
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भाजपा में एक और सुगबुगाहट तेज हो गई है। चर्चा है कि, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और यूपी भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी को केंद्रीय कैबिनेट से हटाकर पूर्णकालिक रूप से संगठनात्मक जिम्मेदारियों पर लगाए जाने की तैयारी चल रही है।
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पंकज चौधरी 2025 में बने थे प्रदेश अध्यक्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि, क्या पंकज चौधरी अब सरकार की बजाय पार्टी संगठन को मजबूत करने की बड़ी भूमिका में पूरी तरह सक्रिय होंगे। ये अटकलें तब और तीखी हो गईं जब भाजपा ने 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए दो केंद्रीय मंत्रियों रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को टिकट देने से इनकार कर दिया। बिट्टू रेल और खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री हैं जबकि जॉर्ज कुरियन अल्पसंख्यक मामलों और पशुपालन राज्य मंत्री हैं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि, यह फैसला महज संयोग नहीं बल्कि चुनावी रणनीति का हिस्सा है। भाजपा अक्सर चुनावी राज्यों में संगठन को प्राथमिकता देते हुए मंत्रियों को संगठनात्मक भूमिकाओं की ओर मोड़ती रही है। पंकज चौधरी ने दिसंबर 2025 में यूपी भाजपा अध्यक्ष का पद संभाला था। उनके अलावा कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को हाल ही में दिल्ली भाजपा अध्यक्ष बनाया गया है। भाजपा लंबे समय से एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत का पालन करती आई है।
संगठन को मजबूत करने पर फोकस
सूत्रों के अनुसार पंकज चौधरी को अब यूपी में पार्टी की जमीनी तैयारियों पर पूरा ध्यान देने की जरूरत है जिसके लिए केंद्रीय मंत्री पद की व्यस्तताएं बाधा बन सकती हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, पंकज चौधरी के सामने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन का मजबूत मुकाबला करने की बड़ी चुनौती है। सपा-कांग्रेस जातीय समीकरणों पर खेल रही है। ऐसे में पार्टी को जमीनी स्तर पर संगठन को और अधिक मजबूत करना होगा।
पंकज चौधरी के पास संगठनात्मक अनुभव और प्रशासनिक समझ दोनों हैं, लेकिन पूर्णकालिक फोकस की जरूरत है। वर्तमान में यूपी भाजपा अध्यक्ष पदाधिकारियों की अपनी टीम को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। यह टीम आगामी लोकसभा उपचुनावों, नगर निकाय चुनावों और अंततः 2027 के महासंग्राम में पार्टी का नेतृत्व करेगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पंकज चौधरी से अपेक्षा की जा रही है कि वे पार्टी संगठन को जिला मंडल और बूथ स्तर तक मजबूत करें।
मंत्री पद की जिम्मेदारियां बन सकती हैं बाधा
साथ ही सरकार और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बैठाएं। सदस्यता अभियान जनसंपर्क कार्यक्रम और बूथ प्रबंधन की निगरानी करें। जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को संभालें तथा चुनावी मशीनरी को पूरी तरह चुस्त दुरुस्त बनाएं। जानकारों का कहना है कि इतनी व्यापक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए केंद्रीय मंत्री पद की व्यस्तताएं बाधा बन सकती हैं, इसलिए उन्हें मंत्री पद से मुक्त करना रणनीतिक रूप से समझदारी भरा कदम साबित हो सकता है।
भाजपा की पुरानी परंपरा रही है कि, चुनावी राज्यों में जरूरत पड़ने पर नेताओं को सरकार से संगठन या संगठन से सरकार की ओर भेजा जाता है। 2017 और 2022 के यूपी चुनावों में भी पार्टी ने इसी फॉर्मूले पर काम किया था। महराजगंज से सात बार के सांसद पंकज चौधरी भाजपा के अनुभवी और कद्दावर नेताओं में शुमार हैं। उन्होंने विभिन्न स्तरों पर पार्टी के लिए काम किया है। यूपी भाजपा अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति को सिर्फ औपचारिक फैसला नहीं बल्कि क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को संतुलित करने की सोची समझी रणनीति के रूप में देखा गया था।
पूर्वांचल में है मजबूत पकड़
खासतौर पर गैर यादव ओबीसी वर्ग और मुख्य रूप से कुर्मी समुदाय के बीच भाजपा की पैठ को और मजबूत करने का यह एक बड़ा प्रयास था। पंकज चौधरी कुर्मी समुदाय से आते हैं, जो पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में काफी प्रभावशाली है। उनकी अध्यक्षता में पार्टी इस वर्ग को और अधिक जोड़ने की कोशिश कर रही है तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। भाजपा लंबे समय से यह मानती रही है कि चुनाव जीतने के लिए मजबूत संगठन सबसे जरूरी है।

दिल्ली में हर्ष मल्होत्रा की नियुक्ति भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। दिल्ली में भाजपा विपक्ष की भूमिका में है और 2027 के दिल्ली विधानसभा चुनाव भी महत्वपूर्ण हैं। दोनों नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपकर पार्टी भविष्य की लड़ाइयों के लिए तैयार हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, अगर पंकज चौधरी को कैबिनेट से हटाया जाता है तो यह यूपी में भाजपा की गंभीर और पूर्णकालिक तैयारी का स्पष्ट संकेत होगा।
हाईकमान स्तर पर होगा फैसला
2024 के लोकसभा चुनावों के बाद यूपी में भाजपा को कुछ सीटों पर नुकसान हुआ था। अब पार्टी उन क्षेत्रों में वापसी करना चाहती है जहां सपा कांग्रेस गठबंधन मजबूत हुआ था। पंकज चौधरी जैसे अनुभवी नेता को पूर्णकालिक संगठन सौंपना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के स्तर पर ही लिया जाएगा।
पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि, कैबिनेट में फेरबदल की प्रक्रिया चल रही है और यूपी समेत कई राज्यों के संगठनात्मक बदलावों को इसमें ध्यान में रखा जा रहा है। चाहे पंकज चौधरी केंद्रीय मंत्री पद पर बने रहें या पूर्ण रूप से संगठन पर फोकस करें एक बात साफ है कि भाजपा 2027 के यूपी चुनाव को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। पंकज चौधरी की भूमिका चाहे जो भी हो उनकी अनुभवी नेतृत्व क्षमता पार्टी के लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहेगी। यूपी की राजनीति में संगठन हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाता रहा है और इस बार भी भाजपा उसी पर पूरा भरोसा कर रही है।
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