SIR के खिलाफ कांग्रेस का हल्ला बोल, अक्टूबर में दिल्ली कूच की तैयारी, पार्टी ने मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा

नई दिल्ली। कथित वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस ने अब देशव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को हुई कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में पार्टी ने चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ सड़क से संसद तक संघर्ष करने का संकल्प लिया। बैठक में पारित प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की गई। साथ ही मतदाता सूची के विशेष गहन  पुनरीक्षण (SIR) पर रोक लगाने और सूची से हटाए गए 13 करोड़ से ज्यादा नामों को पुनः बहाल करने की भी मांग भी रखी गई।

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बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग भी उठी। इस बीच बुधवार को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में इंडिया गठबंधन की अहम बैठक होनी है, जिसमें आंदोलन का ढांचा और आगे की रणनीति तय की जाएगी।

खरगे की अध्यक्षता में हुई बैठक

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई CWC की बैठक में चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, मतदाता सूची में किए गए बदलावों और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। पार्टी नेताओं का आरोप है कि, मतदाता सूची में हुए बदलावों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संशय उठ रहा है।

Congress Working Committee (CWC) meeting

बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि, पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, कांग्रेस खुद को सिर्फ विपक्षी दल नहीं, बल्कि प्रतिरोध की पार्टी भी मानती है। ये लड़ाई  अब तब तक जारी रहेगी, जब तक इसे इसके अंजाम तक नहीं पहुंचा दिया जाएगा।

बैठक में खरगे ने मौजूदा हालात की तुलना ब्रिटिश शासन काल से की। उन्होंने कहा, जिस तरह देश को अंग्रेजों से मतदान का अधिकार हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ा था, उसी तरह आज इस अधिकार को बचाने के लिए फिर से लड़ाई लड़नी पड़ रही है। कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान को पार्टी के आंदोलन की वैचारिक जमीन के रूप में देखा जा रहा है। खरगे का ये बयान ये संकेत देता है कि, कांग्रेस इस मुद्दे को केवल चुनावी विवाद नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की लड़ाई के रूप में जनता के सामने पेश करेगी।

कांग्रेस अध्यक्ष ने रखी कई मांगे

मतदाता सूची में होने वाले हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए।
जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएं, उन्हें दोबारा से अपील का मौका दिया जाए।
राजनीतिक दलों को मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाए।
चुनाव आयोग के फैसलों में पारदर्शिता बरती जाए।

अक्टूबर में दिल्ली में बड़ा मार्च

कांग्रेस की तैयारी इस आंदोलन को केवल राजनीतिक दलों तक सीमित रखने की नहीं है। इंडिया गठबंधन अक्टूबर में दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़ा विरोध मार्च निकालने की योजना बना रहा है। इस मार्च में विपक्षी दलों के साथ सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों और किसान संगठनों को भी जोड़ने की तैयारी है। किसान संगठनों को बैठक में न्योता देने की भी योजना है। विपक्ष का मकसद इसे जनआंदोलन का रूप देना है, ताकि इस मुद्दे की गूंज दिल्ली के बाहर देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचे।

20 से ज्यादा दल जुटेंगे 

बुधवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होने वाली बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राजद, एनसीपी और वाम दलों समेत 20 से अधिक विपक्षी दलों के नेताओं के शामिल होने की संभावना है। बैठक में तय होगा कि, आंदोलन का स्वरूप क्या होगा, विरोध मार्च की तारीख और रूपरेखा क्या रहेगी और अलग-अलग राज्यों में किस तरह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

Congress Working Committee (CWC) meeting

हालांकि, सूत्रों के मुताबिक आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने इस बैठक से दूरी बनाई है। दोनों दलों की गैरहाजिरी से विपक्षी एकजुटता पर सवाल उठ सकते हैं। इससे यह भी साफ है कि आंदोलन की रणनीति पर सभी दल एक राय नहीं हैं। दोनों पार्टियों की ओर से दूरी बनाने की वजह पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

भाजपा का पलटवार

कांग्रेस जहां SIR विवाद को बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदलना चाहती है, वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे विपक्ष की ओर से संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश बताया है। भाजपा का कहना है कि विपक्ष चुनावी हार की आशंका में संस्थाओं की साख पर हमला कर रहा है। पार्टी का तर्क है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज पर इस तरह के आरोप लगाना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

सियासत का नया अखाड़ा बनी चुनाव प्रक्रिया

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब लड़ाई सिर्फ SIR या वोटर लिस्ट तक सीमित नहीं रह गई है। असली मुकाबला अब चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर सियासी विमर्श गढ़ने का है। एक ओर विपक्ष इसे लोकतंत्र और मताधिकार बचाने की लड़ाई बता रहा है, दूसरी ओर सत्तापक्ष इसे संस्थाओं पर हमला करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह टकराव और तीखा होने के आसार हैं।

फिलहाल सबकी नजरें बुधवार को होने वाली इंडिया गठबंधन की बैठक पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि विपक्ष इसमें इस मुद्दे को देशव्यापी आंदोलन बनाने की रणनीति पर मंथन करेगा। बैठक के नतीजे यह भी तय करेंगे कि अक्टूबर के प्रस्तावित विरोध मार्च में विपक्ष कितनी एकजुटता दिखा पाता है।

 

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