
अयोध्या। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल अयोध्या के अंतरराष्ट्रीय मंदिर म्यूजियम के निर्माण कार्य को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि लंबे समय से सुर्ख़ियों में रहे इस भव्य प्रोजेक्ट का निर्माण अब जल्द ही शुरू होने वाला है। उत्तर प्रदेश सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद जिला प्रशासन ने इस परियोजना के लिए मांझा जमथरा इलाके में 52 एकड़ जमीन उपलब्ध करा दी है। जमीन आवंटन के साथ ही इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने का रास्ता भी साफ हो गया है।
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750 करोड़ से बनेगा भव्य म्यूजियम
इस टेंपल म्यूजियम के निर्माण पर कुल 750 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च होने का अनुमान है। इस म्यूजियम की सबसे खास बात यह होगी कि, यहां देश-विदेश के प्रमुख और ऐतिहासिक मंदिरों के आर्किटेक्ट मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके साथ ही इन मंदिरों के इतिहास, धार्मिक महत्ता, निर्माण शैली और उनकी विविध विशेषताओं को भी बेहद बारीकी से चित्रित किया जाएगा। म्यूजियम में दुर्लभ धार्मिक और ऐतिहासिक सामग्री का भी विशाल संग्रह देखने को मिलेगा, जो आम तौर पर एक ही जगह पर उपलब्ध नहीं होता।

इसके अलावा, म्यूजियम में आधुनिक तकनीक के जरिए विजुअल प्रेजेंटेशन की भी व्यवस्था की जाएगी, ताकि आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को मंदिरों की भव्यता और उनकी सांस्कृतिक विरासत को बेहद रोचक और आकर्षक तरीके से समझाया जा सके।
योजना के मुताबिक, देश के विभिन्न प्रांतों के लिए अलग-अलग गैलरी भी तैयार की जाएंगी, जिनमें उस-उस क्षेत्र के प्रमुख और प्रसिद्ध मंदिरों को खास तौर पर दर्शाया जाएगा। इस तरह से यह म्यूजियम पूरे भारत की मंदिर स्थापत्य कला और धार्मिक विविधता को एक ही छत के नीचे समेटने का प्रयास करेगा।
अक्टूबर से शुरू होगा निर्माण
जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि, प्रशासन की तरफ से पर्यटन विभाग को जमीन पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि, इस साल अक्टूबर महीने से इस भव्य परियोजना का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और देश की प्रतिष्ठित औद्योगिक कंपनी टाटा ऐंड संस प्राइवेट लिमिटेड के बीच पहले ही एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।
यह परियोजना अयोध्या में अब तक की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में गिनी जा रही है। इस म्यूजियम के जरिए देश और दुनिया भर के मंदिरों के इतिहास से लेकर उनकी डिजाइन, निर्माण तकनीक और धार्मिक महत्व तक का संपूर्ण और विस्तृत चित्रण प्रस्तुत किया जाएगा। अनुमान है कि, इस पूरे म्यूजियम को अच्छी तरह से देखने और विभिन्न शैलियों के मंदिरों की जानकारी हासिल करने में किसी भी आगंतुक को करीब तीन घंटे का समय लगेगा, जिससे इसकी भव्यता और विशालता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
90 साल की लीज पर मिलेगी जमीन
इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर एक और महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि, इसका निर्माण टाटा कंपनी द्वारा नॉट फॉर प्रॉफिट स्पेशल परपज व्हीकल (SPV) के तहत किया जाएगा। इसके लिए कंपनी अपने कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) फंड का इस्तेमाल करेगी, यानी यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी के तहत तैयार किया जा रहा है।इस परियोजना के लिए सरकार ने बेहद रियायती दर पर जमीन उपलब्ध कराई है।
जानकारी के मुताबिक, सरकार ने महज 1 रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से पूरे 90 वर्षों के लिए यह जमीन लीज पर दी है, जो इस बात को दर्शाता है कि सरकार इस परियोजना को कितनी प्राथमिकता दे रही है।
अब दिल्ली में भी होगी फिल्मी कलाकारों की रामलीला
अयोध्या से जुड़ी एक और दिलचस्प खबर सामने आई है। पिछले सात वर्षों से दशहरे के मौके पर अयोध्या में आयोजित होने वाली फिल्मी कलाकारों की रामलीला इस बार पहली बार दिल्ली में भी आयोजित की जाएगी।

रामलीला समिति के अध्यक्ष सुभाष मलिक ने इस बदलाव के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि, पिछले कुछ समय से इस आयोजन को लेकर कई तरह की दिक्कतें सामने आ रही थीं, जिन्हें देखते हुए यह फैसला लिया गया है कि, इस बार रामलीला का मंचन पहले 10 से 20 अक्टूबर तक दिल्ली में किया जाएगा, जबकि अयोध्या में इसका आयोजन 15 से 25 जनवरी के बीच होगा।
रामलीला के लिए तय हुए कलाकारों के नाम
समिति के अध्यक्ष ने आगे बताया कि, हर साल दशहरे के मौके पर राम कथा पार्क समेत अयोध्या के अन्य प्रमुख स्थानों पर रामलीला के साथ-साथ कई अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होता है। ऐसे में एक साथ इतने सारे आयोजनों के लिए उपयुक्त जगह मिलने में काफी दिक्कतें आती हैं। इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों के दौरान अचानक आई आंधी और बारिश की वजह से रामलीला के मंच और पूरे सेटअप को भारी नुकसान भी उठाना पड़ा है। इन्हीं सब कारणों को ध्यान में रखते हुए इस बार आयोजन स्थल में बदलाव करने का निर्णय लिया गया।
रामलीला में इस बार किन कलाकारों को कौन सी भूमिका निभानी है, इसे लेकर भी अंतिम फैसला हो चुका है। जानकारी के अनुसार, भगवान शिव की भूमिका में जाने-माने अभिनेता बिंदू दारा सिंह नजर आएंगे, जबकि राजा जनक की भूमिका मशहूर अभिनेता राकेश बेदी निभाते दिखेंगे। वहीं लंकापति रावण की भूमिका में अभिनेता अरुण बक्शी दर्शकों के सामने आएंगे। इन दिग्गज कलाकारों की मौजूदगी से इस साल की रामलीला और भी खास और यादगार बनने की उम्मीद जताई जा रही है।
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