खुदरा निवेशकों के हितों की रक्षा, निवेशक धोखाधड़ी रोकने को निगरानी बढ़ा रहा सेबी: पांडेय

पांडेय ने निवेशकों को लुभाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप, फर्जी ऐप और अन्य डिजिटल चैनल के बढ़ते उपयोग का संकेत दिया। उन्होंने ऐसे कई मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि नियामक ने इस खतरे को रोकने और निवेशकों के पैसे की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए हैं।

मुंबई। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा है कि खुदरा निवेशकों के हितों की रक्षा और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी को रोकने के लिए नियामक प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी व्यवस्था को मजबूत बना रहा है। इस पहल का मकसद निवेश से पहले ही घोटालों पर अंकुश लगाना है जिसके तहत निवेशकों के पंजीकृत मध्यस्थों से संपर्क करने से पहले ही कोष की हेराफेरी हो जाती है। एक मार्च को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) प्रमुख के रूप में एक वर्ष पूरा करने वाले पांडेय ने कहा कि कई नए और इच्छुक निवेशक फर्जी ट्रेडिंग ऐप, व्हाट्सएप समूहों और उच्च प्रतिफल के वादों से गुमराह हो रहे हैं और अक्सर सेबी-विनियमित मध्यस्थों के साथ किसी भी तरह के संपर्क से बहुत पहले ही अपना धन धोखेबाजों के निजी खातों में स्थानांतरित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि खासकर देश के बढ़ते खुदरा निवेशक आधार को देखते हुए निवेशकों की सतर्कता केवल जागरूकता तक सीमित न रहकर, सोच-समझकर कदम उठाने में तब्दील होनी चाहिए। निवेश से पहले धोखाधड़ी से संबंधित एक सवाल के जवाब में, पांडेय ने कहा कि बाजार में प्रवेश करने के इच्छुक कई व्यक्ति सेबी-पंजीकृत मध्यस्थ तक पहुंचने से पहले ही ‘घोटालेबाजों’ के चंगुल में फंस जाते हैं। उन्होंने बातचीत में कहा, ”निवेश करने का इरादा रखने वाला व्यक्ति वास्तव में उच्च प्रतिफल के वादों के जाल में फंस रहा है। मामला सेबी या किसी ब्रोकर तक पहुंचता ही नहीं क्योंकि व्यक्ति पहले ही जाल में फंस चुका होता है।” खुदरा निवेशकों की बढ़ती संख्या के बीच उन्होंने यह बात कही।

पांडेय ने निवेशकों को लुभाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप, फर्जी ऐप और अन्य डिजिटल चैनल के बढ़ते उपयोग का संकेत दिया।
उन्होंने ऐसे कई मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि नियामक ने इस खतरे को रोकने और निवेशकों के पैसे की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए हैं। सेबी प्रमुख ने निवेश का प्रस्ताव देने वाली इकाइयों की वैधता की पड़ताल करने में मदद के लिए विकसित किए गए ‘सेबी चेक’ जैसे उपकरणों के महत्व का जिक्र किया। साथ ही भुगतान की सुरक्षा के लिए मान्य मंचों और यूपीआई हैंडल के व्यापक प्रसार को प्रोत्साहित करने की बात कही।पांडेय ने कहा कि यह सब कोई नई पहल नही है, लेकिन साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए इनका व्यापक उपयोग महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नियामक हर तरह के अभियान चलाएगा।

उसने एक परियोजना शुरू की है जिसके तहत मल्टीमीडिया और बहुभाषी अभियान चलाए जाएंगे ताकि इन धोखाधड़ियों को रोका जा सके।पांडेय ने निवेशकों से अनुशासन बनाए रखने का भी आ’’ान किया और वायदा एवं विकल्प जैसे जटिल निवेश उत्पादों में सट्टेबाजी के बजाय एसआईपी (व्यवस्थित निवेश योजनाएं) और पूल्ड निवेश योजनाओं जैसी दीर्घकालिक निवेश रणनीतियों पर जोर दिया। जानकारी के अभाव में कई निवेशक वायदा एवं विकल्प जैसे निवेश श्रेणियों में कदम रखते हैं।उन्होंने निवेशक शिक्षा के लिए सेबी के प्रयासों को दोहराया और गैर-पंजीकृत ‘फाइन इन्फ्लूएंसर’ द्वारा प्रचारित अवास्तविक रिटर्न के खिलाफ चेतावनी दी।

पांडेय ने निगरानी से जुड़ी प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर नियामक के व्यापक निवेशक संरक्षण रूपरेखा के हिस्से के रूप में, बाजार में गड़बड़ी की निगरानी करने, भ्रामक सामग्री को चिह्नित करने और वास्तविक समय में गैर-पंजीकृत सलाहों पर नजर रखने के लिए एआई और डेटा माध्यमों के उपयोग का जिक्र किया। वर्तमान में, भारत में 14 करोड़ से अधिक निवेशक हैं। हितों के टकराव पर उच्चस्तरीय समिति से संबंधित एक सवाल के जवाब में, पांडेय ने कहा कि समिति की सिफारिशों पर निदेशक मंडल में चर्चा की गई और आगे विचार-विमर्श की आवश्यकता है। हम हम अगली बोर्ड बैठक में इस पर चर्चा करेंगे।पांडेय के कार्यभार संभालने के बाद, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने मार्च, 2025 में इस समिति का गठन किया था।

समिति ने नवंबर में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें मुख्य महाप्रबंधक से ऊपर के अधिकारियों द्वारा खुलासे की सिफारिश की गई है। एमसीएक्स और एनएसडीएल में हाल ही में हुई तकनीकी गड़बड़ियों पर, सेबी प्रमुख ने कहा कि ऐसी चीजें कोई असामान्य नहीं हैं। हालांकि, बाजार अवसंरचना प्रणालियों की जटिलता और उच्चस्तर की परस्पर संबद्धता को देखते हुए, ऐसी घटनाएं कभी-कभार ही होती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों घटनाएं अलग-अलग प्रकृति की थीं। उन्होंने कहा, ”दोनों मामलों में, सेबी को पूरी जानकारी दी गई और घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखी गई।

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