
लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ में एक बार फिर से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यहां बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वर्तमान इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के गोमतीनगर स्थित आवास और कार्यालय पर बुधवार सुबह आयकर विभाग ने छापेमारी की कार्रवाई शुरू की। सुबह करीब 7 बजे 50 से अधिक अफसरों की टीम भारी पुलिस बल के साथ उनके आवास पर पहुंची और पूरे परिसर को घेर लिया। किसी भी व्यक्ति के अंदर-बाहर जाने पर रोक लगा दी गई है।
इसे भी पढ़ें-मेरी तरह आकाश आनंद के साथ भी खड़े रहें बसपा कार्यकर्ता : मायावती
आइसोलेशन में हैं विधायक

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब विधायक गंभीर कैंसर से पीड़ित हैं और इलाज के लिए आइसोलेशन में रह रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह छापा यूपी में अगले विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी दलों पर दबाव बढ़ाने की कोशिश हो सकती है। आयकर विभाग की टीम ने विपुल खंड स्थित उमाशंकर सिंह के आलीशान आवास और इससे कुछ दूरी पर स्थित उनके दफ्तर पर एक साथ दबिश दी। सूत्रों के अनुसार, टीम में 50 से ज्यादा अधिकारी शामिल हैं, जिनमें आयकर के उच्चाधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और अन्य स्टाफ शामिल हैं।
लखनऊ पुलिस ने भी सुरक्षा के लिए भारी फोर्स तैनात की है। गेट को अंदर से बंद कर दिया गया है और बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं। अफसर फाइलें, रिकॉर्ड बुक, कंप्यूटर, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की तलाशी ले रहे हैं। मुख्य फोकस वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, संपत्ति दस्तावेजों, निवेश और आय के स्रोतों पर है।
वित्तीय मामलों की हो रही जांच
सूत्र बता रहे हैं कि, विभाग कुछ वर्षों से विधायक के वित्तीय मामलों की जांच कर रहा था, जिसमें अचानक छापेमारी का फैसला लिया गया। आयकर विभाग की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन कार्रवाई जारी है।
उमाशंकर सिंह बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की थी, जो बसपा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। वर्तमान विधानसभा में बसपा का केवल यही एक विधायक बचा है, जिससे पार्टी के लिए उनकी भूमिका काफी अहम है। मायावती की अगुवाई वाली बसपा में वे काफी सक्रिय रहे हैं और पार्टी के विभिन्न संगठनात्मक कार्यों में शामिल रहे हैं।
विधायक गंभीर रूप से कैंसर से पीड़ित हैं। उनके दो बड़े ऑपरेशन हो चुके हैं और फिलहाल वे लखनऊ के इसी आवास पर आइसोलेशन में रहकर इलाज करा रहे हैं। छापेमारी के दौरान डॉक्टर और नर्स के आने-जाने पर भी अस्थायी रोक लगाए जाने की खबरें आईं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह स्थिति काफी संवेदनशील है, क्योंकि स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे से जुड़े होने के कारण कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति
यह छापेमारी यूपी की राजनीति में तूफान ला सकती है, खासकर जब अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती और अन्य विपक्षी नेताओं से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि, यह केंद्र सरकार की ओर से विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

पिछले कुछ महीनों में कई विपक्षी नेताओं के ठिकानों पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई हुई है। कुछ सूत्रों का कहना है कि जांच वित्तीय अनियमितताओं, अघोषित संपत्ति या अन्य लेन-देन से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, विभाग ने कोई आरोप स्पष्ट नहीं किया है। बसपा के इकलौते विधायक पर यह कार्रवाई पार्टी के लिए झटका मानी जा रही है, क्योंकि विधानसभा में उनकी मौजूदगी पार्टी की आवाज मजबूत करती है।
और गहरा सकती है जांच
आयकर विभाग की टीम पूरे दिन तलाशी जारी रख सकती है। यदि आवश्यक दस्तावेज या डिवाइस जब्त किए जाते हैं, तो आगे जांच और गहराई से होगी। विधायक के परिवार और सहयोगियों से भी पूछताछ हो सकती है। पुलिस की मौजूदगी से सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
यह घटना उत्तर प्रदेश में राजनीतिक और आर्थिक जांचों के बढ़ते ट्रेंड को दर्शाती है। पिछले वर्षों में कई विधायकों, मंत्रियों और नेताओं पर इसी तरह की कार्रवाई हुई है। फिलहाल, सभी की नजरें इस छापेमारी के नतीजों पर टिकी हैं – क्या कोई बड़ा खुलासा होगा या यह सामान्य जांच साबित होगी?
इसे भी पढ़ें- सीएम योगी, सपा प्रमुख अखिलेश और बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रधानमंत्री को दी बधाई



