पाकिस्तान बॉर्डर के करीब अपाचे की दहाड़, रॉकेट-तोपों की गूंज, भारत-अमेरिका का महाअभ्यास

नई दिल्ली। राजस्थान की धरती इन दिनों युद्ध जैसे माहौल की गवाह बन रही है। एक ओर आसमान में अमेरिकी मूल के खतरनाक अपाचे हेलीकॉप्टर गर्जना कर रहे हैं, तो दूसरी ओर जमीन पर भारतीय और अमेरिकी सैनिक कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध जैसी परिस्थितियों में संयुक्त कार्रवाई का अभ्यास कर रहे हैं।

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यह पूरा मिशन राजस्थान की प्रसिद्ध महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में संचालित किया जा रहा है, जो पाकिस्तान सीमा से महज 150 किलोमीटर की दूरी पर बीकानेर क्षेत्र में स्थित है। इस बार के युद्धाभ्यास की खास बात यह है कि इसमें एएच-64ई अपाचे जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू हेलीकॉप्टर भी शामिल किए गए हैं, जिससे इस अभ्यास की धार और तेज हो गई है।

हवा और जमीन की संयुक्त शक्ति का प्रदर्शन

सेना सूत्रों के मुताबिक, इस युद्धाभ्यास की शुरुआत दोनों देशों के सैनिकों द्वारा मिलकर सम्पूर्ण मिशन की रणनीति और योजना तैयार करने से हुई। इसके उपरांत जमीन पर तैनात सैनिकों और आसमान में गश्त लगा रहे अपाचे हेलीकॉप्टरों के बीच आपसी तालमेल का गहन अभ्यास किया गया। इस पूरी कवायद का मूल उद्देश्य यह परखना है कि, आपातकालीन परिस्थितियों में हेलीकॉप्टर दस्ते और जमीनी सैनिक कितनी तीव्रता, सटीकता और समन्वय के साथ एक-दूसरे के साथ मिलकर कार्रवाई को अंजाम दे सकते हैं।

India US exercise

अपाचे हेलीकॉप्टरों की मौजूदगी ने इस युद्धाभ्यास को एक बिल्कुल नया और आधुनिक स्वरूप प्रदान किया है। अभ्यास के दौरान सैनिकों ने हवाई हमले और जमीनी कार्रवाई के बीच समन्वय स्थापित करने, निरंतर आपसी संपर्क बनाए रखने और सही समय पर निर्णायक कार्रवाई करने जैसी अहम रणनीतियों का अभ्यास किया। यह प्रशिक्षण आधुनिक युद्ध की जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जहां जमीन, आसमान और तकनीक तीनों का तालमेल किसी भी सैन्य अभियान की सफलता के लिए अनिवार्य माना जाता है।

एक-दूसरे की सैन्य कार्यप्रणाली को समझने का अवसर

यह संयुक्त अभ्यास न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय और अमेरिकी सैनिकों के लिए एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, रणनीति और तकनीकों को नजदीक से समझने का भी सुनहरा अवसर साबित हो रहा है। दोनों देशों की सेनाएं इस अभ्यास के माध्यम से समान प्रक्रियाओं को अपनाने, आपसी संचार व्यवस्था को सुदृढ़ करने और संयुक्त तालमेल को और बेहतर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही हैं।

वर्ष 2026 के इस युद्धाभ्यास में अपाचे हेलीकॉप्टरों की सक्रिय भागीदारी इस बात का स्पष्ट संकेत देती है कि यह अभ्यास अब केवल जमीनी सैनिकों के पारंपरिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रह गया है। इसके विपरीत, इसमें हवाई शक्ति और थल सेना की ताकत को एक साथ मिलाकर, समन्वित एवं संयुक्त सैन्य कार्रवाई की उन्नत रणनीतियों का अभ्यास कराया जा रहा है, जो आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप है।

तोपों की गूंज के बीच रॉकेट लॉन्चर  

इस युद्धाभ्यास से पहले महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हॉवित्जर तोपों और स्वदेशी धनुष तोप प्रणाली से जोरदार फायरिंग अभ्यास किया गया था। इसके साथ ही शक्तिशाली पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर का भी व्यापक इस्तेमाल किया गया, जिसने पूरे इलाके में युद्ध जैसा माहौल पैदा कर दिया। दोनों देशों के जवानों ने इस दौरान संयुक्त रूप से फायरिंग अभ्यास को अंजाम दिया, जिसमें भारतीय और अमेरिकी सैनिकों ने विभिन्न प्रकार की हथियार प्रणालियों पर बारीकी से प्रशिक्षण हासिल किया।

फायरिंग रेंज पर लगातार गूंजती तोपों की आवाज के बीच दोनों सेनाओं ने एक-दूसरे की फायरिंग तकनीकों, कार्यप्रणालियों और सुरक्षा मानकों को करीब से समझा और परखा। यह अनुभव दोनों देशों की सेनाओं के लिए भविष्य में संभावित संयुक्त अभियानों की दृष्टि से बेहद मूल्यवान साबित होगा।

अभ्यास में शामिल घातक हथियार प्रणालियां

सेना द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस व्यापक युद्धाभ्यास में एम-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोप, स्वदेशी धनुष तोप और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर जैसी शक्तिशाली हथियार प्रणालियों से फायरिंग की गई। इसके अतिरिक्त एल-70 एयर डिफेंस तोपों और अत्याधुनिक एम-लिड्स प्रणालियों को भी अभ्यास के दौरान सक्रिय भूमिका में देखा गया।

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इस समूचे संयुक्त प्रशिक्षण अभियान का प्रमुख उद्देश्य फायरिंग अभियानों की सूक्ष्म योजना तैयार करना, दोनों सेनाओं के बीच समन्वय को मजबूत बनाना और संयुक्त कार्रवाई में बेहतर तालमेल विकसित करना रहा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि, इस तरह के अभ्यास न केवल सैन्य क्षमताओं को निखारते हैं, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता को भी मजबूती प्रदान करते हैं।

निगरानी के लिए ऑब्जर्वेशन पोस्ट और लक्ष्य-भेदन का अभ्यास

इस पूरे युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाओं की ऑब्जर्वेशन पोस्ट टुकड़ियों ने भी संयुक्त रूप से गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान सैनिकों ने संभावित लक्ष्यों की सटीक पहचान करने, लक्ष्य की सही स्थिति की जानकारी संबंधित इकाइयों तक पहुंचाने, उस पर आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाने और समय रहते फायर आदेश जारी करने जैसी महत्वपूर्ण सैन्य प्रक्रियाओं का व्यापक अभ्यास किया।

22वें संस्करण में 1200 सैनिकों की भागीदारी

गौरतलब है कि, भारत और अमेरिका के बीच आयोजित हो रहे इस युद्धाभ्यास का यह 22वां संस्करण है। इस बार का अभ्यास उत्तराखंड के बर्फ से ढके ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र औली से शुरू होकर राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज तक फैला हुआ है, जो इस बात को दर्शाता है कि दोनों सेनाएं अलग-अलग भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों में अपनी संयुक्त क्षमताओं को परखने पर विशेष जोर दे रही हैं।

इस व्यापक सैन्य अभ्यास में भारत और अमेरिका के कुल मिलाकर 1,200 से अधिक सैन्यकर्मी सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। आधुनिक युद्ध तकनीकों के अनुरूप, अभ्यास के दौरान सैनिकों ने निगरानी और टोह लेने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक और स्वायत्त प्रणालियों (ऑटोनॉमस सिस्टम्स) का भी व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किया, जो आज के डिजिटल युद्धक्षेत्र की बदलती जरूरतों को दर्शाता है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान सीमा के इतने नजदीक इस तरह के बड़े पैमाने पर आयोजित हो रहे भारत-अमेरिका संयुक्त युद्धाभ्यास के कई सामरिक और कूटनीतिक निहितार्थ हैं। यह अभ्यास न केवल दोनों देशों की सैन्य साझेदारी को नई ऊंचाई देता है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के दृष्टिकोण से भी इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

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