
शामली। उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक संपन्न जाट परिवार के युवक आयुष मलिक के कथित धर्म परिवर्तन और निकाह का मामला इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। करोड़ों रुपये की संपत्ति वाले परिवार से जुड़े इस मामले ने धार्मिक और सामाजिक दोनों स्तर पर तीखी बहस छेड़ दी है। पुलिस ने इस मामले में युवती चांदनी कुरैशी और उसके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
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मामला शहर के हनुमान टिल्ला क्षेत्र में स्थित भारत मेडिकल स्टोर के संचालक देवराज मलिक के परिवार से जुड़ा है। देवराज मलिक स्थानीय स्तर पर एक प्रतिष्ठित दवा व्यापारी हैं। उनके पुत्र आयुष मलिक पर आरोप है कि, उसे कई वर्ष पहले एक सुनियोजित साजिश के तहत प्रेम जाल में फंसाया गया। बाद में उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया और अंततः दिल्ली में निकाह भी करा दिया गया।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
पुलिस जांच और परिवार की शिकायत के अनुसार, आयुष मलिक और चांदनी कुरैशी की मुलाकात शहर के एक फिजियोथेरेपी सेंटर में हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। चांदनी का भाई आयुष के मेडिकल स्टोर पर काम करता था, जिससे दोनों परिवारों के बीच संपर्क और मजबूत हो गया।

जांच में सामने आया कि, आरोपी पक्ष ने आयुष को इस्लामिक विचारधारा से जुड़े वीडियो और भाषण दिखाकर उसका मन बदलने की कोशिश की। खासतौर पर पाकिस्तान के प्रसिद्ध इस्लामिक वक्ता डॉ. इसरार अहमद के भाषणों और वीडियो का आयुष पर गहरा प्रभाव पड़ा।
आरोप है कि, इसी क्रम में आयुष का धर्म परिवर्तन कराकर दिल्ली की एक मस्जिद में उसका निकाह चांदनी कुरैशी से करा दिया गया।परिवार का आरोप है कि, इस पूरे प्रकरण के पीछे आयुष की करोड़ों रुपये की संपत्ति का लालच भी काम कर रहा था। देवराज मलिक के पास शहर में मेडिकल स्टोर के अलावा काफी मात्रा में अचल संपत्ति है, जिसका फायदा उठाने की कोशिश की गई हो सकती है।
मौलवी की तलाश में जुटी पुलिस
शामली पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। पुलिस अधीक्षक एन.पी. सिंह ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। प्रारंभिक जांच में कई ठोस तथ्य सामने आने के बाद चांदनी कुरैशी और उसके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब अन्य फरार आरोपियों, कथित रूप से धर्म परिवर्तन कराने वाले लोगों और निकाह कराने वाले मौलवी की तलाश में जुटी हुई है।
पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, इस मामले में धर्मांतरण, कथित निकाह, संपत्ति के लालच और आपराधिक साजिश के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है, जो भी व्यक्ति इसमें शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्वामी यशवीर महाराज ने उठाया मुद्दा
मुजफ्फरनगर के योग साधना यशवीर आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर महाराज ने इस मामले को सार्वजनिक रूप से उठाया। उन्होंने इसे संगठित धर्मांतरण की साजिश बताया। स्वामी यशवीर महाराज ने आरोप लगाया कि चांदनी और उसका परिवार केवल आयुष तक सीमित नहीं थे, बल्कि अन्य युवकों को भी प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने प्रशासन से सभी आरोपियों, धर्म परिवर्तन कराने वालों और निकाह कराने वाले मौलवी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि अगर समय पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
पिता देवराज मलिक बोले- ‘हम आज भी हिन्दू हैं’
दूसरी ओर, आयुष के पिता देवराज मलिक ने साफ कहा है कि हम आज भी हिंदू हैं। उन्होंने बताया कि न तो उन्होंने और न ही उनका परिवार किसी भी प्रकार से धर्म परिवर्तन किया है। वे नियमित रूप से मंदिर जाते हैं, धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-पाठ करते हैं।

देवराज मलिक ने कहा कि उनका बेटा कुछ लोगों के प्रभाव में आ गया है। पूरा परिवार उसे वापस मुख्यधारा में लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होगी तथा सच्चाई सामने आएगी।
पहले भी आ चुके हैं धर्म परिवर्तन के केस
यह मामला केवल एक परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि बड़े स्तर पर प्रेम जाल, धर्मांतरण और संपत्ति हड़पने की साजिश से जुड़ा माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में ऐसे कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, जिनमें युवाओं को प्रेम के बहाने प्रभावित कर धर्म परिवर्तन कराया जाता है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या यह एक अकेला मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह काम कर रहा है।
न्यायिक हिरासत में हैं आरोपी
फिलहाल चांदनी कुरैशी और उसके पिता इस्लाम कुरैशी न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी और तकनीकी जांच दोनों तरीकों का इस्तेमाल कर रही है। देवराज मलिक परिवार का कहना है कि वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और अपने बेटे को वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
यह मामला शामली जिले के अलावा पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता और धार्मिक संगठन दोनों पक्षों पर नजर रखे हुए हैं। पुलिस की आगे की जांच से कई और तथ्य सामने आने की संभावना है। इस पूरे प्रकरण पर अंतिम फैसला अदालत करेगी, लेकिन फिलहाल यह मामला धार्मिक संवेदनशीलता और युवाओं की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ने वाला साबित हो रहा है।
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