिंग में, 2025 में प्रकाशित आवेदनों के आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स 2026 में विश्व की शीर्ष 20 कंपनियों में शुमार हुई और 12वें पायदान पर रही। कंपनी की इंजीनियरिंग व तकनीकी टीम में 11,303 सदस्य हैं, जो कुल कार्यबल का लगभग 40 प्रतिशत बैठता है।
भारत के अनुरूप ढली तकनीक
जियो ऐसी तकनीकें भी विकसित कर रहा है जो भारत जैसी विशाल और विविधतापूर्ण भौगोलिक-सामाजिक परिस्थितियों के अनुकूल हों। घरेलू ब्रॉडबैंड सेवा के लिए कंपनी ने अनलाइसेंस्ड बैंड रेडियो (UBR) तकनीक विकसित की है, जो उन इलाकों में फाइबर जैसी गुणवत्ता की ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्ध कराती है जहां फाइबर बिछाना जटिल या खर्चीला है।
मार्च 2026 तक जियो के 2.7 करोड़ से अधिक फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शन थे और इस बाजार में उसकी हिस्सेदारी लगभग 43 प्रतिशत रही। इसके अतिरिक्त कंपनी ने मैक्रो बेस स्टेशन, इनडोर-आउटडोर स्मॉल सेल, मिलीमीटर-वेव, 5G-वाईफाई एकीकरण के साथ 1 Tbps क्षमता वाला यूज़र-प्लेन फंक्शन और कॉम्पैक्ट प्राइवेट 5G नेटवर्क समाधान ‘5G-इन-ए-बॉक्स’ भी तैयार किया है।
ये सभी तकनीकें भारत की विशाल जनसंख्या, असमान क्षेत्रीय वितरण और लागत-संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। कंपनी का मानना है कि ऐसी तकनीकें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के समान परिस्थिति वाले बाजारों में भी कारगर साबित हो सकती हैं।
वैश्विक विस्तार की रणनीति
जियो अब अपने मोबाइल कनेक्टिविटी, होम ब्रॉडबैंड और स्वचालित नेटवर्क प्रबंधन स्टैक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की तैयारी में है। इन तकनीकों का परीक्षण पहले से ही 52.4 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं वाले नेटवर्क पर हो चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में जियो नेटवर्क पर लगभग 241 एक्साबाइट डेटा ट्रैफिक दर्ज किया गया।
इस अनुभव के आधार पर कंपनी दूसरे टेलीकॉम ऑपरेटरों और व्यावसायिक संस्थानों को ऐसी तकनीकें पेश कर सकती है, जो वास्तविक और बड़े नेटवर्क पर पहले ही आजमाई जा चुकी हैं। इसका अर्थ है कि जियो के पास अब अपनी तकनीक को केवल आंतरिक उपयोग तक सीमित न रखकर उसे अन्य ऑपरेटरों और एंटरप्राइज ग्राहकों को बेचने या लाइसेंस देने का अवसर भी है।
AI, क्लाउड और 6G पर निवेश
जियो की तकनीकी महत्वाकांक्षाएं अब कनेक्टिविटी से आगे बढ़कर क्लाउड, एज कंप्यूटिंग, प्राइवेट 5G और AI तक विस्तृत हो रही हैं। कंपनी नेटवर्क स्लाइसिंग, निजी 5G नेटवर्क, एज कंप्यूटिंग, क्लाउड प्लेटफॉर्म और स्वचालित नेटवर्क प्रबंधन जैसी तकनीकों के सहारे एंटरप्राइज क्षेत्र में भी अपनी पैठ बढ़ा रही है।
रिलायंस ने ‘AI Everywhere, For Everyone’ पहल के तहत कनेक्टिविटी, कंप्यूटिंग शक्ति और डिजिटल प्लेटफॉर्म को एकीकृत करने की प्रतिबद्धता जताई है। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में स्वदेशी तकनीक और डिजिटल सेवाओं को जियो की दीर्घकालिक रणनीति का केंद्रीय स्तंभ बताया गया है।
AI को नेटवर्क संचालन, प्रबंधन और ग्राहक अनुभव से जुड़े प्लेटफॉर्म्स में तेजी से एकीकृत किया जा रहा है। कंपनी का ध्यान भारत के बड़े पैमाने और मूल्य-संवेदनशीलता के अनुरूप AI समाधान तैयार करने और उन्हें समान आवश्यकताओं वाले अन्य देशों तक पहुंचाने पर केंद्रित है।
जियो के पेटेंट भंडार में 6G भी शामिल
इसके साथ ही कंपनी 6G तकनीक और भविष्य के वैश्विक मानकों के निर्धारण की प्रक्रिया में भी सक्रिय भागीदारी कर रही है। जियो के पेटेंट भंडार में 6G से संबंधित नवाचार भी शामिल हैं। कंपनी का लक्ष्य है कि भारत अगली पीढ़ी की मोबाइल तकनीक का केवल उपभोक्ता न रहकर उसके मानक और ढांचा तय करने में भी अहम भूमिका निभाए, जिससे भविष्य में बौद्धिक संपदा अधिकार और लाइसेंसिंग से जुड़े नए अवसर भी सृजित हो सकें।
जियो के लिए आने वाला दशक केवल भारत को जोड़ने भर का नहीं, बल्कि देश में तकनीक गढ़ने, उसे विशाल पैमाने पर परखने और फिर दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का होगा। स्वदेशी 5G स्टैक, हजारों पेटेंट, करोड़ों उपभोक्ता आधार, घरेलू ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज समाधान, क्लाउड और 6G से जुड़ी क्षमताओं के दम पर कंपनी टेलीकॉम की सीमाओं से आगे बढ़कर अपनी तकनीकी दक्षता को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इससे भारत के लिए तकनीक के उपभोक्ता देश से आगे बढ़कर तकनीक के निर्माता और निर्यातक देश के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने की संभावनाएं और प्रबल हो सकती हैं।
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