
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। भारत की मेज़बानी में जयपुर में हुई ब्रिक्स देशों के उद्योग मंत्रियों की 10वीं बैठक गुरुवार को संपन्न हुई, जिसमें सभी सदस्य देशों ने औद्योगिक क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने और नवाचार को केंद्र में रखकर विकास की रणनीति तय करने वाले एक साझा घोषणापत्र को मंज़ूरी दी।
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भारत ने की 2026 की अध्यक्षता
गौरतलब है कि, भारत ने वर्ष 2026 की शुरुआत में ही ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता का दायित्व संभाल लिया था। इसी क्रम में आने वाले सितंबर महीने में नई दिल्ली में समूह का वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। संयोग से इसी वर्ष विदेश मंत्रियों की पहली बैठक की 20वीं वर्षगांठ भी पड़ रही है, जिससे इस साल की गतिविधियों को खास महत्व दिया जा रहा है।

मौजूदा वैश्विक हालात, खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव, को देखते हुए राजनयिक हलकों में इस साझा घोषणापत्र पर सभी सदस्य देशों की सहमति बनना भारत के लिए एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है।
ध्यान रहे कि, ब्रिक्स समूह में भारत के साथ-साथ ब्राज़ील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे संस्थापक और प्रभावशाली देश भी शामिल हैं, जिनके बीच आमतौर पर अलग-अलग भू-राजनीतिक हितों को लेकर मतभेद देखने को मिलते रहे हैं।
नए रास्ते तलाशने पर चर्चा
जयपुर में हुई इस बैठक में हिस्सा लेने वाले सदस्य देशों के उद्योग मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने औद्योगिक क्षमता बढ़ाने, तेज़ी से बदल रही तकनीक का लाभ उठाने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने जैसे विषयों पर विस्तार से बातचीत की।
इस मौके पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि, ब्रिक्स देशों को अपनी महत्वाकांक्षाओं को सिर्फ बातों तक सीमित न रखकर उन्हें ठोस नवाचार और व्यावहारिक साझेदारी में तब्दील करना होगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मज़बूत औद्योगिक ढांचा खड़ा करने के लिए सभी देशों को एक-दूसरे की खूबियों और क्षमताओं का आपस में लाभ उठाना चाहिए, ताकि पूरे समूह को इसका फायदा मिल सके।
गोयल ने अपने भाषण में ‘न्यू इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन पर ब्रिक्स पार्टनरशिप’ यानी PartNIR पहल का ज़िक्र करते हुए कहा कि यह मंच सदस्य देशों के बीच इस तरह के सहयोग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण ज़रिया बनकर सामने आया है। इस बार बैठक की थीम भी इसी भावना को दर्शाती थी, मज़बूती, नवाचार, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के आधार पर निर्माण।
जितिन प्रसाद ने आपसी भरोसे को बताया अहम
बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच औद्योगिक साझेदारी को और गहरा करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उनका कहना था कि, अगर सभी देश मिलकर एक ऐसा औद्योगिक भविष्य गढ़ना चाहते हैं जिसमें सबकी हिस्सेदारी हो, तो इसके लिए आपसी सहयोग, नवाचार और भरोसे को मज़बूत करना बेहद ज़रूरी है।
इसके अलावा गोयल ने अपने संबोधन में ब्रिक्स के अब तक के सफर को भी याद किया। उन्होंने 2009 में हुए पहले शिखर सम्मेलन से लेकर अब तक समूह के विकास की चर्चा करते हुए 2025 में ब्राज़ील के नेतृत्व में हुए कामकाज की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस एजेंडे को आगे ले जाने के लिए एक व्यावहारिक और सक्रिय दृष्टिकोण अपनाना चाहता है, न कि केवल औपचारिक स्तर पर बातचीत तक सीमित रहना चाहता है।
PartNIR के तहत घोषणापत्र को मिली मंज़ूरी
बैठक से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि, भारत की अध्यक्षता के दौरान PartNIR पहल के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इनमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए आपसी सहयोग का एक ढांचा तैयार करना, सौर ऊर्जा से जुड़े फोटोवोल्टिक उद्योग के लिए काम करने वाले समूह हेतु नियम-कायदे और कार्ययोजना को मंज़ूरी देना, तथा स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए नवाचार-केंद्रित विकास योजना बनाना शामिल है।

इसके साथ ही बैठक में औद्योगिक बुनियाद को मज़बूत करने वाले परिवहन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बेहतर बनाने पर भी काफी ज़ोर दिया गया। इसमें भौगोलिक सूचना प्रणाली यानी GIS पर आधारित बुनियादी ढांचे और शहरी लॉजिस्टिक्स की योजना बनाने जैसे पहलू शामिल थे। बैठक का सबसे अहम नतीजा रहा साझा घोषणापत्र को अपनाया जाना, जो यह दिखाता है कि सदस्य देश अब सिर्फ बातचीत तक सीमित न रहकर ठोस और व्यावहारिक सहयोग के कदमों को अमल में लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
लगातार बढ़ा रहा ब्रिक्स का दायरा
शुरुआत में ब्रिक्स केवल पांच देशों ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का समूह था, लेकिन 2024 में इसमें पांच और नए देश जुड़ गए, जिनमें ईरान, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं। इसी साल ब्रिक्स ने लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के 13 अन्य देशों को भी ‘साझेदार देश’ के तौर पर मान्यता दी, जो यह दर्शाता है कि ब्रिक्स+ अब वैश्विक स्तर पर एक व्यापक प्रतिनिधित्व वाला मंच बनता जा रहा है।
आंकड़ों में ब्रिक्स की ताकत
ब्रिक्स समूह की कुल आबादी अब करीब 390 करोड़ तक पहुंच चुकी है, जो दुनिया की कुल जनसंख्या का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा है। क्रय शक्ति समानता के आधार पर देखें तो इन देशों का संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (GDP) करीब 78 ट्रिलियन डॉलर है, जो वैश्विक GDP का लगभग 40 प्रतिशत बैठता है। तुलना के लिए, विकसित देशों के समूह G7 का कुल GDP इसी पैमाने पर लगभग 61 ट्रिलियन डॉलर है, यानी दुनिया के कुल GDP का करीब 28 प्रतिशत। इसके अलावा ब्रिक्स सदस्य देश मिलकर दुनिया के कुल तेल उत्पादन का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा पैदा करते हैं।
कुल मिलाकर, जयपुर में हुई यह बैठक न सिर्फ भारत की मेज़बानी क्षमता को दिखाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि मौजूदा जटिल वैश्विक परिस्थितियों में भी अलग-अलग हितों वाले बड़े देशों को एक मंच पर लाकर ठोस सहमति बनाना भारत की कूटनीति की एक बड़ी सफलता है।
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