
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नारी सशक्तिकरण को जमीनी स्तर पर मजबूती देने को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उनके निर्देश पर स्कूलों को नारी शक्ति निर्माण का केंद्र बनाते हुए नारी शक्ति वंदन अभियान की शुरुआत की जा रही है। ये अभियान प्रदेश के परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 16 से 20 अप्रैल चलाया जाएगा। इस दौरान स्कूलों में विभिन्न गतिविधियां आयोजित होंगी। अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के आदेश के अनुसार यह अभियान पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
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बालिकाओं को मजबूत करना है मकसद
बताया जा रहा है कि, नारी शक्ति वंदन अभियान का उद्देश्य बालिकाओं में आत्मविश्वास, जागरूकता और सामाजिक भागीदारी बढ़ाना है, ताकि उन्हें शुरुआती स्तर से ही सशक्त बनाया जा सके। माना जा रहा है कि ये अभियान सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है बल्कि प्रदेश की आने वाली पीढ़ी की महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत करना है। इस महा अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि प्रशासन से लेकर स्कूल स्तर तक इसकी सफलता सुनिश्चित की जा सके।

ये अभियान मुख्य रूप से परिषदीय एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में चलाया जाएगा क्योंकि यहां ग्रामीण और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाली छात्राओं शिक्षा ग्रहण करती है और सरकार का मकसद इन्हें सशक्त बनाने का है। सरकार का मानना है कि, अगर बालिकाओं में छोटी उम्र से ही आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी का संचार कर दिया जाएगा, ताकि आने वाके समय मे वे समाज के हर क्षेत्र का नेतृत्व कर सकें।
16 अप्रैल से शुरू होगा कार्यक्रम
अभियान की शुरुआत 16 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन दिवस के एक भव्य आयोजन के साथ होगी। इस दिन का मुख्य आकर्षण उन बालिकाओं के अभिभावकों का सम्मान करना है, जिनकी उपस्थिति विद्यालय में 70 प्रतिशत से अधिक रही है। सरकार का यह कदम सीधे तौर पर उन माता-पिता को प्रोत्साहित करने की एक रणनीतिक पहल है, जो अपनी बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इसके साथ ही, राज्य भर के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं और महिला शिक्षकों द्वारा एक विशाल मानव श्रृंखला बनाई जाएगी, जो एकजुटता और महिला शक्ति का प्रतीक होगी। विकास खंड स्तर पर भी विभिन्न महिला वंदन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि, नारी सशक्तीकरण केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धरातल पर क्रियान्वित होने वाली एक जीवंत प्रक्रिया है।
अभियान के दूसरे दिन यानी 17 अप्रैल को पूरा फोकस छात्राओं के सर्वांगीण विकास और उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर रखा गया है। इस दिन स्कूलों में योगाभ्यास और खेलकूद की गतिविधियों को अनिवार्य रूप से आयोजित किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, केजीबीवी में एनसीसी और स्काउट-गाइड की छात्राओं द्वारा अनुशासन और वीरता का प्रदर्शन करने के लिए विशेष ड्रिल का आयोजन किया जाएगा।
विपरीत परिस्थिति का सामना करना सीखेंगी लड़कियां
यह ड्रिल बालिकाओं में भय मुक्त जीवन जीने और किसी भी विपरीत परिस्थिति का सामना करने का साहस पैदा करने के उद्देश्य से रखी गई है। इसी क्रम में रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण के तहत छात्राओं को मार्शल आर्ट्स और डिफेंस की तकनीकों से रूबरू कराया जाएगा, जिससे वे अपनी सुरक्षा के प्रति आत्मनिर्भर बन सकें। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से छात्राओं को भारत की महान महिला विभूतियों के जीवन पर आधारित लघु नाटिकाओं, लोकगीतों और लोकनृत्यों में भाग लेने का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपनी जड़ों और अपनी विरासत की शक्ति को पहचान सकेंगी।

अभियान के अंतिम चरण में 20 अप्रैल को छात्राओं की रचनात्मकता और उनकी वैचारिक क्षमता को निखारने पर जोर दिया जाएगा। इस दिन विद्यालयों में वाद-विवाद, निबंध लेखन, कविता पाठ और पोस्टर मेकिंग जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं के विषय भी अत्यंत प्रासंगिक रखे गए हैं, जैसे विकसित भारत में नारी की भूमिका और सशक्त नारी, समृद्ध भारत। इन गतिविधियों के माध्यम से छात्राएं न केवल अपने विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करना सीखेंगी, बल्कि उनमें एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना भी विकसित होगी।
सामाजिक ढांचे को मजबूत करना है मकसद
रंगोली और मेहंदी जैसी पारंपरिक कलाओं के माध्यम से उनकी सृजनात्मकता को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि वे कला के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बना सकें। विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि, इन सभी कार्यक्रमों का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता और उत्साह के साथ किया जाए ताकि यह अभियान केवल एक औपचारिकता बनकर न रह जाए।
सरकार की मंशा है कि, प्रदेश में एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जाए, जहां बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस करें और उन्हें महसूस हो कि वे भी समाज की मुख्यधारा का हिस्सा हैं। नारी शक्ति वंदन अभियान के माध्यम से स्कूलों में जो ऊर्जा पैदा होगी, वह निश्चित रूप से राज्य के सामाजिक ढांचे को मजबूती प्रदान करेगी और उत्तर प्रदेश को एक ऐसा राज्य बनाने की दिशा में अग्रसर करेगी जहां महिलाएं आत्मनिर्भर और सम्मानित जीवन जी सकें।
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