
जेनेवा। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 62वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान और 57 इस्लामिक देशों वाले संगठन ओआईसी को जमकर ललकारा है। भारत की स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। पाकिस्तान के बेबुनियाद, दुर्भावनापूर्ण और झूठे आरोपों को भारत पूरी तरह खारिज करता है। ओआईसी द्वारा जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर की गई किसी भी टिप्पणी या हस्तक्षेप को भी भारत सिरे से नकारता है।
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भारत के खिलाफ जहर उगलता है OIC
अनुपमा सिंह ने कहा कि, पाकिस्तान अपनी घरेलू नाकामियों, आर्थिक असफलताओं और आतंकवाद को समर्थन देने की नीति से ध्यान भटकाने के लिए प्रोपेगैंडा का सहारा लेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि, पाकिस्तान ओआईसी के कोऑर्डिनेटर की भूमिका का गलत इस्तेमाल कर भारत के खिलाफ जहर घोल रहा है। यह प्रोपेगैंडा पाकिस्तान की असली सच्चाई को छिपाने का एक माध्यम है।
क्या है OIC
ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देशों का संगठन है जिसमें 57 सदस्य देश शामिल हैं। इसकी स्थापना 1969 में की गई थी। इस मुख्य उद्देश्य मुस्लिम देशों के हितों की रक्षा करना है। ओआईसी का मुख्यालय सऊदी अरब के जेद्दाह शहर में है।

यह संगठन शुरू से ही सऊदी अरब के प्रभाव में रहा है। समय के साथ ओआईसी पाकिस्तान के लिए भारत के खिलाफ प्रचार का प्रमुख मंच बन गया है। पाकिस्तान ओआईसी का इस्तेमाल लगातार भारत की छवि खराब करने, कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने और मुस्लिम देशों में भारत के खिलाफ राय बनाने के लिए करता है।
हालांकि, यहां गौर करने वाली बात ये भी है कि, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश है (इंडोनेशिया और पाकिस्तान के बाद), बावजूद इसके पाकिस्तान के विरोध की वजह से भारत आज तक ओआईसी का सदस्य नहीं बन सका है।
ओआईसी और कश्मीर मुद्दा
ओआईसी ने कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ कई बार प्रस्ताव पारित किए हैं। साल 1990 में ओआईसी के विदेश मंत्रियों की बैठक में पहली बार कश्मीर में भारत की सुरक्षा नीतियों की आलोचना की गई। इसके बाद साल 1994 में ओआईसी ने कश्मीर पर एक संपर्क समूह बनाया, जिसमें पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की, अजरबैजान और नाइजर शामिल हैं।
यह समूह कश्मीर में आत्मनिर्णय के मुद्दे को बढ़ावा देने और ओआईसी सदस्य देशों के बीच समन्वय बनाने का काम करता है।ओआईसी ने भारत के उन कानूनों की भी बार-बार आलोचना की है जो जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार देते हैं। संगठन पाकिस्तान के इशारे पर नियमित रूप से भारत के खिलाफ बयान जारी करता रहता है।
अनुपमा सिंह ने दिया करारा जबाव
UNHRC में अनुपमा सिंह ने बहुत मजबूती से भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा, भारत को पाकिस्तान और ओआईसी की टिप्पणियों पर जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हम पाकिस्तान के सभी बेबुनियाद आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। ओआईसी द्वारा जम्मू-कश्मीर का कोई भी जिक्र भारत स्वीकार नहीं करता।
उन्होंने आगे कहा कि, पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन करने वाला देश है और अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रोपेगैंडा फैलाता है। ओआईसी कोऑर्डिनेटर की भूमिका का दुरुपयोग इस धोखे को और मजबूत बनाता है।
भारत ने साफ़ किया रुख
भारत का रुख हमेशा से साफ रहा है कि, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसके अविभाज्य हिस्से हैं। 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद क्षेत्र में विकास, शांति और लोकतंत्र की प्रक्रिया तेज हुई है। चुनाव हुए, पर्यटन बढ़ा, युवाओं को रोजगार के अवसर मिले और आतंकवाद पर लगाम लगी है।

भारत बार-बार कह चुका है कि, ओआईसी को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। कश्मीर मुद्दा द्विपक्षीय है और इसे पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बातचीत से ही सुलझाया जा सकता है, बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
OIC में भी है मतभेद
ओआईसी हालांकि, 57 देशों का बड़ा संगठन है, लेकिन इसमें भी मतभेद हैं। कई मुस्लिम देश भारत के साथ मजबूत आर्थिक, रक्षा और ऊर्जा संबंध रखते हैं। सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, ओमान जैसे देश भारत को महत्वपूर्ण साझेदार मानते हैं। इन देशों ने हाल के वर्षों में भारत के साथ संबंधों को प्राथमिकता दी है।
फिर भी पाकिस्तान ओआईसी जैसे मंचों पर अपना वर्चस्व बनाए रखने की कोशिश करता है। जानकार बताते हैं कि, ओआईसी पाकिस्तान की इस्लामिक एकजुटता की रणनीति का हिस्सा बन गया है, जबकि हकीकत यह है कि, कई सदस्य देश पाकिस्तान की नीतियों से सहमत नहीं हैं।
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