ईरान में तख्तापलट जैसे हालात? अब सेना तय करेगी सरकार की नीति, खामेनेई ने पजशकियान को दिखाई औकात

सुरक्षा मुद्दों पर कमांडर वाहिदी को मिली फैसले की ताकत

तेहरान।  एक तरफ ईरान भीषण युद्ध से जूझ रहा है, तो वहीं अब वहां की सत्ता के भीतर गहरी खींचतान की खबरें आ रही हैं। एक इजराइली समाचार चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को स्पष्ट कर दिया है कि, अब देश की सरकार सेना की रणनीति के मुताबिक ही चलेगी। इस रिपोर्ट ने ईरान की सिविल लीडरशिप और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच बढ़ती दूरी को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

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अहमद वाहिदी की राय को होगी अंतिम

रिपोर्ट के मुता,बिक, राष्ट्रीय सुरक्षा, अमेरिका के साथ जारी बातचीत और परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अब रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के वरिष्ठ कमांडर अहमद वाहिदी की राय को अंतिम माना जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि, इन अहम फैसलों में राष्ट्रपति पजशकियान की भूमिका काफी हद तक सीमित हो गई है। बताया जा रहा है कि, पजशकियान इससे पहले भी कई मौकों पर इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं।

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उनका कहना रहा है कि, उनकी सरकार को देश के बड़े रणनीतिक फैसलों से दूर रखा जा रहा है। अब सर्वोच्च नेता की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि, आगे की नीति सेना की सोच के अनुरूप ही तय होगी, जिससे पजशकियान की चेतावनी को भी अहमियत न मिलने के संकेत मिलते हैं।

गौरतलब है कि, इसी साल फरवरी में अमेरिका और इजराइल के हमलों से शुरू हुए संघर्ष में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की जान गई थी, जिसके बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई ने यह जिम्मेदारी संभाली, तभी से ईरान में सेना और सरकार के बीच अधिकारों को लेकर खींचतान की खबरें लगातार आती रही हैं।

पिछले 24 घंटे के पांच बड़े घटनाक्रम

अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित सीधी बातचीत को लेकर अब तक तारीख और स्थान तय नहीं हो सका है। पाकिस्तान और कतर को संभावित मेजबान देशों के रूप में देखा जा रहा है और दोनों देश मध्यस्थता की कोशिशों में जुटे हैं। वहीं एक अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी की रिपोर्ट बताती है कि, ईरान अब सीधे सैन्य टकराव के बजाय समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और अहम शिपिंग रूटों पर दबाव बनाकर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की आर्थिक लागत बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

अमेरिकी रीपर ड्रोन को मार गिराने का दावा

इसके अलावा IRGC ने दावा किया है कि, उसने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी रीपर ड्रोन को अपने एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया, हालांकि ड्रोन किस देश का था, इसकी पुष्टि नहीं की गई। दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने सैन्य विश्लेषकों से ईरान पर दबाव बढ़ाने के नए तरीके सुझाने को कहा है, जिसे विशेषज्ञ एक असामान्य कदम मान रहे हैं। इसी बीच यमन के हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद छह सऊदी सुपरटैंकरों ने अपना पारंपरिक समुद्री मार्ग बदलकर अफ्रीका के दक्षिणी छोर से लंबा रास्ता अपनाया है, जिससे क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

सऊदी क्राउन प्रिंस की एर्दोगन से बातचीत

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन से टेलीफोन पर बातचीत की, जिसमें रेड सी में हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर चर्चा हुई। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार एर्दोगन ने इन हमलों की निंदा करते हुए सऊदी नेतृत्व वाले बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा गठबंधन के प्रयासों का समर्थन किया।

 लंबी जंग का डर से परेशान खाड़ी देश

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को लेकर खाड़ी क्षेत्र के देशों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। एक अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक इन देशों को आशंका है कि यह टकराव किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने के बजाय लंबे समय तक खिंच सकता है। रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार ईरान को कड़ी चेतावनियां दे चुके हैं, लेकिन हर बार मध्यस्थ देशों की पहल पर दोनों पक्षों के बीच फिर बातचीत शुरू हो जाती है।

पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल

अमेरिका के एक पूर्व सैन्य जनरल ने आरोप लगाया है कि, पाकिस्तान और कतर, अमेरिका के बजाय ईरान का साथ ज्यादा दे रहे हैं। एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि, इन दोनों देशों की मध्यस्थता के चलते अमेरिका को ईरान के असली इरादे समझने में दिक्कत हो रही है।

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दिलचस्प बात यह है कि, जब ट्रंप ने ईरान के साथ जारी वार्ता का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के समर्थन की बात कही, तो उन्होंने अपने बयान में पाकिस्तान का कोई उल्लेख नहीं किया, जबकि हाल की कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान को भी संभावित मध्यस्थ बताया जा रहा था।

फिर बढ़ीं तेल की कीमतें

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर लगभग साढ़े चौरासी डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई, जबकि इससे पहले इसमें करीब सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी। अमेरिकी WTI क्रूड में भी मामूली बढ़त देखी गई, हालांकि पिछले कारोबारी सत्र में इसमें पांच प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय तनाव जब तक बना रहेगा, तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका है।

ईरान का अमेरिका से सीधी बातचीत से इनकार

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष बातचीत की खबरों को सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर उसकी बातचीत केवल ओमान के साथ चल रही है। इसी बीच खामेनेई के एक सैन्य सलाहकार ने दावा किया कि ईरानी सेना यूक्रेन के तीन ठिकानों पर हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार थी, लेकिन कीव की ओर से माफी मिलने पर आखिरी समय में यह कार्रवाई रोक दी गई।

समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंता

होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में एक मालवाहक जहाज पर हमले की भी खबर सामने आई है। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी के अनुसार ओमान के तटीय शहर खासाब से कुछ दूरी पर एक जहाज अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया, हालांकि हमलावर और नुकसान की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। एजेंसी ने क्षेत्र से गुजरने वाले सभी जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

 ईरान खेल रहा दोहरी चाल- ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया है कि ईरानी नेतृत्व दोहरी नीति अपना रहा है, निजी तौर पर बातचीत की इच्छा जताते हुए सार्वजनिक रूप से इससे इनकार कर रहा है। अपने सोशल मीडिया मंच पर लिखे संदेश में उन्होंने कहा कि होर्मुज जलमार्ग पर अमेरिकी नौसेना का पूरा नियंत्रण है और जब तक कोई ठोस समझौता या पूर्ण आत्मसमर्पण नहीं होता, यह स्थिति जारी रहेगी। कुल मिलाकर, ईरान की आंतरिक राजनीति और अमेरिका के साथ जारी तनाव, दोनों मोर्चों पर आने वाले दिन क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं।

 

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