
तेहरान। अमेरिका और इजरायल ने कुछ समय पहले ईरान पर सैकड़ों मिसाइलों से हमला किया था और दावा किया था कि, उन्होंने ईरानी सैन्य ताकत को पूरी तरह तबाह कर दिया है, लेकिन जैसे ही सीजफायर लागू हुआ ईरान ने बड़ी ही तेजी से अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से मजबूत कर लिया। ईरान की इस तेज रिकवरी को देखकर खुद इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के भी होश उड़ गये हैं।
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हैरान हुए अधिकारी
इजरायली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सेना और मोसाद, दोनों के ही वरिष्ठ अधिकारी ईरान की इस अप्रत्याशित रफ्तार को देख कर भौचक्के रह गये हैं। गौरतलब है कि, अपने हालिया हमलों में इजरायली सेना ने खासतौर पर ईरान के रक्षा उत्पादन क्षेत्र को निशाना बनाया था, ताकि उसकी हथियार बनाने की क्षमता को लंबे समय के लिए कमजोर किया जा सके। यह चौंकाने वाला खुलासा ऐसे नाजुक वक्त पर हुआ है, जब अमेरिका के पास पैट्रियट और थॉड जैसे एयर डिफेंस सिस्टम के लिए जरूरी इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार भी लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच चुका है।
ईरान ने तेजी से बढ़ाई सैन्य ताकत
प्रतिष्ठित इजरायली अखबार यरुशलम पोस्ट की एक रिपोर्ट में लिखा गया है कि, बीते दो वर्षों में यह दूसरा मौका है, जब इजरायली सेना और मोसाद, ईरान की सैन्य रिकवरी की रफ्तार देखकर हैरत में पड़ गए हैं। इससे पहले भी इजरायली सैन्य विशेषज्ञों ने बड़े दावे के साथ कहा था कि, उनके हमलों ने ईरानी सेना को कई वर्ष पीछे धकेल दिया है, लेकिन अब सामने आ रहे तथ्यों ने इजरायल के इस दावे की पोल खोलकर रख दी है।

मोसाद के अधिकारियों का कहना है कि, ईरान सिर्फ मिसाइल उत्पादन में ही नहीं, बल्कि अपनी सैन्य क्षमता के कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी दोबारा तेजी से मजबूत होता जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि, इससे पहले भी अक्टूबर 2024 और फिर जनवरी 2025 में ईरान ऐसी ही तेज रफ्तार से रिकवरी करते हुए देखा गया था, जिसने इजरायली सैन्य आकलनों को हर बार गलत साबित किया।
सवालों में इजराइल के दावे
अक्टूबर 2024 में इजरायल ने ईरान के कम से कम 20 अहम मिसाइल ठिकानों और सैन्य-औद्योगिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था। उस समय इजरायली सेना ने बड़े विश्वास के साथ दावा किया था कि इस हमले से ईरान की सैन्य क्षमता एक साल या उससे भी ज्यादा समय के लिए पीछे चली गई है। हालांकि, हकीकत में साल 2025 आते-आते ईरानी सेना एक बार फिर उतनी ही ताकतवर हो गई, जितनी वह हमले से पहले थी।
इसके बाद 2025 में इजरायल ने एक और बड़ा हमला करते हुए ईरान के 100 से अधिक मिसाइल और सैन्य-औद्योगिक ठिकानों को निशाना बनाया और फिर से यही दावा दोहराया कि ईरानी सैन्य क्षमता को कई वर्षों पीछे धकेल दिया गया है, लेकिन ताजा रिपोर्टें बताती हैं कि ईरान इस बार भी बेहद तेज गति से अपनी सैन्य ताकत को फिर से खड़ा कर रहा है, जिसने इजरायल के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
2500 के पार पहुंची मिसाइलों की संख्या
रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला आंकड़ा भी सामने आया है। बताया गया है कि जून 2025 में ईरान के पास करीब 1300 मिसाइलें मौजूद थीं, जो इस साल फरवरी महीने तक बढ़कर 2500 से अधिक हो चुकी हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह उछाल ऐसे समय में देखा गया है, जब अमेरिका और इजरायल दोनों ने ही यह दावा किया था कि 40 दिनों तक चली लड़ाई में उन्होंने अपने सैन्य लक्ष्य पूरी तरह हासिल कर लिए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी अमेरिकी प्रशासन पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली और उनके आकलनों पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए मौजूदा हालात के लिए अमेरिकी खुफिया तंत्र की गलतियों को जिम्मेदार बताया है।
अराघची का अमेरिका पर तीखा हमला
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि अमेरिका लंबे समय से खुफिया जानकारी से जुड़ी गंभीर चूकों के चलते गलत रणनीतिक आकलन करता आया है और ईरान के खिलाफ हाल में छेड़ा गया युद्ध इसका एक ताजा उदाहरण है।

उन्होंने आगे यह भी आरोप लगाया कि, अब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी अमेरिका उससे भी बड़ी गलत गणना कर रहा है। अराघची ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि फर्जी खबरों से भी कहीं ज्यादा खतरनाक चीज फर्जी खुफिया जानकारी होती है, इसलिए सावधान रहने की जरूरत है। अपने पोस्ट के आखिर में उन्होंने धार्मिक आस्था का हवाला देते हुए लिखा कि, अल्लाह सबसे महान है और धरती की किसी भी शक्ति से बड़ा है, और उन्हें अल्लाह पर पूरा भरोसा है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ रहा टकराव
विशेषज्ञों का मानना है कि अराघची की यह टिप्पणी सीधे तौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका के नियंत्रण संबंधी दावों की प्रतिक्रिया में आई है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिहाज से बेहद रणनीतिक महत्व रखता है और अमेरिका लगातार इस पर अपने नियंत्रण की बात दोहराता रहा है, जबकि ईरान हर बार इस दावे को सिरे से खारिज करता आया है।
इसी कड़ी में बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सार्वजनिक तौर पर यह दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर अब अमेरिका का ‘पूरा नियंत्रण’ स्थापित हो चुका है। ट्रंप के इस बयान से साफ संकेत मिलते हैं कि वॉशिंगटन इस अहम और संवेदनशील समुद्री मार्ग पर अपनी रणनीतिक पकड़ बनाए रखने के इरादे रखता है, जो आने वाले समय में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है।
ईरान की तेज सैन्य रिकवरी और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ता विवाद, दोनों ही इस बात के संकेत हैं कि मध्य-पूर्व में शांति अभी दूर की कौड़ी बनी हुई है और आने वाले दिनों में क्षेत्रीय तनाव और गहरा सकता है।
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