नेपाल में तेज हुई हिंदू राष्ट्र बनने की मांग, भारत की सीमा से सटे इलाकों में पहुंचा तनाव, चौकसी बढ़ी

काठमांडू। नेपाल में एक बार फिर देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग ज़ोर पकड़ती दिख रही है। यह आंदोलन शुरुआत में पहाड़ी इलाकों तक ही सीमित था, लेकिन अब इसकी आवाज़ भारत की सीमा से सटे मधेस और तराई क्षेत्र में गूंजने लगी है। हाल ही में मधेस में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद इस मांग ने और ज़ोर पकड़ लिया है। इसी महीने की शुरुआत में नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग और एक हिंदूवादी संगठन के बीच हुई मुलाकात के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है। हालात को देखते हुए भारत की ओर से भी सतर्कता बरती जा रही है और उत्तर प्रदेश तथा बिहार से लगती नेपाल सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

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धार्मिक जुलूस के दौरान भड़की हिंसा

मामले की शुरुआत भारतीय सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज क्षेत्र से हुई, जहां 26 जुलाई को एक धार्मिक जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हो गई थी। देखते ही देखते यह हिंसा मधेस के अन्य जिलों तक फैल गई।

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हालात बिगड़ते देख नेपाल सरकार को स्थिति संभालने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ सेना भी तैनात करनी पड़ी। इस दौरान हुई झड़पों में तीन प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, जिसके बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया।

गृह मंत्री और हिंदू संगठनों के बीच बैठक ने पकड़ा तूल

हिंसा के बाद नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग प्रभावित इलाकों के दौरे पर निकले और स्थानीय लोगों के साथ-साथ पीड़ितों से भी मुलाकात की। इसी दौरे के दौरान हिंदू सम्राट सेना नामक संगठन के साथ उनकी बैठक चर्चा का विषय बन गई। नेपाली मीडिया में छपी शुरुआती खबरों के मुताबिक, इस बैठक में गृह मंत्री और हिंदू संगठन के प्रतिनिधियों के बीच 13 सूत्रीय प्रस्ताव पर बातचीत हुई, जिसमें नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित करने के मुद्दे पर विचार करने की बात भी शामिल थी।

इस बैठक के सामने आने के बाद सवाल उठने लगे कि, क्या गृह मंत्री के पास इतने संवेदनशील विषय पर सीधे बातचीत करने का अधिकार भी है। हालांकि, बाद में बैठक में मौजूद अधिकारियों ने किसी तरह के औपचारिक समझौते से इनकार किया। नेपाली मीडिया संस्थान कांतिपुर से बातचीत में एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि, यह बैठक किसी समझौते के लिए नहीं बल्कि संगठन को अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने का एक अवसर भर थी।

सामने आई ज्ञापन की प्रति

इसके बाद 2 अगस्त की सुबह एक और घटनाक्रम में गृह मंत्री सुदन गुरुंग को सौंपे गए एक ज्ञापन की प्रति सार्वजनिक हुई, जिसमें हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग साफ तौर पर दर्ज थी। यह ज्ञापन संयुक्त हिंदू मोर्चा नामक संगठन की तरफ सौंपा गया था। ज्ञापन में मांग की गई है कि, नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र के रूप में बहाल करने के मुद्दे पर चर्चा के लिए अगले तीन महीने के भीतर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, साथ ही इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक तय समय-सीमा भी निर्धारित की जाए।

एक मंच पर आए 15 से अधिक हिंदूवादी संगठन

गौर करने वाली बात यह है कि, यह मांग ऐसे वक्त पर सामने आई है, जब नेपाल सरकार पहले से ही तनाव को शांत करने के लिए विभिन्न पक्षों से बातचीत करने में जुटी है, लेकिन सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद विरोध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। संयुक्त हिंदू मोर्चा, हिंदू सम्राट सेना, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और हिंदू युवा संघ समेत नेपाल के 15 से ज़्यादा हिंदूवादी संगठन अब एक साझा मंच पर आ चुके हैं। ये सभी संगठन लगातार बैठकें और जनसंपर्क अभियान चलाकर एक सुनियोजित रणनीति के तहत आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं।

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इन संगठनों का साफ कहना है कि, यह मुद्दा अब किसी एक इलाके या जिले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे नेपाल का राष्ट्रीय विषय बन चुका है। संगठनों की मांग है कि, 2015 में लागू हुए संविधान में देश को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और नेपाल को उसकी पुरानी पहचान, यानी हिंदू राष्ट्र का दर्जा फिर से लौटाया जाए।

गौरतलब है कि, साल 2008 में राजशाही की समाप्ति के बाद नेपाल को धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित किया गया था, इससे पहले सदियों तक यह दुनिया का इकलौता हिंदू राष्ट्र माना जाता था।

भारतीय सीमा पर बढ़ी चौकसी

मधेस में भड़की हिंसा और उसके बाद हिंदू राष्ट्र की मांग तेज होने के घटनाक्रम का सीधा असर भारत-नेपाल सीमा पर भी देखने को मिल रहा है। चूंकि मधेस और तराई का इलाका सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा से जुड़ा है, इसलिए किसी भी तरह की अस्थिरता या तनाव का असर सीमा पार भी पड़ने की आशंका को देखते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है।

सीमावर्ती इलाकों में गश्त तेज़ कर दी गई है और स्थानीय प्रशासन को स्थिति पर लगातार नज़र बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। राजनयिक जानकारों का मानना है कि, नेपाल में उठ रही यह मांग आने वाले दिनों में वहां की राजनीति और भारत-नेपाल संबंधों दोनों के लिए अहम साबित हो सकती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि नेपाल सरकार इस बढ़ते दबाव और मधेस में बने तनावपूर्ण माहौल को किस तरह संभालती है, और क्या आने वाले दिनों में सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने की मांग पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।

 

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