अब नोएडा के चप्पे-चप्पे पर होगी नजर, पैनिक बटन दबाते ही दौड़ पड़ेगी पुलिस

नोएडा। दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के सबसे हाईटेक शहर नोएडा को अब देश के सबसे सुरक्षित और तकनीकी रूप से एडवांस शहरों की कतार में खड़ा करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। लंबे समय से फाइलों में अटके और तीन बार टेंडर निरस्त होने का दंश झेल चुके सेफ सिटी प्रोजेक्ट को आखिरकार पंख लग गए हैं।

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212 करोड़ का बजट पास 

नोएडा अथॉरिटी ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य किला बनाने के लिए 212 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट वाले इस मेगा प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की रफ्तार तेज कर दी है। इस योजना के तहत अपराधियों की धरपकड़ से लेकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए शहर के कोने-कोने पर तीसरी आंख का कड़ा पहरा रखा जायेगा, जिससे अपराधी चाहकर भी कानून की नजरों से बच नहीं सकेंगे।

cctv cameras in noida

सुरक्षा के इस आधुनिक खाके को अंतिम रूप देने के लिए नोएडा अथॉरिटी के बोर्ड रूम में शुक्रवार को एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक आयोजित की गई। नोएडा अथॉरिटी के सीईओ कृष्णा करुणेश की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रोजेक्ट की सभी बारीकियों पर चर्चा के बाद इसके क्रियान्वयन को हरी झंडी दे दी गई।

अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरी कवायद उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी सेफ सिटी पहल का हिस्सा है, जिसके जरिए न सिर्फ कानून-व्यवस्था को मजबूत करना है बल्कि आधुनिक तकनीक के दम पर नोएडा को पूरी तरह से एक स्मार्ट और सुरक्षित ग्लोबल सिटी के रूप में विकसित करना है। अथॉरिटी की इस मंजूरी के बाद अब बहुत जल्द शहर की सड़कों और चौराहों पर बदलाव जमीन पर नजर आने लगेगा।

561 स्थान चिन्हित

इस प्रोजेक्ट के तहत नोएडा अथॉरिटी ने पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर शहर के कुल 561 ऐसे स्थानों को चिन्हित किया है, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं या जहां आम जनता, खासकर कामकाजी महिलाओं और छात्रों की आवाजाही सबसे ज्यादा रहती है। इन सभी जगहों पर कुल 1,949 अत्याधुनिक और हाई-डेफिनिशन नाइट विजन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।

ये सामान्य कैमरे नहीं होंगे, बल्कि इनमें फेस डिटेक्शन और वीडियो एनालिटिक्स जैसी वर्ल्ड-क्लास टेक्नोलॉजी इनबिल्ट होगी। इसका फायदा यह होगा कि, अगर कोई शातिर अपराधी या संदिग्ध व्यक्ति शहर में घूम रहा होगा, तो यह सिस्टम तुरंत उसका चेहरा पहचानकर कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देगा। रात के घने अंधेरे में भी ये कैमरे क्रिस्टल क्लियर तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करने में पूरी तरह सक्षम होंगे।

अपराधियों और खासकर वाहन चोरों पर नकेल कसने के लिए इस प्रोजेक्ट में एक और बेहद खास इंतजाम किया गया है। शहर के 100 सबसे प्रमुख चौराहों, एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स और एक्सप्रेसवे के रास्तों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे इंस्टॉल किए जाएंगे। इन कैमरों की खासियत यह होगी कि, ये सौ की रफ्तार से दौड़ती गाड़ियों की नंबर प्लेट को भी पलक झपकते ही स्कैन कर उसका पूरा डेटा निकाल लेंगे।

मिलेगी रियल टाइम लोकेशन

अगर कोई चोरी की गाड़ी, फर्जी नंबर प्लेट वाला वाहन या किसी वारदात में इस्तेमाल कार इन चौराहों से गुजरेगी, तो पुलिस को तुरंत उसकी रियल-टाइम लोकेशन मिल जाएगी। इससे ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों और स्टंटबाजों पर भी लगाम कसना बेहद आसान हो जाएगा।

महिला सुरक्षा को इस पूरे सेफ सिटी प्रोजेक्ट के केंद्र में रखा गया है। नोएडा में पहली बार 147 बेहद रणनीतिक और संवेदनशील जगहों पर इमर्जेंसी पैनिक बटन और टू-वे ऑडियो कम्युनिकेशन सिस्टम लगाए जा रहे हैं। अगर किसी महिला, बच्चे या नागरिक को सड़क पर चलते हुए कोई खतरा महसूस होता है, कोई उनका पीछा करता है या कोई मेडिकल इमरजेंसी होती है, तो वे सीधे इस पैनिक बटन को दबा सकेंगे।

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बटन दबते ही बिना एक सेकंड गंवाए सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट चला जाएगा और वहां बैठी टीम को पीड़ित की सटीक लोकेशन मिल जाएगी। इसके साथ ही पीड़ित वहां लगे सिस्टम के जरिए सीधे पुलिस अधिकारी से बात भी कर सकेगा। इस तकनीक से पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम बेहद कम हो जाएगा और मुसीबत में फंसे इंसान तक चंद मिनटों में मदद पहुंच जाएगी।

अपराध पर लगेगी लगाम

इस पूरे विशाल नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए नोएडा के सेक्टर-94 में स्थित अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर  को मुख्य केंद्र बनाया गया है। शहर भर में लगने वाले सभी 1,949 कैमरों, एएनपीआर सिस्टम और पैनिक बटन्स को इसी आईसीसीसी  से सीधे जोड़ा जाएगा।

इसका मतलब यह है कि, पूरे नोएडा शहर की चप्पे-चप्पे की निगरानी एक ही छत के नीचे से लाइव की जा सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इस सेंट्रलाइज्ड सिस्टम के शुरू होने से न केवल अपराधों और मनचलों पर लगाम लगेगी, बल्कि शहर के ट्रैफिक मैनेजमेंट, त्योहारों के दौरान भीड़ नियंत्रण और किसी भी बड़ी आपदा या आपातकालीन स्थिति में प्रशासनिक विभागों के बीच आपसी तालमेल बिठाकर तुरंत बड़ी कार्रवाई करना बेहद आसान हो जाएगा।

 

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