
काठमांडू। नेपाल के पहाड़ी जिले रसुवा में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 8 लोगों के मारे जाने की खबर मिली है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ ने नदी किनारे बसे इलाकों और बुनियादी ढांचे को बुरी तरह तबाह कर दिया है। इस आपदा का असर अब सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में भी हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
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रसुवा में खौफनाक मंजर
रसुवा के चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर नरेंद्र परियार ने बताया कि, बुधवार सुबह करीब 9:15 बजे तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में अचानक बड़ी मात्रा में पानी आने की सूचना मिली थी, जिसके बाद टिमुरे बाजार और आसपास के इलाकों में हालात तेजी से बिगड़ गए। तेज पानी के प्रवाह से कई घर, वाहन और अन्य संपत्तियां बुरी तरह प्रभावित हुईं।

हालात की गंभीरता को देखते हुए नेपाली सेना, आर्म्ड पुलिस फोर्स और नेपाल पुलिस ने तत्काल राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया। खोज और बचाव अभियान के लिए 14 हेलीकॉप्टर भी लगाए गए हैं। सबसे चिंताजनक खबर नेपाल-चीन सीमा के पास स्थित तिमुरे इलाके से आई है, जहां तैनात आर्म्ड पुलिस फोर्स के 9 जवान भी लापता बताए जा रहे हैं।
उत्तरगया ग्रामीण नगरपालिका की डिप्टी चेयरपर्सन चमेली गुरुंग के अनुसार, इस बाढ़ से करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं, जिनमें स्याफ्रुबेसी, बेत्रावती, मैलुंग, सल्लेतार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खालती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बत्तार जैसे इलाके शामिल हैं। नुवाकोट जिले की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है, जहां कई गांव पूरी तरह तबाह हो चुके हैं।
पानी का बहाव इतना तेज था कि, कई घर ताश के पत्तों की तरह ढहकर बह गए और अपने साथ कई लोगों को बहा ले गए। बेबस परिवार अब मलबे और कीचड़ में अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में बड़ी संख्या में लोगों के बहने की आशंका जताई गई है।
चीन से कटा संपर्क
बाढ़ के कारण बेत्रावती से रसुवागढ़ी बॉर्डर तक करीब 42 किलोमीटर लंबी सड़क को कई जगह भारी नुकसान पहुंचा है और कई कंक्रीट पुल भी बह गए हैं। नेपाल रोड डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर जनरल और प्रवक्ता शुभराज नेउपाने का कहना है कि, बाढ़ के तेज बहाव ने कई जगहों पर सड़क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया, क्योंकि यह सड़क भोटेकोशी नदी के किनारे-किनारे बनी हुई है और बार-बार क्षतिग्रस्त होती रही है।
Nepal has been addressing the legitimate security concerns of our neighbors. However, it must be said with sadness that our northern neighbor has significantly undermined us. By failing to provide early warning of such a massive disaster, we suffered immense loss of human life.
— Parshuram Kaphle 🇳🇵 (@journoprk) August 26, 2026
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल-चीन को जोड़ने वाला प्रमुख फ्रेंडशिप ब्रिज (मितेरी पुल) भी इस बाढ़ में पूरी तरह बह गया है। रसुवागढ़ी सीमा चौकी और तिमुरे सीमा शुल्क कार्यालय क्षेत्र भी बाढ़ की चपेट में आ गए, जिससे चीनी सामानों से भरे कई कंटेनर और वाहन पानी में बह गए और दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गईं।
चीन की मंशा पर उठे सवाल
इस भयावह आपदा के बाद नेपाल में चीन की भूमिका को लेकर सवालों उठाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने चीन पर आरोप लगाया है कि, उसने तिब्बत से आ रही इस विनाशकारी बाढ़ की जानकारी समय रहते नेपाल के साथ साझा नहीं की।
नेपाल के विदेश मामलों के जाने-माने पत्रकार परशुराम काफ्ले ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि उत्तरी पड़ोसी देश ने इस बार नेपाल को भारी नुकसान पहुंचाया है, क्योंकि इतनी बड़ी आपदा की पूर्व चेतावनी न मिलने के कारण नेपाल को जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने संबंधित अधिकारियों को तिब्बत सीमा पर तत्काल खोज, बचाव और राहत अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं।
बिहार-यूपी में हाई अलर्ट जारी
नेपाल में मची इस तबाही के बाद भारत में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। नेपाल-चीन सीमा के पास त्रिशूली नदी में अचानक बढ़े जलस्तर के बाद गंडक नदी में बाढ़ की लहर आने की आशंका जताई गई है, जिसके चलते बिहार और उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से लगे इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है। खास तौर पर गंडक और कोसी जैसी नदियों के जलस्तर पर करीबी नजर रखने की सलाह दी गई है और बाढ़ के खतरे को देखते हुए छह जिलों में अलर्ट जारी किया गया है।
नेपाल चीन सिमाकाे रसुवागढी नाकामा देखिएकाे भिषण बाढी, कति डरलाग्दाे हाे । pic.twitter.com/pVpiVwdpRG
— Prakash Timalsina (@prakashujyalo) August 26, 2026
अधिकारियों को संभावित बाढ़ की स्थिति में समय रहते एहतियाती कदम उठाने और गंडक बैराज के गेट इस तरह संचालित करने को कहा गया है, ताकि अचानक आने वाले अतिरिक्त पानी को सुरक्षित तरीके से आगे निकाला जा सके। सशस्त्र सीमा बल (SSB) की टीमें भी अलर्ट पर हैं और स्टैंडबाय मोड में रखी गई हैं।
त्रिशूली नदी में GLOF की आशंका
नेपाल के फुर्के खोला इलाके में त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो भारत-नेपाल सीमा से करीब 160 किलोमीटर दूर है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नेपाल-चीन सीमा के पास संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF गतिविधि के कारण नदी में अचानक पानी बढ़ने की आशंका है। बाढ़ की यह लहर नीचे की तरफ बढ़ते हुए गंडक नदी में पहुंच सकती है, हालांकि रास्ते में इसके पीक फ्लो में कमी आने की संभावना जताई गई है। इसके बावजूद बिहार के सीमावर्ती और निचले इलाकों के लिए स्थिति को गंभीरता से लिया जा रहा है।
गंडक-कोसी बेसिन के जिलों पर विशेष निगरानी
नेपाल में फ्लैश फ्लड के खतरे को देखते हुए बिहार में गंडक और कोसी नदी बेसिन से जुड़े जिलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। गंडक बेसिन में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण और वैशाली जिले आते हैं। वहीं कोसी बेसिन में सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और अररिया जिले शामिल हैं। अधिकारियों को तटबंधों, नदी के जलस्तर और संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने को कहा गया है।

राज्य के आधिकारिक फ्लड फोरकास्ट सिस्टम में 23 अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक कोसी, गंडक, गंगा समेत कई नदियों के अलग-अलग गेज स्टेशनों पर जलस्तर पहले से ही चेतावनी या खतरे के निशान के आसपास दर्ज किया गया था। ऐसे में नेपाल से आने वाला अतिरिक्त पानी हालात को और चुनौतीपूर्ण बना सकता है।
SSB ने भी तेज की तैयारियां
भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। एसएसबी ने तत्काल राहत और बचाव अभियान के लिए 11 रेस्क्यू एंड रिलीफ टीमों (RRT) को अलर्ट किया है, जबकि 7 अतिरिक्त टीमें स्टैंडबाय पर रखी गई हैं। सीमा पर तैनात बटालियनों को हालात पर लगातार नजर रखने और स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं।
यह अलर्ट कोसी और नारायणी नदी बेसिन में बढ़ते जलप्रवाह के अनुमान और नेपाल की छोटी नदियों में अचानक बाढ़ की आशंका के बीच जारी किया गया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में घाघरा/कर्णाली और महाकाली नदी से जुड़े संवेदनशील जिलों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।
फिलहाल नेपाल में युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान जारी है, वहीं भारत में प्रशासन नेपाल से मिलने वाली हर सूचना को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय स्तर पर तुरंत कदम उठाने की तैयारी में जुटा है। दोनों देशों में हालात पर लगातार नजर बनी हुई है और नुकसान का पूरा आकलन अभी किया जा रहा है।
वहीं अब भोटेकोशी के रास्ते नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ के पीछे की असली वजह भी सामने आने लगी है। इस तबाही का स्रोत लांगटांग लिरुंग हिमालय के उत्तरी क्षेत्र में पाया गया है। चीनी वैज्ञानिकों के हालिया विश्लेषण के अनुसार, बुधवार सुबह इसी पर्वत के उत्तरी क्षेत्र में एक बड़ा हिमस्खलन हुआ था, जिसे इस पूरी आपदा की जड़ माना जा रहा है।
चीन में रहने वाले नेपाली हिमनद विज्ञानी मोहन बहादुर चंद ने इस बारे में बताया कि, उस इलाके में पहाड़ की ढलान से एक बहुत बड़ा हिमस्खलन गिरता हुआ देखा गया था। उन्होंने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरी घटना के सटीक और विस्तृत विवरण जुटाने के प्रयास अभी भी जारी हैं। आने वाले दिनों में इस बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि, इसी हिमस्खलन ने तिब्बत में बहने वाली लेंडे नदी के मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया, जिसके बाद वहां भारी मात्रा में पानी जमा होता गया और अंततः यही स्थिति भीषण बाढ़ का कारण बनी। बताया जा रहा है कि यह बाढ़ आगे नेपाल में भोटेकोशी नदी के रास्ते होते हुए त्रिशूली नदी में जा मिली, जिसके चलते इसका असर इतने बड़े स्तर पर देखने को मिला।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर एक और चिंताजनक बात सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हिमस्खलन वाले स्थान पर अभी भी एक गहरी झील जैसा गड्ढा मौजूद है, और चूंकि उसमें लगातार पानी जमा होता जा रहा है, इसलिए आने वाले समय में एक और बड़ी बाढ़ आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इस स्थिति ने प्रशासन और स्थानीय निवासियों दोनों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
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