
ग्लास्गो (स्कॉटलैंड)। स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में इन दिनों कॉमनवेल्थ गेम्स खेला जा रहा है, जहां भारत अपनी पुरजोर उपस्थिति दर्ज करा रहा है। 23 जुलाई से शुरू हुए इस कॉमनवेल्थ गेम्स में 74 राष्ट्रों के लगभग 3000 एथलीट्स 215 स्वर्ण पदकों के लिए जंग लड़ रहे हैं। इस गेम्स में भारत के खिलाड़ियों के 23 पदक अपने नाम कर लिए हैं। इनमें 5 स्वर्ण, 12 रजत और 6 कांस्य पदक शामिल हैं। कुल मेडल तालिका में भारत 10वें स्थान पर है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 55 स्वर्ण समेत 128 पदकों के साथ पहले स्थान पर है, जबकि इंग्लैंड, कनाडा, स्कॉटलैंड और नाइजीरिया भी शीर्ष स्थानों पर संघर्ष कर रहे हैं।
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ऐतिहासिक उपलब्धि
भारतीय प्रदर्शन की खासियत यह है कि, छोटे प्रोग्राम वाले इन खेलों में, जहां कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और हॉकी जैसे पारंपरिक मजबूत खेल शामिल नहीं हैं, फिर भी वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स, पैरा स्पोर्ट्स और जूडो जैसे क्षेत्रों में भारत ने अपनी क्षमता साबित की है। 122 सदस्यीय भारतीय दल ने न सिर्फ पदक जीते बल्कि कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं, जो आने वाले वर्षों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगी।
वेटलिफ्टिंग
भारत की पदक मुहिम की शुरुआत पैरा पावरलिफ्टिंग से हुई। झंडू कुमार ने पुरुषों के हेवीवेट वर्ग में कांस्य पदक जीतकर देश का खाता खोला। इसके बाद वेटलिफ्टिंग हॉल में भारतीयों का जलवा छाया। मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलो वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। यह उनका कॉमनवेल्थ गेम्स में तीसरा स्वर्ण है, जो उनकी लगातार मेहनत और विश्व स्तरीय प्रदर्शन का प्रमाण है।

रिशिकांत सिंह ने पुरुष 60 किलो में रजत, मुथुपांडी राजा ने 65 किलो में रजत, ज्ञानेश्वरी यादव ने महिला 53 किलो में रजत और बिंद्यारानी देवी ने 58 किलो में कांस्य पदक जीता। बाद में वल्लूरी अजय बाबू (79 किलो, रजत), हरजिंदर कौर (69 किलो, रजत) और लवप्रीत सिंह (+110 किलो, रजत) ने भी योगदान दिया।
वेटलिफ्टिंग से कुल 8 पदक (1 स्वर्ण, 6 रजत, 1 कांस्य) मिले, जो भारतीय दल की रीढ़ बने। इन प्रदर्शनों में नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बने, जो भारतीय वेटलिफ्टिंग की बढ़ती गहराई को दर्शाते हैं।
पैरा एथलेटिक्स और एथलेटिक्स
पैरा एथलीट्स ने भी गौरव बढ़ाया। शर्मिला धनकर ने महिलाओं के शॉट पुट F57 इवेंट में स्वर्ण पदक जीतकर पैरा स्पोर्ट्स में भारत का पहला स्वर्ण हासिल किया। शिल्पा के श्यला ने उसी इवेंट में कांस्य पदक अपने नाम किया। दिलीप महादू गावित ने पुरुष 100 मीटर T47 में स्वर्ण और मोहम्मद बासिल ने रजत पदक जीता। इन सफलताओं ने साबित किया कि पैरा एथलीट्स भी मुख्यधारा के एथलीट्स जितने ही सक्षम हैं।
मुख्य एथलेटिक्स में सरवेश कुशारे ने पुरुष हाई जंप में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। यह इवेंट में भारत का पहला पदक था। गुलवीर सिंह पुरुष 10,000 मीटर में रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। मुरली श्रीशंकर ने लॉन्ग जंप में रजत, सीमा कलिरामना ने महिला डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक हासिल किया।

31 जुलाई का दिन भारतीय एथलेटिक्स के लिए स्वर्णिम रहा। नीरज चोपड़ा ने पुरुष जैवलिन थ्रो फाइनल में 85.83 मीटर का थ्रो कर रजत पदक जीता, जबकि युवा यश वीर सिंह ने 85.41 मीटर (पर्सनल बेस्ट) के साथ कांस्य पदक हासिल किया। यह भारत का जैवलिन थ्रो में पहला डबल पोडियम था। तेजस्विन शंकर ने पुरुष डेकाथलॉन में 7976 पॉइंट्स के साथ कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। वे इस इवेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने, भले ही घुटने की पुरानी चोट से जूझ रहे हों।
जूडो में ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू
जूडो मैट पर भारतीयों ने कमाल कर दिया। अस्मिता देय ने महिलाओं के 48 किलो वर्ग में कनाडा की हीडी क्वाच को गोल्डन स्कोर में हराकर स्वर्ण पदक जीता। वे कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की पहली जूडो स्वर्ण विजेता बनीं। हर्ष सिंह ने पुरुष 60 किलो में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को 10-0 से हराकर स्वर्ण हासिल किया। वे पहले भारतीय पुरुष जूडोका बने जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। यामिनी मौर्य ने 57 किलो में रजत पदक जोड़ा। जूडो से कुल 3 पदक (2 स्वर्ण, 1 रजत) मिले, जो भारतीय जूडो के स्वर्ण युग की शुरुआत माने जा रहे हैं।
पदक विजेताओं की सूची
- झंडू कुमार – पैरा पावरलिफ्टिंग (मेन हेवीवेट) – कांस्य
- रिशिकांत सिंह – वेटलिफ्टिंग (पुरुष 60kg) – रजत
- मीराबाई चानू – वेटलिफ्टिंग (महिला 48kg) – स्वर्ण
- मुथुपांडी राजा – वेटलिफ्टिंग (65kg) – रजत
- ज्ञानेश्वरी यादव – वेटलिफ्टिंग (53kg) – रजत
- बिंद्यारानी देवी – वेटलिफ्टिंग (58kg) – कांस्य
- शर्मिला धनकर – पैरा एथलेटिक्स (शॉट पुट F57) – स्वर्ण
- सरवेश कुशारे – एथलेटिक्स (मेन हाई जंप) – रजत
- शिल्पा के श्यला – पैरा एथलेटिक्स (शॉट पुट F57) – कांस्य
- वल्लूरी अजय बाबू – वेटलिफ्टिंग (79kg) – रजत
- हरजिंदर कौर – वेटलिफ्टिंग (69kg) – रजत
- गुलवीर सिंह – एथलेटिक्स (10,000m) – रजत
- मुरली श्रीशंकर – एथलेटिक्स (लॉन्ग जंप) – रजत
- दिलीप गावित – पैरा एथलेटिक्स (100m T47) – स्वर्ण
- मोहम्मद बासिल – पैरा एथलेटिक्स (100m T47) – रजत
- लवप्रीत सिंह – वेटलिफ्टिंग (+110kg) – रजत
- सीमा कलिरामना – एथलेटिक्स (वुमन डिस्कस) – कांस्य
- अस्मिता देय – जूडो (वुमन 48kg) – स्वर्ण
- हर्ष सिंह – जूडो (मेन 60kg) – स्वर्ण
- यामिनी मौर्य – जूडो (57kg) – रजत
- तेजस्विन शंकर – एथलेटिक्स (डेकाथलॉन) – कांस्य
- यश वीर सिंह – एथलेटिक्स (जैवलिन) – कांस्य
- नीरज चोपड़ा – एथलेटिक्स (जैवलिन) – रजत
किस खेल में मिले कितने पदक
पदक तालिका पर नजर डालें, तो भारत को सबसे ज्यादा सफलता वेटलिफ्टिंग में मिली है, जहां खिलाड़ियों ने 8 पदक जीते। इसके बाद एथलेटिक्स में 7, पैरा एथलेटिक्स में 4, जूडो में 3 और पैरा पावरलिफ्टिंग में 1 पदक भारत के खाते में आया है।
बॉक्सिंग से कई उम्मीदें
भारतीय बॉक्सिंग टीम से अभी भी कई पदकों की उम्मीद बाकी है। स्टार बॉक्सर लवलीना बोरगोहाइन समेत कुल 10 भारतीय मुक्केबाज फाइनल मुकाबले तक पहुंचने में कामयाब रहे हैं। 1 और 2 अगस्त को होने वाले इन फाइनल मुकाबलों से देश को कई स्वर्ण पदकों की उम्मीद है। इसके अलावा ट्रैक साइक्लिंग, बाउल्स और अन्य कई स्पर्धाओं में भी भारतीय एथलीट पूरी मेहनत के साथ पदक जीतने के प्रयास में जुटे हुए हैं।
छोटे संसाधनों से बड़ी सफलता
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय ओलंपिक संघ, खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और कोचों की सुनियोजित रणनीति ने सीमित संसाधनों के बावजूद देश को बेहतरीन नतीजे दिलाए हैं। यश वीर, अस्मिता और हर्ष जैसे युवा एथलीटों का उभरना आने वाले समय के लिए एक उज्ज्वल भविष्य की तस्वीर पेश करता है। साथ ही पैरा स्पोर्ट्स में हो रहा बढ़ता निवेश भी अब सकारात्मक नतीजे देना शुरू कर चुका है।
आंकड़ों से कहीं बढ़कर हैं ये पदक
ये 23 पदक केवल कागज पर लिखे आंकड़े भर नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे लाखों एथलीटों के सपने, उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत और देश के गांव-शहर की मिट्टी से निकली संघर्ष की कहानियां छिपी हुई हैं। खेलों का यह महाकुंभ 2 अगस्त को समाप्त होगा, लेकिन भारतीय खेल इतिहास में यह अभियान लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
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