
गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद शहर के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। शहर की लाइफलाइन कहे जाने वाले एलिवेटेड रोड पर दिल्ली, इंदिरापुरम और वसुंधरा को जोड़ने वाली स्लिप रोड बनाने का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है। लंबे समय से इस प्रोजेक्ट का इंतजार कर रहे लाखों वाहन चालकों के लिए यह किसी सुकूनदायक खबर से कम नहीं है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने इस महत्वाकांक्षी योजना की टेंडर प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 80 करोड़ रुपये आंकी गई है।
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इस मार्ग से रोजाना गुजरते हैं हजारों वाहन
गौरतलब है कि, यह एलिवेटेड रोड गाजियाबाद के सबसे व्यस्ततम मार्गों में से एक है, जिस पर रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। खासतौर पर पीक ऑवर्स में यहां जाम की स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि लोगों को कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में ही घंटों लग जाते हैं।

स्लिप रोड के तैयार होने के बाद इस समस्या से रोजाना जूझने वाले 5 लाख से अधिक वाहन चालकों को स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे न सिर्फ लोगों के कीमती समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन की खपत में भी बड़ी कमी आएगी, जिसका सीधा फायदा आम जनता की जेब पर भी पड़ेगा।
पूरी हुईं औपचारिकताएं
जीडीए के अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी तकनीकी और कागजी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया है। लंबी प्रक्रिया के बाद अब टेंडर फाइनल हो चुका है और इसका जिम्मा जेएसपी कंस्ट्रक्शन फर्म को सौंपा गया है, जो अब इस स्लिप रोड के निर्माण कार्य को अंजाम देगी। योजना के मुताबिक, वाहनों की रफ्तार और सुरक्षा दोनों का ध्यान रखते हुए एक मजबूत और चौड़ा कैरिजवे तैयार किया जाएगा, जिसकी चौड़ाई 7.5 मीटर रखी गई है। इतनी चौड़ी सड़क बनने से वाहनों की आवाजाही सुगम होगी और दुर्घटनाओं की आशंका भी काफी हद तक कम हो जाएगी।
दो अलग-अलग रैंप से मिलेगी राहत
इस पूरी परियोजना के तहत दो अलग-अलग रैंप बनाए जाने की योजना है, जो अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों को राहत देंगे।
पहला रैंप, जिसे रैंप-1 नाम दिया गया है, खासतौर पर उन वाहनों के लिए तैयार किया जाएगा जो दिल्ली की तरफ से वसुंधरा की ओर आते हैं। यह रैंप वैशाली क्षेत्र से होते हुए सीधे साहिबाबाद की तरफ निकलेगा। इससे वसुंधरा और साहिबाबाद इलाके में रहने वाले लोगों को दिल्ली से आने-जाने में काफी आसानी होगी और उन्हें अनावश्यक रूप से जाम में फंसकर समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा।
दूसरा रैंप, यानी रैंप-2, इंदिरापुरम इलाके में स्थित कनावनी मंदिर के पास से एलिवेटेड रोड से जुड़ेगा। यह रैंप खासतौर पर उन वाहन चालकों के लिए फायदेमंद साबित होगा, जो इंदिरापुरम से दिल्ली की ओर जाना चाहते हैं। इस रैंप के बन जाने से दिल्ली जाने वाले वाहनों को बिना किसी रुकावट के सीधा और सुगम रास्ता मिल सकेगा, जिससे इंदिरापुरम से दिल्ली के बीच का सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा।
चौराहों पर बनेंगे आधुनिक गोलचक्कर
सिर्फ स्लिप रोड ही नहीं, बल्कि यातायात को और बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने के लिए इस पूरे रूट पर दो अत्याधुनिक गोलचक्कर (राउंडअबाउट) भी विकसित किए जाएंगे। इन गोलचक्करों का मकसद चौराहों पर लगने वाले जाम को कम करना और वाहनों की आवाजाही को सुचारू रूप से चलाना है।

अक्सर देखा गया है कि, चौराहों पर सिग्नल या अव्यवस्था के चलते वाहन एक-दूसरे में उलझ जाते हैं, जिससे जाम की स्थिति और गंभीर हो जाती है। आधुनिक डिजाइन वाले इन गोलचक्करों से इस समस्या का काफी हद तक समाधान होने की उम्मीद जताई जा रही है।
बचेगा समय
इस पूरी परियोजना का सबसे बड़ा और सीधा फायदा समय की बचत के रूप में देखने को मिलेगा। मौजूदा हालात की बात करें तो जाम के कारण जिस सफर को पूरा करने में लोगों को एक घंटे से लेकर सवा घंटे तक का वक्त लग जाता है, स्लिप रोड बनने के बाद वही दूरी महज 20 से 25 मिनट में तय की जा सकेगी। यानी लोगों के सफर के समय में करीब तीन-चौथाई तक की कमी आ सकती है। यह न सिर्फ नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत भरा होगा, बल्कि इससे व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी क्योंकि माल की ढुलाई और आवाजाही में लगने वाला समय भी घटेगा।
मुख्य अभियंता ने दी जानकारी
जीडीए के मुख्य अभियंता आलोक रंजन ने इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि, स्लिप रोड निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह से संपन्न कर लिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि, बहुत जल्द ही मौके पर इसका निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा, ताकि लोगों को जल्द से जल्द इस सुविधा का लाभ मिल सके।
आलोक रंजन के मुताबिक, यह योजना सिर्फ मौजूदा ट्रैफिक समस्या का ही समाधान नहीं करेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में शहर में बढ़ने वाले वाहनों के दबाव को भी आसानी से संभाल सकेगी। गाजियाबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में वाहनों की संख्या हर साल तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में भविष्य को ध्यान में रखते हुए बनाई गई यह योजना दीर्घकालिक तौर पर भी काफी कारगर साबित हो सकती है।
शहरवासियों के लिए बड़ी सौगात
कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट गाजियाबाद के लाखों निवासियों और रोजाना यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए एक बड़ी सौगात साबित होने वाला है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निर्माण कार्य कब शुरू होता है और यह कितने समय में पूरा हो पाता है। अगर यह परियोजना तय समय में पूरी होती है, तो इससे गाजियाबाद के ट्रैफिक सिस्टम में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा, जिसका सीधा फायदा हर रोज इस रास्ते से गुजरने वाले हजारों लोगों को मिलेगा।
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