सात साल बाद घरेलू क्रिकेट खेलेंगे बाबर आजम, खुद पीसीबी से की थी अपील

पाकिस्तान की टेस्ट टीम के कप्तान बाबर आजम पिछले लंबे समय से अपने खराब प्रदर्शन को लेकर क्रिकेट प्रेमियों के निशाने पर हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि, उनके बल्ले से आखिरी अंतरराष्ट्रीय शतक चार साल पहले, यानी 2022 में निकला था। इसके बाद से अब तक वे मैदान में अपना दम नहीं दिखा सके। ऐसे मुश्किल दौर के बीच बाबर आजम ने अब एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। वे करीब सात साल बाद एक बार फिर घरेलू क्रिकेट में उतरने जा रहे हैं।

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पीसीबी से खुद की थी अपील

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बाबर आजम ने खुद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) से संपर्क कर अनुरोध किया था कि, अब वे घरेलू क्रिकेट खेलने की प्लानिंग में हैं इस लिए उन्हें किसी भी घरेलू टीम में शामिल किया जाए, ताकि वह आगामी टेस्ट सीरीज़ों के लिए खुद को मैच फिटनेस और लय के लिहाज से तैयार कर सकें।

Babar Azam

खबरों के मुताबिक, इस अनुरोध के बाद पीसीबी ने उन्हें ऑयल एंड गैस डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (OGDCL) की टीम के साथ बतौर गेस्ट प्लेयर जोड़ने का फैसला किया। बाबर अब प्रेसिडेंट्स ट्रॉफी के ग्रेड-1 फर्स्ट क्लास टूर्नामेंट में OGDCL की जर्सी में नजर आएंगे।

यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले हफ्ते ही पीसीबी ने प्रेसिडेंट्स ट्रॉफी और प्रेसिडेंट्स कप के लिए कुल आठ टीमों की घोषणा की थी, लेकिन उस समय बाबर आजम का नाम किसी भी टीम की सूची में शामिल नहीं था। ऐसे में उनकी यह वापसी खुद उनकी पहल पर संभव हो पाई है, जो इस बात का संकेत है कि कप्तान खुद अपने फॉर्म को सुधारने को लेकर कितने गंभीर हैं।

बाबर के संघर्ष की कहानी, आंकड़ों की जुबानी

बाबर आजम के हालिया प्रदर्शन के आंकड़े उनकी परेशानी को साफ तौर पर बयां करते हैं। 2022 में आए आखिरी टेस्ट शतक के बाद से अब तक किसी भी पारी में उनका सर्वाधिक स्कोर महज 88 रन का रहा है, यानी बीते चार वर्षों में वह एक बार भी तिहरे अंक के आंकड़े को नहीं छू पाए हैं। इतना ही नहीं, एक दौर ऐसा भी आया जब बाबर लगातार 18 पारियों तक अर्धशतक तक नहीं लगा सके। यह आंकड़ा किसी भी शीर्ष क्रम के बल्लेबाज, खासकर एक कप्तान के लिए बेहद चिंताजनक माना जाता है।

इस लंबे खराब दौर के चलते पाकिस्तान के कई पूर्व क्रिकेटर लगातार बाबर की बल्लेबाजी तकनीक पर सवाल उठाते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि, उनके शॉट सिलेक्शन और तकनीकी खामियों के चलते विरोधी गेंदबाज उन्हें आसानी से निशाना बना पा रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट विश्लेषकों तक, हर जगह बाबर के फॉर्म को लेकर बहस छिड़ी हुई है, जिससे उन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

2019 में खेला था घरेलू क्रिकेट

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि, इतने खराब फॉर्म के बावजूद बाबर आजम पिछले कई वर्षों से घरेलू फर्स्ट क्लास क्रिकेट से दूरी बनाए हुए थे। रिकॉर्ड्स के अनुसार, उन्होंने आखिरी बार 2019 में घरेलू फर्स्ट क्लास क्रिकेट में हिस्सा लिया था। उस सीजन में उन्होंने सिर्फ दो मैच खेले थे, लेकिन उनकी कप्तानी में सेंट्रल पंजाब टीम ने आजम ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया था।

गौरतलब है कि, सेंट्रल पंजाब टीम अब पाकिस्तान के घरेलू ढांचे में बंद हो चुकी है, जिससे यह जीत भी अब एक ऐतिहासिक अध्याय बनकर रह गई है। आंकड़ों पर गौर करें तो 2015 के बाद यह पहला मौका था जब बाबर आजम ने किसी एक सीजन में एक से ज्यादा घरेलू फर्स्ट क्लास मुकाबले खेले हों। इसके बाद के वर्षों में वह लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में व्यस्त रहने या अन्य कारणों से घरेलू टूर्नामेंट्स से नदारद रहे। यही वजह है कि उनकी मौजूदा वापसी को क्रिकेट जगत में एक बड़े और अहम फैसले के तौर पर देखा जा रहा है।

विशेषज्ञ बोले- बदलाव की उम्मीद

क्रिकेट जानकारों का मानना है कि, बाबर आजम का यह कदम सही दिशा में उठाया गया एक जरूरी प्रयास है। घरेलू क्रिकेट में नियमित रूप से खेलना किसी भी अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज के लिए फॉर्म और आत्मविश्वास वापस पाने का एक बेहतरीन जरिया माना जाता है। घरेलू स्तर पर मिलने वाला मैच प्रैक्टिस न सिर्फ तकनीकी खामियों को दूर करने में मदद करता है, बल्कि बल्लेबाज को लगातार मैच फिटनेस बनाए रखने में भी सहायक साबित होता है।

Babar Azam

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि, बाबर आजम जैसे अनुभवी और प्रतिभाशाली खिलाड़ी के लिए घरेलू क्रिकेट में उतरना आसान फैसला नहीं होता, क्योंकि इससे उन पर स्थानीय स्तर पर भी प्रदर्शन का दबाव बढ़ जाता है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह कदम जरूरी माना जा रहा था। कई पूर्व खिलाड़ियों ने पहले भी सुझाव दिया था कि बाबर को अपने खराब दौर से उबरने के लिए घरेलू क्रिकेट का सहारा लेना चाहिए।

फार्म में सुधार का दवाब

बाबर आजम की यह घरेलू वापसी ऐसे समय पर हो रही है जब पाकिस्तान टीम को आने वाले समय में कई अहम टेस्ट सीरीज़ खेलनी हैं। ऐसे में कप्तान के तौर पर उन पर न सिर्फ अपने निजी प्रदर्शन को सुधारने का दबाव है, बल्कि टीम को भी सही दिशा में आगे ले जाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। प्रेसिडेंट्स ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन आने वाले समय में यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है कि वह अपनी पुरानी लय और आत्मविश्वास दोबारा हासिल कर पाते हैं या नहीं।

क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सात साल बाद घरेलू क्रिकेट में वापसी करने वाले बाबर आजम इस मौके का कितना फायदा उठा पाते हैं और क्या यह कदम उनके फॉर्म में वापसी का रास्ता खोल पाएगा।

 

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