मसूड़ों से खून और नीले निशान को न करें नजरंदाज, शरीर में विटामिन K की कमी का है संकेत

अगर आपके मसूड़ों से अचानक खून आने लगा है या फिर हल्की सी चोट लगने पर भी खून जल्द नहीं रुक रहा है या शरीर पर बिना किसी खास वजह के नीले-काले निशान बनने लगे हैं तो यह सामान्य बात नहीं है, इस नजरंदाज न करें। ये संकेत शरीर में विटामिन K की कमी की ओर इशारा करते हैं। विटामिन K एक ऐसा फैट-सॉल्यूबल विटामिन है जो खून के थक्के जमने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। इसकी कमी होने पर खून ठीक से नहीं जम पाता और छोटी-छोटी ज्यादा खून बहता है। यह कमी वयस्कों में कम देखी जाती है लेकिन जब होती है तो काफी परेशानी पैदा करती है।

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नवजात शिशुओं में ज्यादा होती है ये समस्या

विटामिन

 

नवजात शिशुओं में यह समस्या बहुत आम और खतरनाक होती है। इसे विटामिन K डिफिशिएंसी ब्लीडिंग या हेमोरेजिक डिजीज ऑफ द न्यूबॉर्न कहा जाता है। नवजात शिशुओं के शरीर में विटामिन K का स्टोर बहुत कम होता है क्योंकि गर्भ में मां से ज्यादा मात्रा में ट्रांसफर नहीं हो पाता और ब्रेस्ट मिल्क में भी इसकी मात्रा सीमित रहती है। साथ ही उनके आंत में अभी वो बैक्टीरिया नहीं बन पाते जो विटामिन K का उत्पादन करते हैं, इसलिए जन्म के तुरंत बाद ज्यादातर अस्पतालों में शिशुओं को विटामिन K का इंजेक्शन दिया जाता है ताकि ब्रेन हेमरेज जैसी जानलेवा स्थिति से बचा जा सके।

हड्डियों को करता है मजबूत

विटामिन K शरीर में कई महत्वपूर्ण काम करता है, लेकिन मुख्य काम खून जमने की प्रक्रिया में शामिल प्रोटीन को एक्टिवेट करना है, ताकि खून ज्यादा पतला न हो। जब यह विटामिन शरीर में पर्याप्त मात्रा में नहीं होता, तो लीवर में क्लॉटिंग फैक्टर्स ठीक से काम नहीं कर पाते और खून बहने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा यह हड्डियों को ही मजबूत करता है। विटामिन K ऑस्टियोक्लेसिन नामक प्रोटीन को सक्रिय करता है, जो कैल्शियम को हड्डियों में बांधने का काम करता है। अगर शरीर में इसकी कमी होने लगती है तो हड्डियां कमजोर पड़ सकती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। यह विटामिन दिल की सेहत से भी जुड़ा हुआ है।

धमनियों में कैल्शियम जमने से रोकता है

यह मैट्रिक्स Gla प्रोटीन को एक्टिवेट करता है जो धमनियों में कैल्शियम जमने से रोकता है। इसकी कमी होने पर आर्टरीज में कैल्सिफिकेशन हो सकता है जिससे हार्ट अटैक और अन्य हृदय रोगों का जोखिम बढ़ जाता है। कुल मिलाकर विटामिन K खून के बहाव को नियंत्रित करने, हड्डियों को मजबूत रखने और लंबे समय तक हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। वयस्कों में इसकी कमी के लक्षण धीरे-धीरे दिखाई देते हैं। मसूड़ों से खून आना, नाक से खून बहना, बहुत आसानी से नीले निशान पड़ना, नाखूनों के नीचे छोटे-छोटे खून के धब्बे, हल्की चोट में भी ज्यादा ब्लीडिंग और महिलाओं में भारी मासिक धर्म ये सभी सामान्य संकेत हैं।

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आंतरिक रक्तस्राव से बचाव

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गंभीर मामलों में पेट, आंत या मस्तिष्क में आंतरिक रक्तस्राव भी हो सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है। कुछ लोग इस कमी के ज्यादा शिकार होते हैं, जो लोग लंबे समय तक ब्लड थिनर दवाएं जैसे वारफेरिन ले रहे हैं, उनके लिए विटामिन K का प्रभाव कम हो जाता है। लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करने वाले भी जोखिम में रहते हैं क्योंकि एंटीबायोटिक्स आंत के उन बैक्टीरिया को मार देते हैं जो विटामिन K बनाते हैं। क्रोहन रोग, सीलिएक रोग, सिस्टिक फाइब्रोसिस, लिवर की बीमारी या कोई भी ऐसी स्थिति जिसमें शरीर फैट को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता, विटामिन K की कमी का कारण बन सकती है। बहुत ज्यादा मात्रा में विटामिन A या विटामिन E लेने से भी इसका असर कम हो जाता है।

इन चीजों का करें सेवन

खाने से हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक, सरसों का साग, मेथी, ब्रोकोली, केल, गोभी और ब्रसेल्स स्प्राउट्स की मात्रा बढ़ाएं। इन चीजों में पर्याप्त मात्रा में विटामिन K1 मिल जाता है। फर्मेंटेड फूड जैसे नट्टो में विटामिन K2 की बहुत ज्यादा मात्रा होती है। चीज, अंडे, मीट और कुछ डेयरी प्रोडक्ट्स भी K2 का अच्छा स्रोत हैं। वयस्क पुरुषों को रोजाना करीब 120 माइक्रोग्राम और महिलाओं को 90 माइक्रोग्राम की जरूरत होती है, जो संतुलित आहार से आसानी से पूरी हो जाती है।

कब करें डॉक्टर से संपर्क

अगर आपको मसूड़ों में खून आने या शरीर में काले धब्बे जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर जरूर संपर्क करें। ज्यादातर मामलों में ओरल सप्लीमेंट या इंजेक्शन से इसकी कमी को पूरा कर दिया जाता है। समय पर ध्यान दिए जाने पर यह कमी कभी गंभीर समस्या नहीं बनती। पौष्टिक भोजन, संतुलित जीवनशैली और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह से विटामिन K की कमी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है और किसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।

 

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