नोएडा हिंसा: सीएम योगी ने गठित की हाई-लेवल कमेटी, जांच के लिए मौके पर पहुंचे अधिकारी

 लखनऊ। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र नोएडा में सोमवार को स्थिति उस समय अत्यंत तनावपूर्ण हो गई जब अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों श्रमिकों का प्रदर्शन अचानक से हिंसक हो गया। वेतन वृद्धि, ओवरटाइम के उचित भुगतान और कार्यस्थल पर बेहतर सुविधाओं जैसी बुनियादी मांगों को लेकर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते तोड़फोड़ और आगजनी की भेंट चढ़ गया।

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सीएम ने तुरंत लिया संज्ञान

मामले की गंभीरता और औद्योगिक शांति को पहुंच रहे नुकसान को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल मुद्दे को संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने न केवल स्थिति को नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं, बल्कि श्रमिकों की जायज मांगों पर विचार करने और औद्योगिक सौहार्द को पुन: स्थापित करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन कर उसे मौके पर रवाना कर दिया है।

Noida violence

सोमवार की सुबह नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों के लिए किसी सामान्य दिन जैसी नहीं रही। सुबह के शुरुआती घंटों में ही विभिन्न फैक्ट्रियों और विनिर्माण इकाइयों से निकले श्रमिक भारी संख्या में सड़कों पर जुटने लगे। प्रारंभ में यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया और प्रशासन या उद्यमियों की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो श्रमिकों का आक्रोश फूट पड़ा और उत्तेजित भीड़ ने सड़कों पर खड़े वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। देखते ही देखते कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

रद्द हुईं पुलिसकर्मियों की छुट्टी

इस हिंसा की चपेट में पुलिस बल भी आया, जहां प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया। स्थिति को बेकाबू होते देख नोएडा पुलिस प्रशासन ने तत्काल कड़े कदम उठाते हुए सभी पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दीं और पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया।

जैसे ही इस उपद्रव और अशांति की खबरें लखनऊ तक पहुंची, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात बैठक की और स्पष्ट  निर्देश दिया कि, किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने श्रमिकों की समस्याओं के समाधान पर भी जोर दिया।

इसी के परिणामस्वरुप उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जनपद गौतमबुद्ध नगर में उत्पन्न इस औद्योगिक असामंजस्य को दूर करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस महत्वपूर्ण समिति की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास आयुक्त को सौंपी गई है, जबकि अपर मुख्य सचिव (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग) और प्रमुख सचिव (श्रम एवं सेवायोजन विभाग) को सदस्य के रूप में नामित किया गया है।

दोषियों के खिलाफ होगी कार्रवाई

समिति की संरचना को इस प्रकार तैयार किया गया है कि इसमें सभी पक्षों की सुनवाई हो सके। शासन ने इसमें कानपुर से एक नामित अधिकारी को सदस्य सचिव के रूप में जोड़ा है और साथ ही श्रमिक संगठनों के पांच प्रतिनिधि एवं उद्यमी संघों के तीन प्रतिनिधियों को भी शामिल किया है, ताकि संवाद की प्रक्रिया प्रभावी और पारदर्शी रहे।

Noida violence

यह उच्चस्तरीय समिति बिना किसी देरी के नोएडा पहुंच चुकी है और प्राथमिकता के आधार पर मामले की गहनता से जांच कर रही है। समिति का मुख्य कार्य उन कारणों का पता लगाना है, जिनकी वजह से यह असंतोष हिंसा में बदला और जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी है ताकि दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई और समस्याओं का निस्तारण साथ-साथ हो सके।

ओवर टाइम न देने का आरोप

श्रमिकों के इस गुस्से के पीछे लंबे समय से चली आ रही आर्थिक और प्रशासनिक मांगे बताई जा रही हैं। श्रमिक संगठनों का आरोप है कि वर्तमान महंगाई के दौर में उनके वेतन में वृद्धि नहीं की गई है और निर्धारित घंटों से अधिक काम कराने के बावजूद उन्हें ओवरटाइम का लाभ नहीं मिल रहा है।

श्रमिकों का कहना है कि, वे कई बार स्थानीय प्रशासन और प्रबंधन को अपनी शिकायतों से अवगत करा चुके थे, लेकिन उनकी उपेक्षा की गई। दूसरी ओर, शासन अब इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि कहीं इस हिंसा के पीछे किसी बाहरी तत्व या असामाजिक ताकतों का हाथ तो नहीं था, जिन्होंने जानबूझकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन को उग्र रूप दिया।

नोएडा में सुरक्षा बल तैनात

नोएडा, जो कि, उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास का इंजन माना जाता है, वहां इस तरह की अशांति न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है बल्कि यह राज्य की औद्योगिक छवि पर भी प्रभाव डालती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह त्वरित निर्णय दर्शाता है कि सरकार प्रदेश में निवेश के माहौल को सुरक्षित रखना चाहती है और साथ ही कामगारों के हितों की रक्षा के लिए भी कटिबद्ध है।

फिलहाल पूरे नोएडा में भारी सुरक्षा बल तैनात है और पुलिस उपद्रवियों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही इस विवाद के स्थाई समाधान और भविष्य की रणनीति पर कोई बड़ा फैसला होने की उम्मीद है।

 

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