
जोड़ों का दर्द अब सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गया, बल्कि कम उम्र के लोग भी इस गंभीर समस्या का शिकार हो रहे हैं।ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों का कहना है कि, 20 से 30 साल के युवाओं में घुटनों, कमर, गर्दन और कंधों का दर्द तेजी से बढ़ रहा है। पहले इसे बुढ़ापे की निशानी माना जाता था, लेकिन आज की बदलती जीवनशैली ने इस समस्या को कम उम्र में ही आम बना दिया है।
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जीवन शैली में बदलाव से बढ़ी समस्या
कई युवा सुबह उठते ही जोड़ों में अकड़न महसूस करते हैं, थोड़ी देर बैठने के बाद खड़े होने में तकलीफ होती है या हल्की एक्सरसाइज के बाद भी दर्द बना रहता है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह हल्का दर्द आगे चलकर गंभीर समस्या जैसे आर्थराइटिस या स्थायी जोड़ों की क्षति में बदल सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, यह बदलाव अचानक नहीं आया। हमारी जीवनशैली, काम करने का तरीका और शरीर के प्रति लापरवाही ने इस समस्या को तेजी से बढ़ाया है। शहरों में डेस्क जॉब्स, मोबाइल की लत और शारीरिक गतिविधि की कमी इसकी मुख्य वजहें हैं।
भारत में पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है खासकर युवा वर्ग में। युवाओं में जोड़ों के दर्द के मुख्य कारणों में सबसे बड़ा है ज्यादा समय तक बैठे रहना।
पहला वजह
आज के समय में अधिकांश काम लैपटॉप और मोबाइल पर होता है। घंटों कुर्सी पर बैठने से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और कमजोर मांसपेशियां जोड़ों पर ज्यादा दबाव डालती हैं। इससे घुटनों, कमर और गर्दन में दर्द बढ़ता है। डॉक्टरों के अनुसार रोजाना 8 से 10 घंटे बैठे रहना जोड़ों की कार्टिलेज को नुकसान पहुंचाता है।
दूसरी वजह
मोबाइल या लैपटॉप देखते समय गर्दन नीचे झुकाना टेक्स्ट नेक सिंड्रोम पैदा करता है। झुककर बैठना या लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना गर्दन, कंधे और पीठ के जोड़ों पर असमान दबाव डालता है।
तीसरी वजह
गलत या अत्यधिक व्यायाम। जिम में अचानक भारी वजन उठाना, वार्म-अप न करना या बिना ट्रेनर के कठिन एक्सरसाइज करना जोड़ों में चोट पहुंचाता है। ओवरयूज इंजरी युवाओं में बहुत आम हो गई है।
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कोर मसल्स की कमजोरी भी बड़ी वजह है। पेट और पीठ की मांसपेशियां शरीर को सहारा देती हैं। इनके कमजोर होने से घुटनों और कमर पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
इन लक्षणों को न करें अनदेखा
मोटापा और असंतुलित आहार भी समस्या बढ़ाता है। फास्ट फूड और जंक फूड से वजन बढ़ता है जो घुटनों और कूल्हों पर दबाव डालता है। विटामिन डी और कैल्शियम की कमी हड्डियों को कमजोर करती है। भारत में युवाओं में विटामिन डी की कमी बहुत आम है।सबसे खतरनाक है दर्द को नजरअंदाज करना। कई युवा सोचते हैं कि, अभी उम्र कम है अपने आप ठीक हो जाएगा, लेकिन बार-बार दर्द होना शरीर का संकेत है। इसे अनदेखा करने से समस्या स्थायी हो सकती है। कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। जैसे कि…

सुबह उठते ही जोड़ों में 30 मिनट से ज्यादा अकड़न, सीढ़ियां चढ़ते या उतरते समय घुटनों में दर्द, कंधे घुमाने पर चटकने की आवाज, लंबे समय बैठने के बाद कमर या गर्दन में दर्द, हल्की एक्सरसाइज के बाद भी सूजन या दर्द। अगर ये लक्षण बार-बार दिखें तो तुरंत ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से जांच करवाएं। शुरुआती स्टेज में एक्स-रे, ब्लड टेस्ट या एमआरआई से समस्या पकड़ में आ जाती है और इलाज आसान होता है।
बचाव के लिए करें ये काम
- रोजाना शारीरिक गतिविधि करें। कम से कम 30 से 45 मिनट पैदल चलें, स्विमिंग या साइकिलिंग करें।
- ये व्यायाम जोड़ों पर कम दबाव डालते हुए मांसपेशियां मजबूत करते हैं।
- वर्कआउट से पहले और बाद में स्ट्रेचिंग जरूर करें, प्लैंक, ब्रिज जैसे व्यायाम कोर मसल्स को मजबूत करते हैं।
- सही पोस्चर अपनाएं, स्क्रीन आंखों की लेवल पर रखें।
- हर 30 से 40 मिनट में ब्रेक लें और खड़े होकर स्ट्रेच करें।
- एर्गोनॉमिक कुर्सी और डेस्क का इस्तेमाल करें व जन नियंत्रण रखें, संतुलित आहार लें।
- ज्यादा वजन जोड़ों पर बोझ बढ़ाता है।
- जोड़ों को आराम भी दें, लगातार काम के बाद शरीर को रेस्ट दें और अच्छी नींद लें।
- पोषण पर ध्यान दें, कैल्शियम, विटामिन डी और ओमेगा-3 से भरपूर भोजन लें।
- सूरज की रोशनी लें या डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स लें।
- दर्द 2 से 3 हफ्ते से ज्यादा रहे तो डॉक्टर से मिलें।
- फिजियोथेरेपी, दवाएं या इंजेक्शन से शुरुआती स्टेज में समस्या कंट्रोल हो जाती है।
- स्वास्थ्य मंत्रालय और ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन युवाओं को जागरूक करने के लिए अभियान चला रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बदलावों से 80 प्रतिशत मामलों में जोड़ों का दर्द रोका जा सकता है। बस समय रहते इस पर ध्यान दें कि जरूरत है।
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