
नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में इन दिनों एक बड़ा सियासी भूचाल आता हुआ नजर आ रहा है। खबर आ रही है कि, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) का विलय कांग्रेस में होने जा रहा है। बताया जा रहा है कि, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कांग्रेस के इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही हैं हालांकि, उनके भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी ने इसके लिए राहुल गांधी के सामने कुछ महत्वपूर्ण शर्तें रख दी हैं। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में टीएमसी के अंदरूनी संकट और हालिया चुनावी परिणामों के बाद आया है, जहां पार्टी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।
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सोनिया ने दिया ऑफ़र
सूत्रों के हवाले से पता चल रहा है कि, कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने खुद ममता बनर्जी को फोन कर ऑफर दिया है कि, टीएमसी का विलय कांग्रेस में कर दिया जाये। साथ ही ये वादा भी किया है कि, अगर ममता बनर्जी इस प्रस्ताव को मान लेती हैं, तो उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया जायेगा। साथ ही, उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को पार्टी महासचिव का पद देने की बात कही गई।

सोनिया गांधी ने ममता को समझाया कि, भाजपा के लगातार राजनीतिक हमलों को देखते हुए टीएमसी को कांग्रेस में विलय कर लेना चाहिए, अन्यथा पार्टी आम आदमी पार्टी (आप) की तरह परेशानियों का शिकार हो सकती है। ममता बनर्जी ने इस प्रस्ताव पर तुरंत फैसला नहीं लिया और कुछ दिनों का समय मांगा। पार्टी के अंदरूनी कलह, अभिषेक बनर्जी के खिलाफ असंतोष और भाजपा के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए ममता इस विलय को एक रणनीतिक कदम के रूप में देख रही हैं।
विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद बढ़ी मुश्किल
गौरतलब है कि, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में टीएमसी को करारी शिकस्त मिली है, जिसमें भाजपा ने करीब 200 सीटें जीतीं जबकि टीएमसी को मात्र 80-90 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। इस हार ने पार्टी में विद्रोह की आग भड़का दी और कई सांसद व नेता इस्तीफ़ा देने लगे हैं।
सकारात्मक दिशा ने आगे बढ़ रही बातचीत
ममता बनर्जी की सोनिया गांधी से मुलाकात के एक दिन बाद यानी बुधवार को अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की। इस बैठक में डेरेक ओ’ ब्रायन भी मौजूद रहे। सूत्रों का कहना है कि, अभिषेक ने विलय पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी के सामने कुछ स्पष्ट शर्तें रखीं हैं। जैसे कि, विलय के बाद ममता बनर्जी को राज्यसभा सदस्य बनाया जाए।

साथ ही, उन्हें राज्यसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया जाए, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर उनकी भूमिका मजबूत हो। अभिषेक बनर्जी को महासचिव पद मिले, हालांकि इसकी पुष्टि हो चुकी है कि, पार्टी में उन्हें महासचिव का मिलेगा। विलय के बाद बंगाल कांग्रेस इकाई में टीएमसी नेताओं को उचित प्रतिनिधित्व और महत्वपूर्ण पद दिए जाएं।
अभिषेक बनर्जी के हाथ में फाइल लेकर बैठक से निकलने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं, जिससे अटकलें और तेज हुई हैं। कांग्रेस की तरफ से अभी इन शर्तों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
टीएमसी में बढ़ी कलह
उल्लेखनीय है कि, पश्चिम बंगाल में टीएमसी लंबे समय से सत्ता में है, लेकिन हाल के वर्षों में पार्टी में अंदरूनी कलह बढ़ गई है। ममता बनर्जी के नेतृत्व को तानाशाही बताया जा रहा है। अभिषेक बनर्जी को पार्टी का उत्तराधिकारी माना जाता है, लेकिन कई वरिष्ठ नेताओं में उनके खिलाफ नाराजगी है। हाल ही में अभिषेक पर कथित हमले की घटना भी सामने आई, जिसमें अस्पतालों द्वारा भर्ती न करने के आरोप लगे।
भाजपा ने टीएमसी पर भ्रष्टाचार, कट मनी और तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप लगाते हुए लगातार हमले किए हैं। 2026 के चुनाव में मिली हार ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। करीब 20 टीएमसी सांसदों के विद्रोह की खबरें हैं, जो पार्टी के विभाजन की ओर इशारा कर रही हैं। ऐसे में कांग्रेस में विलय ममता के लिए एक सुरक्षित विकल्प बन सकता है।
बंगाल में कमजोर है कांग्रेस
कांग्रेस के लिए भी यह फायदेमंद साबित हो सकता है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का जनाधार कमजोर हो गया है, लेकिन टीएमसी के संगठन और ममता की लोकप्रियता ‘खासकर मुस्लिम और पिछड़े वर्गों में’ का फायदा उठाकर भाजपा के खिलाफ मजबूत विपक्ष तैयार किया जा सकता है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि, अगर ये विलय होता है, तो 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए विपक्षी एकता का बड़ा संदेश देगा। इंडिया गठबंधन पहले से ही कई दलों को साथ लाने की कोशिश कर रहा है। टीएमसी का विलय कांग्रेस को बंगाल में मजबूती देगा और ममता-राहुल की जोड़ी राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊर्जा ला सकती है। हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं। टीएमसी और कांग्रेस के बीच ऐतिहासिक दुश्मनी रही है।
हो सकता है विलय का विरोध
2011 में ममता ने वामपंथी सरकार को हराकर कांग्रेस का साथ छोड़ा था। कई कांग्रेस नेता टीएमसी के विलय का विरोध कर सकते हैं, क्योंकि इससे स्थानीय स्तर पर टिकट बंटवारे और पदों पर विवाद खड़ा हो सकता है। अभिषेक बनर्जी युवा और महत्वाकांक्षी नेता हैं। उन्हें महासचिव पद मिलने से कांग्रेस में नई पीढ़ी को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन ममता की राज्यसभा और नेता विपक्ष वाली मांग कांग्रेस की रणनीति को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि ये पद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लिए आरक्षित माने जाते हैं।
बदल जाएगी बंगाल की राजनीति
माना जा रहा है कि अगर टीएमसी का विलय कांग्रेस में होता है, तो पश्चिम बंगाल की राजनीति पूरी तरह बदल जाएगी। यहां भाजपा को एक मजबूत चुनौती मिलेगी। वहीं क्षेत्रीय दलों पर इसका असर पड़ेगा। इसके अलावा राष्ट्रीय राजनीति में ममता बनर्जी सक्रिय भूमिका में आ जाएंगी। फ़िलहाल अभी, दोनों पक्ष चुप्पी साधे हुए हैं। ममता ने कुछ दिन का समय मांगा है, जिसमें पार्टी के अंदरूनी कलह को सुलझाने और शर्तों पर अंतिम सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है।

अभिषेक-राहुल बैठक के बाद दिल्ली में सियासी हलचल बढ़ गई है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि, भारतीय राजनीति में सत्ता संरक्षण और रणनीतिक गठबंधन कितने महत्वपूर्ण हैं। ममता बनर्जी, जो कभी कांग्रेस की कट्टर विरोधी रहीं, आज उसी कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने पर विचार कर रही हैं। यह राजनीति की अनिश्चितता को रेखांकित करता है।
बैठक पर टिकी निगाहें
टीएमसी-कांग्रेस विलय की अटकलें अभी शुरुआती दौर में हैं। इस पर अंतिम फैसला तभी होगा जब दोनों तरफ की शर्तों और समझौतों पर सहमति बनेगी। पश्चिम बंगाल की जनता और पूरे देश की नजरें अब इन बैठकों के नतीजे पर टिकी हैं। अगर यह सौदा हो जाता है, तो 2029 के चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। फिलहाल, दोनों पार्टियां रणनीतिक चुप्पी बनाए हुए हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बात आगे बढ़ रही है।
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