
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए अपनी पार्टी की रणनीति को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है। राजधानी में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्षों के साथ बातचीत करते हुए बसपा प्रमुख ने यह साफ कर दिया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी प्रकार के भ्रम में नहीं है।
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अपने रुख पर अड़ी मायावती
मायावती ने घोषणा की कि महिला आरक्षण के समर्थन को लेकर बसपा का वही रुख है जो 15 अप्रैल को तय किया गया था और इसमें फिलहाल किसी भी प्रकार के बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है। उनका यह बयान उस समय आया है जब देश के विभिन्न राजनीतिक दल महिला आरक्षण के श्रेय को लेकर आपस में भिड़ रहे हैं। मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से हिदायत दी है कि, वे इस मुद्दे की गहराई को समझें और पार्टी की बैठकों के माध्यम से आम जनता तक सही जानकारी पहुंचाएं, ताकि विपक्षी दल बसपा के जनाधार को गुमराह न कर सकें।

बसपा सुप्रीमो ने अपने संबोधन में अनुशासन पर सबसे अधिक जोर दिया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि, पार्टी की पहचान एक अनुशासित संगठन की रही है और इसे हर हाल में बनाए रखना होगा। मायावती ने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को आगाह किया कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर या किसी भी अन्य राजनीतिक मुद्दे पर पार्टी के कार्यकर्ताओं को सड़कों पर उतरकर किसी भी तरह का धरना-प्रदर्शन या नारेबाजी नहीं करनी है।
अनुशासन में रहें बसपा कार्यकर्ता
उनका मानना है कि, बसपा की ताकत सड़कों के हंगामे में नहीं, बल्कि गांव-गांव और घर-घर जाकर किए जाने वाले कैडर कैंप में है। मायावती का यह निर्देश यह भी संकेत देता है कि, वह अपनी पार्टी को एक गंभीर और मर्यादित विकल्प के रूप में जनता के सामने पेश करना चाहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि, अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जो भी कार्यकर्ता या नेता पार्टी लाइन से बाहर जाकर कार्य करेगा, उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली के लिए प्रस्थान करने से पहले मायावती ने सोशल मीडिया के माध्यम से जो संदेश दिया, वह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं था, बल्कि भविष्य के लिए एक व्यापक रोडमैप था। उन्होंने याद दिलाया कि 31 मार्च को लखनऊ में जो प्रदेश स्तरीय बैठक हुई थी, उसमें संगठन को सशक्त बनाने और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने के जो निर्देश दिए गए थे, उन पर पूरी निष्ठा के साथ अमल करना अनिवार्य है।
सामजिक परिवर्तन पर जोर
मायावती ने कहा कि, बसपा के कार्यकर्ताओं को केवल चुनावी मोड में ही नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन को भी गति देनी चाहिए। उन्होंने आर्थिक मजबूती पर भी ध्यान केंद्रित करने की बात कही, क्योंकि एक मजबूत संगठन के लिए वित्तीय आत्मनिर्भरता भी उतनी ही आवश्यक है जितनी कि कार्यकर्ताओं का समर्पण।
इस दौरान मायावती ने उत्तर प्रदेश के विकास में बसपा के योगदान को लेकर एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने बहुत ही गर्व के साथ उन विकास परियोजनाओं का जिक्र किया जो आज उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुकी हैं। मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आज जितने भी एक्सप्रेसवे और बड़े बुनियादी ढांचे दिखाई दे रहे हैं, उनकी परिकल्पना और प्रारंभिक योजना बसपा के शासनकाल में ही तैयार की गई थी।
उन्होंने विशेष रूप से जेवर (नोएडा) में बन रहे इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि, इसकी फाइल और योजना को बसपा सरकार के समय ही अंतिम रूप दे दिया गया था। मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे जनता के बीच जाकर यह बताएं कि, आधुनिक उत्तर प्रदेश की नींव रखने का श्रेय केवल बसपा को जाता है, भले ही आज दूसरी पार्टियां उन योजनाओं का फीता काटकर वाहवाही लूट रही हों।
डोर टू डोर चले प्रचार अभियान
कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए मायावती ने कहा कि, उत्तर प्रदेश में विकास की गति बहुत पहले तेज हो गई होती, अगर उस समय केंद्र की सत्ता में बैठी कांग्रेस सरकार ने जातिवादी मानसिकता का परिचय न दिया होता। मायावती के अनुसार, बसपा सरकार के दौरान केंद्र सरकार ने विकास परियोजनाओं के लिए एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) और फंड जारी करने में जानबूझकर देरी की थी।
उन्होंने कहा कि, कांग्रेस की इस रुकावट भरी नीति के कारण प्रदेश की कई जनकल्याणकारी योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। मायावती का यह हमला यह भी संकेत देता है कि, वह आने वाले समय में दलित और पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को यह समझाना चाहती हैं कि कांग्रेस ने हमेशा से ही एक दलित महिला के नेतृत्व वाली सरकार के रास्ते में कांटे बिछाए हैं।
विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर मायावती ने कहा कि अब समय आ गया है कि, बसपा अपनी उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार डोर-टू-डोर अभियान के माध्यम से करे। उन्होंने कहा कि, उत्तर प्रदेश की जनता ने बसपा का वह स्वर्ण काल देखा है जब कानून का राज चलता था और प्रशासन में कोई भेदभाव नहीं होता था।
जमीनी स्तर पर काम करें कार्यकर्ता
उन्होंने पार्टी कैडर को निर्देश दिया कि वे लोगों को समझाएं कि बसपा की सरकार ही प्रदेश में सर्वजन सुखाय और सर्वजन हिताय की भावना के साथ न्याय कर सकती है। मायावती ने विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं को पार्टी से जोड़ने पर बल दिया और कहा कि संगठन के ऊंचे पदों पर उन लोगों को प्राथमिकता दी जाए जो समर्पित हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए काम कर रहे हैं।
विपक्षी खेमे में हलचल
मायावती का ये फैसला बताता है कि, वह एक बहुत ही शांत लेकिन प्रभावी रणनीति के साथ आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने महिला आरक्षण पर अपने स्टैंड को स्थिर रखकर अपनी वैचारिक मजबूती दिखाई है, तो वहीं अनुशासन के नाम पर कार्यकर्ताओं को नियंत्रित रखकर किसी भी अनावश्यक विवाद से बचने की कोशिश की है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मायावती का यह साइलेंट कैंपेन कितना कारगर होता है, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन उनके इस रुख ने विपक्षी खेमों में हलचल जरूर मचा दी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वह न तो हार मानने वाली हैं और न ही किसी दबाव में झुकने वाली हैं। बसपा के कार्यकर्ता अब इस नए जोश के साथ चुनावी मैदान में उतरने को तैयार हैं, जहां उनका मुख्य हथियार पार्टी का गौरवशाली इतिहास और विकास कार्य होंगे।
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