पीओके में फिर उबाल: सुरक्षा बल बढ़े तो ‘बाहरी हमला’ मानेंगे, JAAC का ऐलान

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में एक बार फिर उथल-पुथल मच गई है। जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैनर तले जुटे हजारों स्थानीय लोगों ने स्पष्ट कर दिया है कि, वे असीम मुनीर और शहबाज शरीफ के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे। स्थानीय नेताओं ने पाकिस्तानी सेना और सरकार को चेतावनी दी है कि, या तो वे इलाके से दूर रहें या फिर नतीजे भुगतने को तैयार रहें। इस चेतावनी के बाद पीओके में टकराव बढ़ने की आशंका फिर से बढ़ गई है। बता दें कि, यह इलाका इस साल जून से ही अशांति और हिंसा की चपेट में है। स्थानीय लोग पाकिस्तान के विरोध में सड़क पर खुला प्रदर्शन कर रहे हैं।

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पाकिस्तान को माना बाहरी

JAAC के नेता सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने लोगों से पाकिस्तान को अब बाहरी खतरे की तरह देखने की अपील की है। एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान पीओके में और ज्यादा सुरक्षा बल तैनात करता है, तो इसे उनके इलाके पर बाहरी हमला माना जाएगा और उससे उसी तरह निपटा जाएगा।

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उमर नजीर का यह बयान इस लिहाज से अहम माना जा रहा है कि इसमें आंदोलनकारियों ने पहली बार पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की मौजूदगी को सीधे तौर पर बाहरी बताया है। इससे संकेत मिलता है कि, स्थानीय नेतृत्व अब पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते को नए सिरे से परिभाषित करने के मूड में है।

पाकिस्तानी सरकार और सेना का दखल बर्दाश्त नहीं

JAAC के एक और नेता सरदार अमन खान ने इस्लामाबाद को सीधे शब्दों में चेताया है। उनका कहना है कि, पीओके में दशकों से चला आ रहा पाकिस्तान का शासन अब खत्म होने वाला है और स्थानीय लोग पाकिस्तानी सरकार और सेना का दखल अब बर्दाश्त नहीं करेंगे।

मुनीर और शरीफ को चेताते हुए एक एक्सपर्ट ने यह भी कहा कि, पीओके में हालात जिस तरह बन रहे हैं, उनमें जल्द ही पाकिस्तानी नेताओं को इस इलाके में घुसने के लिए वीजा की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, यह किसी आधिकारिक फैसले के बजाय चेतावनी और आकलन के रूप में सामने आई बात है, लेकिन इसे प्रदर्शनकारियों के बढ़ते आक्रोश का प्रतीक माना जा रहा है।

दमन की कोशिश पड़ी उलटी

पीओके से लगातार सामने आ रहे वीडियो और तस्वीरें इलाके में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ तेज होते विरोध की तस्वीर पेश कर रही हैं। पाकिस्तान ने आंदोलन को दबाने के लिए JAAC पर प्रतिबंध लगाया और इसके कई नेताओं को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन यह दांव उल्टा पड़ गया, आन्दोलन और ज्यादा तेज हो गया। बीते कुछ हफ्तों में लोगों का गुस्सा कम होने के बजाय और बढ़ा है और विरोध की आवाज और बुलंद हुई है।

न्यूयॉर्क तक पहुंची आंच

पीओके का मामला अब सिर्फ यही तक सीमित नहीं रहा। कश्मीरी समुदाय के लोग इस मुद्दे को अमेरिका तक ले गए हैं। हाल ही में यूएन जनरल असेंबली वीक के दौरान न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में कश्मीरी जुटे और उन्होंने पाकिस्तानी सेना व सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

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प्रदर्शनकारियों ने पीओके में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगाते हुए मामले की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की। उनका आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सरकारी अधिकारियों ने न सिर्फ प्रदर्शनकारियों, बल्कि बच्चों और महिलाओं को भी परेशान करते हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि, ऐसे हालात में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि दोषियों की जवाबदेही तय की जा सके।

पांच महीने से है पीओके में अशांति

पीओके में अशांति का यह दौर करीब पांच महीने से चल रहा है। जून में पीओके विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों और महंगाई के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। शुरुआत में ये प्रदर्शन आर्थिक और स्थानीय प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को लेकर था, लेकिन वक्त के साथ इनका दायरा बढ़ता गया और अब स्थानीय लोगों की मांग महंगाई जैसे मुद्दों से आगे बढ़कर आजादी तक पहुंच गई है।

मौजूदा हालात में प्रदर्शनकारी पाकिस्तान से आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। एक तरफ JAAC के नेता सेना की और तैनाती को हमला मानने की बात कह रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ पाकिस्तानी सरकार और सेना के सामने इस आंदोलन से निपटने की चुनौती गहराती जा रही है।

 गहराई टकराव की आशंका

फिलहाल, पाकिस्तान सरकार की ओर से JAAC नेताओं के इन ताजा बयानों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि इस्लामाबाद इस बढ़ते असंतोष से बातचीत के जरिए निपटता है या सख्ती का रास्ता अपनाता है। सख्ती की स्थिति में पीओके में टकराव और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

 

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